इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शनिवार शाम 4 बजे तक कोर्ट रूम में खड़ा रखा. हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद आरोपी को कोर्ट के समक्ष पेश न करने पर नाराजगी जताते हुए एसएसपी को भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की हिदायत भी दी. इसके साथ ही, लापरवाही बरतने के मामले में मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने यह सख्त आदेश दुष्कर्म के एक मामले में पीड़िता की ओर से दाखिल जमानत निरस्त करने की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जारी किया.
हाई कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी, कहा ‘यह चौंकाने वाला मामला’
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मेरठ की निचली अदालत और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा, यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि आरोपी को हाईकोर्ट के सामने पेश करने के लिए गैरजमानती वारंट जारी होने की जानकारी होने के बावजूद, मेरठ की अदालत ने उसे हाई कोर्ट भेजने के बजाय न्यायिक हिरासत में भेज दिया. यह तथ्य मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता को दर्शाता है.
एसएसपी की दलील खारिज, कोर्ट ने याद दिलाई जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान मेरठ के एसएसपी ने सफाई देते हुए कोर्ट को बताया कि आरोपी को पहले इसलिए पेश नहीं किया जा सका, क्योंकि उनके अधीनस्थ अधिकारी ने उसे सीजेएम के समक्ष पेश कर दिया था और सीजेएम ने उसे जेल भेज दिया था.
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि क्योंकि गैरजमानती वारंट की तामील स्वयं एसएसपी ने कराई थी, इसलिए आरोपी को हर हाल में हाई कोर्ट के सामने पेश करना सुनिश्चित करना उन्हीं का कर्तव्य था. इसी लापरवाही के कारण कोर्ट ने एसएसपी को शाम तक कोर्ट रूम में खड़े रहने की सजा सुनाई.
शादी का झांसा देकर ली थी जमानत
यह पूरा मामला एक दुष्कर्म आरोपी की जमानत से जुड़ा है. आरोपी को पहले इस आधार पर जमानत मिली थी कि वह पीड़िता से विवाह करेगा और इसके लिए उसने अदालत में शपथपत्र भी दिया था. लेकिन जमानत मिलने के बाद आरोपी ने अपना वादा पूरा नहीं किया, जिसके बाद पीड़िता ने उसकी जमानत निरस्त करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
शनिवार को कड़ी मशक्कत के बाद आरोपी को आखिरकार हाईकोर्ट के समक्ष पेश किया गया, जहां उसने पीड़िता से विवाह करने से साफ इनकार कर दिया. इसके तुरंत बाद कोर्ट ने आरोपी की जमानत को निरस्त करने का आदेश दे दिया.