हाल ही में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान पर पलटवार करते हुए कहा था कि योगी आदित्यनाथ को खुद टिकट मिलेगा या नहीं, कन्फर्म नहीं है. पहले खुद का टिकट कन्फर्म करा लें. वहां टिकट कोई और बांटता है? ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी में टिकट कौन बांटता है?

दरअसल, बीजेपी में विधानसभा चुनाव का टिकट पाने के लिए सिर्फ बड़े नेताओं की सिफारिश काफी नहीं होती. पार्टी उम्मीदवार की जीतने की संभावना, क्षेत्र में उसकी पकड़, जातीय समीकरण और संगठन में उसकी सक्रियता समेत कई पहलुओं को ध्यान में रखती है. इसके लिए सर्वे कराए जाते हैं और बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक फीडबैक लिया जाता है. इसके बाद उम्मीदवारों के नामों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच मंथन होता है.
सबसे पहले जीतने की संभावना का आकलन
भारतीय जनता पार्टी में विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया कई स्तरों पर चलती है. पार्टी का मुख्य जोर ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारने पर रहता है, जिसकी संबंधित सीट पर जीतने की संभावना अधिक हो. इसके लिए पार्टी अलगअलग स्तरों पर सर्वे कराती है. इन सर्वे में संभावित उम्मीदवार की लोकप्रियता, क्षेत्र में उसकी सक्रियता, जनता के बीच उसकी छवि और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन किया जाता है.
स्थानीय संगठन के फीडबैक को भी अहम माना जाता है. इसके अलावा पार्टी जातीय समीकरण, महिला प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और संगठन के प्रति उम्मीदवार की भूमिका जैसे पहलुओं पर भी विचार करती है. कई बार पार्टी दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को भी टिकट देती है. हालांकि, ऐसे नेताओं को पार्टी में शामिल होने और सदस्यता लेने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
टिकट वितरण की प्रक्रिया कहां से शुरू होती है?
विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया आम तौर पर राज्य स्तर से शुरू होती है. इसके लिए प्रदेश में कोर कमेटी और अन्य संगठनात्मक इकाइयां सक्रिय होती हैं. सबसे पहले क्षेत्रीय इकाइयों से संभावित उम्मीदवारों के नाम मांगे जाते हैं. क्षेत्रीय इकाई जिला इकाइयों के साथ चर्चा करती है. स्थानीय नेताओं, संगठन के पदाधिकारियों और चुनावी परिस्थितियों से मिले फीडबैक के आधार पर प्रत्येक विधानसभा सीट के लिए दावेदारों का पैनल तैयार किया जाता है.
आमतौर पर इस प्रक्रिया में हर सीट के लिए तीन नामों का पैनल तैयार करने की व्यवस्था बताई जाती है. इन नामों को आगे प्रदेश स्तर पर विचार के लिए भेजा जाता है. हालांकि, चुनाव और राज्य के हिसाब से पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है.
राज्य कोर कमेटी की क्या होती है भूमिका?
राज्य कोर कमेटी उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह कमेटी प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की रिपोर्ट और संभावित उम्मीदवारों के बारे में मिले फीडबैक पर विचार करती है. कोर कमेटी में आमतौर पर प्रदेश अध्यक्ष, राज्य के प्रभारी, चुनाव प्रभारी और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होते हैं. राज्य के संगठनात्मक ढांचे के अनुसार इसमें मुख्यमंत्री, विधायक दल के नेता और दूसरे प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हो सकते हैं.
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के टिकट वितरण को देखे तो प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, संगठन मंत्री धर्मपाल, सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों जैसे नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. केंद्रीय स्तर के प्रभारी और चुनाव से जुड़े वरिष्ठ नेता भी इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं. कोर कमेटी संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा करने के बाद उन्हें केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखती है.
सेंट्रल इलेक्शन कमेटी करती है उम्मीदवारों के नामों पर मंथन
इसके बाद दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उम्मीदवारों को लेकर चर्चा होती है. बीजेपी में उम्मीदवारों के चयन के लिए सेंट्रल इलेक्शन कमेटी यानी केंद्रीय चुनाव समिति की अहम भूमिका होती है. राज्य से आए पैनल, सर्वे रिपोर्ट और संगठन के फीडबैक के आधार पर इस स्तर पर उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जाता है. केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में अलगअलग विधानसभा सीटों की स्थिति पर चर्चा होती है.
जिन सीटों पर किसी उम्मीदवार को लेकर सहमति बन जाती है, वहां नाम तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है. जिन सीटों पर विवाद या असहमति होती है, उन पर दोबारा विचार किया जा सकता है. पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बीजेपी में उम्मीदवारों के चयन का अंतिम निर्णय पार्टी की निर्धारित केंद्रीय प्रक्रिया के तहत लिया जाता है.
सेंट्रल इलेक्शन कमेटी में कौनकौन होते हैं?
बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ केंद्रीय नेता शामिल होते हैं. इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्य नारायण जाटिया, भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, बीएल संतोष और वी श्रीनिवासन हैं.
दलबदलुओं को टिकट कैसे मिलता है?
बीजेपी कई चुनावों में दूसरे राजनीतिक दलों से आए नेताओं को भी टिकट देती रही है. इसकी वजह संबंधित नेता का राजनीतिक प्रभाव, क्षेत्र में उसकी पकड़ और चुनाव जीतने की संभावनाएं हो सकती हैं. हालांकि, किसी दूसरे दल से आने भर से टिकट मिलना तय नहीं होता. पार्टी ऐसे नेता की उपयोगिता, स्थानीय समीकरण और संगठन पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर सकती है. पार्टी में शामिल होने के लिए निर्धारित सदस्यता और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं.