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Crime

दुर्ग: वर्दी में शराब पीकर सोए ASI और आरक्षक निलंबित​

अंबिकापुर में पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाले मामले में दुर्ग पुलिस के दो कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। मुलजिम पेशी ड्यूटी के लिए सरगुजा भेजे गए सहायक उपनिरीक्षक जीवन प्रकाश एक्का और आरक्षक क्रमांक 1223 ऋषिकांत त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दोनों पर पुलिस की वर्दी में शराब […]

अंबिकापुर में पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाले मामले में दुर्ग पुलिस के दो कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। मुलजिम पेशी ड्यूटी के लिए सरगुजा भेजे गए सहायक उपनिरीक्षक जीवन प्रकाश एक्का और आरक्षक क्रमांक 1223 ऋषिकांत त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दोनों पर पुलिस की वर्दी में शराब का सेवन करने और सरकारी INSAS राइफल को असुरक्षित छोड़कर जमीन पर सोने का आरोप है। दुर्ग के उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने 18 अक्टूबर 2026 को निलंबन आदेश जारी किया।

जारी आदेश के अनुसार, सहायक उपनिरीक्षक जीवन प्रकाश एक्का और आरक्षक ऋषिकांत त्रिपाठी रक्षित केंद्र दुर्ग में पदस्थ थे। दोनों को 17 अक्टूबर 2026 को मुलजिम पेशी ड्यूटी के लिए जिला सरगुजा भेजा गया था। इसके अगले दिन, 18 अक्टूबर को शाम 5:40 बजे अंबिकापुर के नए बस स्टैंड पर दोनों पुलिसकर्मी पुलिस की वर्दी में शराब का सेवन करते और INSAS राइफल को छोड़कर जमीन पर सोते हुए पाए गए।

इस मामले में सबसे गंभीर पहलू ड्यूटी के दौरान सरकारी हथियार की सुरक्षा से जुड़ा है। INSAS राइफल को असुरक्षित हालत में छोड़ने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए। मामला स्थानीय स्तर पर सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई। सरकारी हथियारों की सुरक्षा और मुलजिम पेशी ड्यूटी की संवेदनशीलता को देखते हुए इस कथित लापरवाही को गंभीर माना गया।

घटना के बाद दुर्ग के उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र दुर्ग में संबद्ध करने का आदेश दिया। निलंबन अवधि के दौरान दोनों कर्मचारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

आदेश में रक्षित निरीक्षक, दुर्ग को संबंधित कर्मचारियों को निलंबन आदेश की प्रति वितरित कर उसकी पावती भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही घटना की प्रारंभिक जांच पूरी करने और जांच प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से पांच दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और जिम्मेदारियों की स्थिति स्पष्ट होगी।

इस कार्रवाई के बाद अब प्रारंभिक जांच की रिपोर्ट पर नजर रहेगी। मामला पुलिसकर्मियों के अनुशासन, ड्यूटी के प्रति जवाबदेही और सरकारी हथियारों की सुरक्षा से जुड़ा है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से घटना की परिस्थितियों और संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी का आकलन किया जाएगा।

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संपादकीय टीम

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