Railway Alcohol Test Rules: भारतीय रेलवे में लोको पायलटों के अल्कोहल टेस्ट से जुड़े नियमों की समीक्षा का मामला करीब एक साल नतीजे पर नहीं पहुंचा। रेलवे बोर्ड अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि ट्रेन चलाने वाले कर्मचारियों के खून में अल्कोहल की कितनी मात्रा को स्वीकार किया जा सकता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात लोको पायलटों के खून में अल्कोहल की मात्रा शून्य होनी चाहिए।

यह मामला यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा होने की वजह से काफी अहम है। वहीं, लोको पायलटों के संगठनों का तर्क है कि कुछ परिस्थितियों में शराब का सेवन किए बिना भी खून में अल्कोहल की बहुत कम मात्रा पाई जा सकती है। ऐसे में जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अल्कोहल टेस्ट के नियमों की समीक्षा क्यों हो रही है?
लोको पायलटों के लिए अल्कोहल टेस्ट के नियमों पर चर्चा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास 4 नवंबर 2025 को हुए ट्रेन हादसे के बाद तेज हुई। उस दिन गेवराबिलासपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन एक खड़ी मालगाड़ी के पिछले हिस्से से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में पैसेंजर ट्रेन के लोको पायलट समेत 12 लोगों की मौत हुई थी और 20 लोग घायल हुए थे।
कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में शामिल ट्रेनों के रनिंग क्रू के ब्रेथलाइजर टेस्ट में अल्कोहल नहीं मिला था। हालांकि, खून के नमूनों की जांच में 3 से 10 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर तक अल्कोहल पाया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि पैसेंजर ट्रेन रेड सिग्नल पार कर गई थी। इसके अलावा, संबंधित लोको पायलट पहले एक जरूरी एप्टीट्यूड टेस्ट में असफल हो गया था।
लोको पायलटों के लिए अल्कोहल टेस्ट के मौजूदा नियम क्या हैं?
इंडियन रेलवे मेडिकल मैनुअल के पैराग्राफ 565 के मुताबिक, ट्रेन परिचालन से जुड़े कर्मचारियों के खून में अल्कोहल की मात्रा शून्य होनी चाहिए। रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2001 में भी इस नियम को दोहराया था।
इसका मतलब है कि लोको पायलटों को ड्यूटी के दौरान अल्कोहल के सेवन से पूरी तरह दूर रहना होता है। ट्रेन चलाने वाले कर्मचारियों की सतर्कता और निर्णय लेने की क्षमता यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में रेलवे के नियमों का उद्देश्य ड्यूटी में रहने वाले लोको पायलट एल्कोहल का सेवन करके मौजूद न रहें।
लोको पायलटों का अल्कोहल टेस्ट कैसे किया जाता है?
रेलवे में ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों के शरीर में अल्कोहल की मौजूदगी जांचने के लिए आमतौर पर ब्रेथलाइजर टेस्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया में सांस के नमूने के जरिए अल्कोहल की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।
जरूरत पड़ने पर खून के नमूने की जांच भी की जा सकती है। हालांकि, रेलवे के कुछ जोन में इस्तेमाल होने वाली प्रयोगशालाओं की जांच क्षमता को लेकर सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ लैब 10 mg/dL से कम अल्कोहल की मात्रा का सटीक पता लगाने में सक्षम नहीं हैं।
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