आज वर्ल्ड अर्थराइटिस डे मनाया जा रहा है. भारत में अधिकतर लोग ज्यादा उम्र होने के बाद ये समझ पाते हैं कि गठिया से जुड़े क्या खतरे हैं. हड्डियों या जाइंट्स में दर्द होने पर पेनकिलर खा लेना अब नॉर्मल है. पर इस आदत से क्या नुकसान हो सकता है, चलिए आपको डॉक्टर के जरिए बताते हैं….

गठिया में जब जोड़ों का दर्द बार बार होता है, तो राहत पाने के लिए पेनकिलर लेना स्वाभाविक है. हालांकि, बार बार पेनकिलर लेकर सिर्फ दर्द दबाना सही तरीका नहीं है. दर्द कम होने का मतलब यह नहीं कि गठिया की बीमारी भी नियंत्रित हो गई है.
डॉक्टर अनुज अग्रवाल का कहना है कि कुछ तरह के गठिया में जोड़ों के अंदर सूजन बनी रह सकती है, जिससे समय के साथ कार्टिलेज और हड्डियों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए दर्द से राहत के साथ बीमारी के कारण का इलाज करना भी जरूरी है.
आइबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक और नेप्रोक्सेन जैसी पेनकिलर दर्द और सूजन कम करती हैं. लेकिन इन्हें बार बार या लंबे समय तक लेने से शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है. ये पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाकर अल्सर और अंदरूनी रक्तस्राव का कारण बन सकती हैं. पेट में लगातार दर्द, काला मल या खून की उल्टी इसके चेतावनी संकेत हैं.
ये दवाएं किडनी में खून का प्रवाह कम कर सकती हैं, जिससे किडनी को नुकसान पहुंच सकता है. शुरुआत में इसके लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है. कुछ पेनकिलर शरीर में नमक और पानी जमा कर सकती हैं, जिससे सूजन और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.
पहले से दिल की बीमारी वाले लोगों में हार्ट फेलियर बिगड़ सकता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है. वहीं, पैरासिटामोल की जरूरत से ज्यादा मात्रा लेने से लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए, अगर गठिया के दर्द के लिए बार बार पेनकिलर लेनी पड़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें.
रूमेटॉइड आर्थराइटिस में बीमारी को नियंत्रित करने वाली दवाएं जरूरी हो सकती हैं, जबकि ऑस्टियोआर्थराइटिस में सही व्यायाम, फिजियोथेरेपी और वजन नियंत्रित रखने से मदद मिल सकती है. इलाज का उद्देश्य सिर्फ दर्द दबाना नहीं, बल्कि जोड़ों को सुरक्षित रखना और उनकी कार्यक्षमता बनाए रखना भी है. बिना सलाह के डोज न बढ़ाएं और अलग अलग पेनकिलर एक साथ न लें.