नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और कारोबारियों के अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार नए बदलावों पर विचार कर रही है। जीएसटी रिटर्न के प्रारूप में संभावित संशोधनों को लेकर कारोबारियों से सुझाव मांगे जाने की तैयारी है। प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत 1 नवंबर से व्यापारियों और अन्य संबंधित पक्षों की राय लेने की बात कही जा रही है।

जीएसटी रिटर्न कारोबारियों के लिए कर अनुपालन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिटर्न दाखिल करने में होने वाली छोटीसी गलती भी इनपुट टैक्स क्रेडिट, कर भुगतान और नोटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में रिटर्न प्रक्रिया को आसान बनाने वाला कोई भी बदलाव व्यापार जगत के लिए अहम होगा।
क्यों बदला जा सकता है GST रिटर्न का प्रारूप?
मौजूदा जीएसटी व्यवस्था में कारोबारियों को बिक्री, खरीद, कर देनदारी और इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी जानकारियां निर्धारित प्रारूप में दर्ज करनी होती हैं। कई व्यापारिक संगठनों की ओर से प्रक्रियाओं को सरल बनाने, तकनीकी समस्याएं कम करने और अनुपालन का बोझ घटाने की मांग समयसमय पर उठाई जाती रही है।
नए खाके पर सुझाव लेने का उद्देश्य कारोबारियों की व्यावहारिक दिक्कतों को समझना और प्रस्तावित बदलावों को अंतिम रूप देने से पहले उनकी राय जानना हो सकता है।
नए नियमों से कारोबारियों को क्या होगा फायदा?
सरकार की योजना जीएसटी रिटर्न में दर्ज बिक्री, टैक्स देनदारी और इनपुट टैक्स क्रेडिट के आंकड़ों के बीच अंतर कम करने की है। जीएसटी परिषद की सिफारिशों के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों में कई अहम बिंदु शामिल हैं।
- GSTR1 और GSTR3B में बेहतर तालमेल: बिक्री के विवरण और टैक्स देनदारी का मिलान आसान बनाने के लिए रिटर्न में सुधार किए जाएंगे।
- ITC का सही हिसाब: इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों और उनमें किए गए बदलावों की रिपोर्टिंग अधिक व्यवस्थित बनाने की तैयारी है।
- रिवर्स चार्ज की जानकारी: रिवर्स चार्ज के तहत चुकाए गए टैक्स और उससे जुड़े ITC की जानकारी दर्ज करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्टेटमेंट की सुविधा प्रस्तावित है।
- गलतियों में सुधार की व्यवस्था: रिटर्न में दर्ज टैक्स देनदारी और संबंधित बिक्री विवरण के बीच अंतर होने पर उसे ठीक करने की व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है।
- नोटिस और विवादों में कमी: आंकड़ों का बेहतर मिलान होने से डेटा एंट्री की गलतियों के कारण पैदा होने वाली विसंगतियां और उनसे जुड़े नोटिस कम करने में मदद मिल सकती है।
1 नवंबर से क्या होगा?
वित्त मंत्रालय 1 नवंबर 2026 से संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म पर सार्वजनिक परामर्श शुरू करेगा। इस दौरान कारोबारी संगठनों, कर विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रस्तावित प्रारूप में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि 1 नवंबर से सुझाव लेने की प्रक्रिया शुरू होना, उसी दिन सभी नए रिटर्न नियम लागू होने के समान नहीं है। जीएसटी परिषद की सिफारिशों में रिटर्न की देनदारी और ITC में सुधार से जुड़ी प्रस्तावित व्यवस्था को अप्रैल 2027 के रिटर्न से लागू करने की बात कही गई है। अंतिम प्रभावी तारीख और प्रक्रिया के लिए सरकार की अधिसूचनाओं पर नजर रखना जरूरी होगा।
कारोबारियों को अभी क्या करना चाहिए?
कारोबारियों को अपने बिक्री बिल, खरीद के रिकॉर्ड, GSTR1, GSTR3B और ITC विवरण का नियमित मिलान करना चाहिए। किसी भी अंतर को समय रहते ठीक करने से भविष्य में टैक्स संबंधी विवादों और अनावश्यक नोटिस का जोखिम कम हो सकता है।