रिपोर्ट योगेश सेमवाल, देहरादून

: के अंकिता भंडारी हत्याकांड में 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने कहा कि मामले में शुरुआत से ही सख्त कार्रवाई की गई। सरकार के मुताबिक, आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा गया, जांच के लिए SIT बनाई गई और करीब 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई। सरकार ने दोषियों को सजा मिलने को मजबूत जांच और पैरवी का नतीजा बताया है।
24 घंटे में आरोपी जेल भेजे, SIT ने की जांच
उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, घटना सामने आने के बाद आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा गया। मामले में करीब 100 गवाहों के बयान और अहम सबूत चार्जशीट में शामिल किए गए। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई। सरकार ने बताया कि मुकदमे के दौरान आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज होती रहीं।
परिवार की मांग पर बदले सरकारी वकील
सरकार ने बताया कि अंकिता के परिवार की मांग पर तीन बार सरकारी वकील बदले गए। मातापिता की मांग पर CBI जांच के आदेश भी दिए गए। इसके अलावा परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। अंकिता के पिता और भाई को सरकारी नौकरी भी दी गई।
‘अपराधी कितना भी प्रभावशाली हो, कठोर सजा मिलेगी’
धामी सरकार का कहना है कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के कठघरे तक पहुंचाकर कठोर सजा दिलाई जाएगी। सरकार ने कहा कि गिरफ्तारी, जांच, चार्जशीट और केस में मजबूती के कारण दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली।
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VIP के मुद्दे पर भी सरकार ने रखी बात
कथित VIP के नाम को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार ने कहा कि किसी के पास ठोस सबूत हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों या अदालत के सामने रखना चाहिए। सरकार ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी कर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, अंकिता को न्याय दिलाने के लिए कार्रवाई से लेकर परिवार की मदद तक हर स्तर पर कदम उठाए गए।