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‘मुझे BJP से विधानसभा चुनाव लड़ना है’, HC से नंदलाल को राहत; मर्डर केस में मिली थी उम्रकैद की सजा​

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के चर्चित प्रमोद निगम हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे नंदलाल राय उर्फ बबलू राय को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहने तक उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी है. अदालत ने जमानत भी मंजूर की है. नंदलाल […]

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के चर्चित प्रमोद निगम हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे नंदलाल राय उर्फ बबलू राय को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहने तक उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी है. अदालत ने जमानत भी मंजूर की है. नंदलाल राय ने अदालत में दलील दी थी कि वह पहले भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं और 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं… चाहे निर्दलीय या फिर बीजेपी के टिकट पर.

दरअसल, पूरा मामला वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. वाराणसी की ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 को नंदलाल राय को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी. इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी.

चुनाव लड़ने की इच्छा का दिया हवाला

अपीलकर्ता नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की ओर से अदालत में कहा गया कि वह दोषसिद्धि के पहले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे और 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में या संभव होने पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं. उनकी दलील थी कि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने की स्थिति में वह चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित हो सकते हैं. बचाव पक्ष ने मामले में साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और कथित हथियार की बरामदगी का सवाल उठाया.

अदालत ने क्या कहा?

जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए अपील लंबित रहने तक दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि किसी आम नागरिक की आजीविका का अधिकार किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुताबिक, अपील पर अंतिम निर्णय आने तक अपीलकर्ता को राहत दिया जाना न्यायोचित है.

बरी नहीं हुए हैं नंदलाल राय

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का मतलब यह नहीं है कि नंदलाल राय को हत्याकांड में बरी कर दिया गया है. ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील अभी लंबित है. हाईकोर्ट ने फिलहाल दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई है. इसके साथ ही जमानत दी है. मामले में अंतिम निर्णय अपील की सुनवाई के बाद होगा.

टॉयलेट को लेकर हुआ था विवाद

वाराणसी में राष्ट्रीय फेरीपटरी ठेला व्यवसायी संगठन के संस्थापक प्रमोद निगम की 17 जनवरी 2017 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. प्रमोद निगम जवाहर मार्केट में ठेला लगाते थे और नगर निगम ने उन्हें स्वच्छता दूत नामित किया था. घटना वाले दिन नंदलाल राय उर्फ बबलू राय बीयर पीने के बाद जवाहर मार्केट में खुले में टॉयलेट कर रहा था. दुकानदारों के रोकने पर विवाद हुआ और प्रमोद निगम ने उसे चारपांच थप्पड़ मार दिए.

पुलिस पूछताछ में नंदलाल ने कथित तौर पर बताया था कि इस घटना से अपमानित महसूस करने के बाद उसने प्रमोद को सबक सिखाने का फैसला किया. वह घर से पिस्टल लेकर आया और अपने साथी शेषनाथ शर्मा को साथ लिया. इसके बाद इंग्लिशिया लाइन तिराहे से मलदहिया की ओर जा रहे प्रमोद निगम का बाइक से पीछा किया और गोली मार दी.

कौन है नंदलाल राय?

नंदलाल राय उर्फ बबलू राय मूल रूप से गाजीपुर जिले के करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के जोगामुसाहिब गांव का निवासी है. उसे मुख्तार अंसारी का करीबी बताया जाता है. वह भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में अहम गवाह रहा था. बाद में वह अपनी गवाही से पलट गया और मुख्तार अंसारी के करीब आ गया. प्रमोद निगम हत्याकांड में आठ साल तक चले मुकदमे के बाद वाराणसी की अदालत ने 15 अप्रैल 2025 को नंदलाल राय और शेषनाथ शर्मा को उम्रकैद दी थी.

साथ ही अदालत ने नंदलाल पर 60 हजार और शेषनाथ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था. जुर्माने की राशि का 50 प्रतिशत प्रमोद निगम के बेटे अभिषेक निगम को देने का आदेश दिया. अभियोजन पक्ष ने मुकदमे में 12 गवाह पेश किए थे. इस फैसले को नंदलाल ने हाई कोर्ट में चैलेंज किया था और दोषसिद्धि के साथ ही सजा पर रोक लगाने की मांग की थी. फिलहाल, हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि के साथ ही सजा पर रोक लगा दी.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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