: कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेताओं की रिहाई के बाद अब सवाल है कि क्या पार्टी दोबारा जंतरमंतर पर प्रदर्शन कर पाएगी? अभिजीत दीपके , सौरव दास और आशुतोष रांका को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेशी के बाद रिहा किया गया। तीनों ने एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपये का जमानती मुचलका भरा है। ऐसे में उनके अगले प्रदर्शन और कानूनी शर्तों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

क्या है रिहाई की शर्त?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, तीनों नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर उन्हें रिहा किया गया।
इस मामले में सबसे अहम बात यह है का मतलब एक साल तक प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगना नहीं है। बल्कि शांति बनाए रखने का बॉन्ड और प्रदर्शन पर प्रतिबंध, दोनों अलगअलग कानूनी विषय हैं। हालांकि, बॉन्ड की पूरी लिखित शर्तें देखे बिना यह दावा नहीं किया जा सकता कि नेताओं पर कोई अतिरिक्त प्रतिबंध लगाया गया है या नहीं।
: दोबारा प्रदर्शन किया तो क्या होगा?
यदि CJP नेता दोबारा जंतरमंतर पर प्रदर्शन करते हैं, तो कार्रवाई का सवाल इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण है या नहीं और प्रशासन की ओर से कौनसे आदेश लागू हैं। यही वजह है कि इन शर्तों को को समझना जरूरी है।
अगर प्रदर्शन के लिए अनुमति जरूरी है, तो संबंधित नियमों का पालन करना होगा। किसी प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने या कानूनव्यवस्था बिगाड़ने की स्थिति में पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है। वहीं, केवल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाने को अपने आप शांति भंग करना नहीं माना जा सकता।
इसलिए प्रदर्शन की इजाजत का मुद्दा नेताओं की रिहाई से अलग है। कोर्ट से रिहाई मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें जंतरमंतर पर दोबारा प्रदर्शन करने की स्वत: अनुमति भी मिल गई है।
: क्या 50 हजार रुपये जब्त हो सकते हैं?
तीनों नेताओं ने 50 हजार रुपये का जमानती बॉन्ड भरा है। यदि मुचलके की शर्तों का उल्लंघन होता है , तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, रकम अपने आप जब्त नहीं हो जाती। इसके लिए शर्तों, उल्लंघन के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों को देखना होगा।
अगर प्रदर्शन के दौरान कोई नया अपराध होता है, तो पुलिस उस मामले में अलग से कार्रवाई भी कर सकती है। ऐसे में नेताओं के लिए जरूरी होगा कि वे अपनी मांग उठाते समय मुचलके की शर्तों और प्रशासन के आदेशों का पालन करें।
: अब आगे क्या?
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतरमंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। इससे पहले पुलिस ने से जुड़े घटनाक्रम के दौरान तीनों नेताओं को हिरासत में लिया था। रिहाई के बाद अब आगे की रणनीति और प्रदर्शन की अनुमति को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण होगी।