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Women Reservation Bill: संसद में फिर आएगा महिला आरक्षण बिल? इसी महीने हो सकता है संसद का विशेष सत्र? DMK से समर्थन की बातचीत​

: केंद्र सरकार महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को फिर से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। एक  रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। सूत्रों का कहना है कि सरकार को सदन में जरूरी समर्थन मिलने की उम्मीद है और इसके लिए DMK समेत कुछ छोटे दलों से […]

: केंद्र सरकार महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को फिर से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। एक  रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। सूत्रों का कहना है कि सरकार को सदन में जरूरी समर्थन मिलने की उम्मीद है और इसके लिए DMK समेत कुछ छोटे दलों से बातचीत की जा रही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

अप्रैल में लोकसभा में गिर गया था संविधान संशोधन विधेयक

17 अप्रैल को बजट सत्र के दौरान लोकसभा में महिला आरक्षण तमिलनाडु की पार्टी DMK के संपर्क में है। DMK के लोकसभा में 22 सांसद हैं। परिसीमन के मुद्दे पर पार्टी पहले विरोध जताती रही है, लेकिन तमिलनाडु चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ उसके राजनीतिक संबंधों में बदलाव की खबरों के बीच सरकार उससे समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार कुछ छोटे दलों से भी बातचीत कर रही है। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP के समर्थन की संभावनाओं पर भी चर्चा है। इस पार्टी के आठ सांसद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी नेता सुप्रिया सुले पहले संकेत दे चुकी हैं कि अगर सीटों में 50 प्रतिशत की सुनिश्चित बढ़ोतरी का प्रावधान किया जाता है, तो इस मुद्दे पर बातचीत की जा सकती है। हालांकि, इन दलों की ओर से विधेयकों के समर्थन को लेकर अंतिम सहमति की पुष्टि नहीं हुई है।

संविधान संशोधन के लिए कितने सांसदों का समर्थन जरूरी?

संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इसका मतलब है कि सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दोतिहाई सदस्यों का समर्थन मिलना चाहिए।

लोकसभा की वर्तमान प्रभावी सदस्य संख्या 540 बताई गई है। सरकार के सामने चुनौती जरूरी दोतिहाई समर्थन जुटाने की है। सूत्रों का दावा है कि कुछ सांसदों और दलों के रुख में बदलाव से सरकार की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। हालांकि, विधेयक पारित होने के लिए जरूरी संख्या जुटाना अब भी अहम होगा।

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2627 अक्टूबर के कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय हो सकती हैं तारीखें

विशेष सत्र की तारीख तय करते समय 26 और 27 अक्टूबर को संसद भवन परिसर के संविधान सदन में होने वाले 12वें BRICS संसदीय मंच के कार्यक्रम को ध्यान में रखे जाने की बात कही गई है। सूत्रों के मुताबिक, सत्र बुलाने से करीब एक सप्ताह पहले सूचना दी जा सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मानसून सत्र के दौरान NEET पेपर लीक और छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के विरोध के बीच इन विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं हो सकी थी। मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था। फिलहाल, विशेष सत्र बुलाने और विधेयकों को दोबारा पेश करने को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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संपादकीय टीम

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