दिल्ली में आज निषाद पार्टी का बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिल सकता है. पार्टी अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम के लिए दिल्ली चलो की अपील की गई है. 12 साल बेमिसाल, मछुआरों का हुआ उत्थान के नारे के साथ हजारों कार्यकर्ताओं के जुटने की तैयारी है. इस संबंध में संजय निषाद ने एक्स पर पोस्ट शेयर कर दावा किया है कि तालकटोरा स्टेडियम में उमड़ने वाला जनसैलाब उनके बच्चों का भविष्य तय करने वाला है.

उन्होंने लिखा, ‘आरक्षण के लिए सत्ता से भी लड़ने का शंखनाद हो चुका है, तालकटोरा में अपनी चट्टानी एकता दिखाएं. मंत्री डॉ. संजय निषाद जी का यह आह्वान हर उस निषाद के लिए पुकार है, जिसके दिल में अपने समाज के खोए हुए गौरव और आरक्षण को पाने की तड़प है. राजनीति में हिस्सेदारी केवल उन्हीं को मिलती है, जो समय आने पर अपनी एकजुटता की ताकत दिखाना जानते हैं. रणभेरी बज चुकी है और काफिले निकल चुके हैं. जो साथी अभी तक रवाना नहीं हुए हैं, वे बिना एक पल गंवाए तुरंत दिल्ली के लिए प्रस्थान करें. सुबह तालकटोरा स्टेडियम में उमड़ने वाला जनसैलाब ही हमारे बच्चों के भविष्य और आरक्षण की तकदीर लिखेगा. न थकेंगे, न रुकेंगे और अपने हक के लिए तालकटोरा में इतिहास रचेंगे.’
संवैधानिक अधिकार को लेकर जुटान
बीते दिन संजय निषाद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर कहा है कि यह उनके सम्मान, उनके अधिकार और उनकी पहचान की आवाज है. यह उन पुरखों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने नदियों के किनारे पसीना बहाया और उन बच्चों के भविष्य की नींव है जो आज बेहतर शिक्षा और रोजगार का सपना देख रहे हैं. उन्होंने दिल्ली में जुटने को लेकर बताया कि ये संवैधानिक अधिकार, मछुआ समुदाय के सम्मान, बच्चों की शिक्षारोज़गार, समाज की एकता और स्वाभिमान के लिए जुटान हो रहा है.
बीजेपी पर दवाब बनाने की कोशिश
उनका कहना है कि जब हजारों कदम एक साथ चलते हैं, तो आवाज खुद दूर तक पहुंचती है. जब कार्यकर्ता, वॉलंटियर और समर्थक एक मंच पर आते हैं, तो उनके मुद्दे सीधे नेतृत्व और सार्वजनिक मंच तक पहुंचते हैं. लोगों की एक मौजूदगी उनकी ताकत में एक और कड़ी जोड़ती है. दरअसल, मछुआ समाज की उपजातियों को अनुसूचित जाति का लाभ दिलाने समेत कई मांगों को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज की राजनीतिक ताकत और अपने जनाधार को प्रदर्शित करने व भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.