बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई. रुपये की मजबूती, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर वैश्विक रुझानों के कारण निवेशकों का उत्साह कम हुआ. ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,300 रुपये घटकर 1,49,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई. पिछले सत्र में सोना 1,50,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. लगातार दो सत्रों तक स्थिर रहने के बाद चांदी की कीमतों में गिरावट आई और यह 1,600 रुपये गिरकर 2,13,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. सोमवार को चांदी 2,15,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी.

बाजार का ट्रेंड कमजोर
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि बुधवार को सोने में कमजोरी रही, क्योंकि रुपये की मजबूती ने घरेलू कीमतों पर दबाव बनाए रखा. उन्होंने आगे कहा कि रुपये की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंता के बीच कुल मिलाकर बाजार का रुझान कमजोर बना हुआ है. डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई के हस्तक्षेप के चलते, बुधवार को रुपया 48 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.43 पर बंद हुआ.
पीएल कैपिटल के कमोडिटी प्रमुख आशीष राजोदिया ने बताया कि घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई. ईरान शांति समझौते की शुरुआती उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई, जिससे कुछ समय के लिए कीमती धातुओं को सहारा मिला. यह बढ़त तब खत्म हो गई जब कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आ गई. ऐसा तब हुआ जब ईरान ने कहा कि अमेरिका के साथ राजनयिक स्तर पर कोई प्रगति होने की उम्मीद कम है.
आगे की क्या रहेगी स्थिति
वैश्विक बाजारों में, हाजिर सोना 4,127.68 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा, जबकि चांदी 0.48 प्रतिशत गिरकर 57.72 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गई. ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म कोटक नियो में कमोडिटी रिसर्च की AVP कायनात चेनवाला ने कहा कि स्पॉट गोल्ड 4,126 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी पिछले सत्र में 58.60 अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने के बाद गिरकर 57.10 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गई है.
उन्होंने आगे कहा कि तेल की ऊंची कीमतें मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण को जटिल बना रही हैं, हालांकि अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में कमजोरी ने कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट को रोक रखा है. चेनवाला ने कहा कि अमेरिका से कोई बड़ा आर्थिक डेटा आने वाला नहीं है, इसलिए आने वाले कुछ सत्रों में बॉन्ड मार्केट की हलचल और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव ही कारोबार की दिशा तय करेंगे. इसके बाद, अगले हफ्ते फेडरल रिजर्व की अक्टूबर नीति बैठक पर सबकी नजरें होंगी.