अडानी पावर ने वित्त वर्ष 202627 की दूसरी तिमाही में शानदार नतीजे दर्ज किए हैं. जुलाईसितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर दोगुने से ज्यादा बढ़कर 6,919 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 2,953 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. वहीं, कंपनी की कमाई 44% बढ़कर 19,438 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. बिजली की बिक्री बढ़ने और बिजली बेचने की बेहतर कीमतों से कंपनी को फायदा हुआ.

अडानी पावर के मुनाफे और कमाई में कितना इजाफा हुआ?
अडानी पावर ने सितंबर तिमाही के नतीजों में मुनाफे और कमाई, दोनों में मजबूत बढ़त दर्ज की है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल के 2,953 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,919 करोड़ रुपये हो गया. यानी कंपनी का मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा है. इस दौरान कंपनी की कुल आय 13,457 करोड़ रुपये से बढ़कर 19,438 करोड़ रुपये हो गई. इसमें सालाना आधार पर 44% की बढ़ोतरी हुई. कंपनी की EBITDA यानी ब्याज, टैक्स और अन्य खर्चों से पहले की कमाई भी 59.8% बढ़कर 8,231.6 करोड़ रुपये हो गई. पिछले साल इसी तिमाही में यह 5,150 करोड़ रुपये थी. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 38% से बढ़कर 42.35% हो गया. आसान भाषा में समझें तो कंपनी को अपनी कमाई के मुकाबले ऑपरेटिंग स्तर पर पहले से ज्यादा फायदा हुआ.
बिजली की बिक्री बढ़ने से मिला फायदा
अडानी पावर के बेहतर नतीजों के पीछे बिजली की ज्यादा बिक्री और उसे बेचने की बेहतर कीमतों की अहम भूमिका रही. सितंबर तिमाही में कंपनी की कंसोलिडेटेड बिजली बिक्री 11.5% बढ़कर 26.4 अरब यूनिट हो गई. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 23.7 अरब यूनिट बिजली बेची थी. कंपनी के लगातार जारी कारोबार से होने वाली आय भी 28.5% बढ़कर 17,528 करोड़ रुपये हो गई. पिछले साल इसी तिमाही में यह 13,639 करोड़ रुपये थी. हालांकि, कंपनी का ईंधन खर्च भी बढ़ा है. यह 41.8% बढ़कर 10,229.38 करोड़ रुपये हो गया. इसकी वजह बिजली की ज्यादा बिक्री और आयातित कोयले की कीमत में करीब 50% की बढ़ोतरी रही. दूसरी ओर, कंपनी का ब्याज खर्च 9.7% घटकर 760.23 करोड़ रुपये रह गया. कंपनी के मुताबिक, मजबूत कैश फ्लो और कर्ज के नियंत्रित इस्तेमाल से इसमें मदद मिली.
भारत में बिजली की मांग में 11.5% की बढ़ोतरी
बिजली की मांग में हुआ इतना इजाफा
अडानी पावर के मुताबिक, वित्त वर्ष 202627 की दूसरी तिमाही में भारत में बिजली की मांग सालाना आधार पर 11.5% बढ़कर 502 अरब यूनिट हो गई. आर्थिक गतिविधियों में तेजी और कमजोर मानसून को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है. इस दौरान देश में बिजली उत्पादन 11% बढ़कर 536 अरब यूनिट पहुंच गया. जलविद्युत उत्पादन के लिए पानी की कम उपलब्धता के कारण कोयले और लिग्नाइट से बिजली बनाने वाले संयंत्रों की हिस्सेदारी बढ़ी. देश में बिजली की कुल आपूर्ति में कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली संयंत्रों की हिस्सेदारी 65% से बढ़कर 66% हो गई. इन संयंत्रों ने बिजली उत्पादन में हुई कुल बढ़ोतरी में 73% का योगदान दिया. वहीं, बिजली संयंत्रों की औसत क्षमता उपयोग दर 62% से बढ़कर 68% हो गई. इसका मतलब है कि कोयले से बिजली बनाने वाले संयंत्र पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता के साथ काम कर रहे थे. देश में बिजली की सबसे ज्यादा मांग भी बढ़कर 270 गीगावाट पहुंच गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में 230 गीगावाट थी. यानी इसमें करीब 18% की बढ़ोतरी हुई.
बिजली की कीमतों में भी तेजी
बिजली की मांग बढ़ने का असर बिजली बाजार की कीमतों पर भी दिखाई दिया. इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में एक दिन पहले बिजली की आपूर्ति के लिए तय होने वाली औसत कीमत सालाना आधार पर 46% बढ़कर 5.7 रुपये प्रति यूनिट हो गई. वहीं, रियलटाइम मार्केट में बिजली की औसत कीमत 49% बढ़कर 5.2 रुपये प्रति यूनिट पहुंच गई. रियलटाइम मार्केट में बिजली की खरीद और बिक्री कम समय के भीतर होने वाली जरूरतों के हिसाब से की जाती है. अडानी पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसबी ख्यालिया ने कहा कि कंपनी मुनाफे और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के मामले में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रही है. कंपनी का लक्ष्य भारत में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भरोसेमंद बिजली की आपूर्ति करना है.