नई दिल्ली। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक आज नई दिल्ली में शुरू हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में इस बार मुख्य जोर जीएसटी दरों में बड़े बदलाव के बजाय कर अनुपालन को आसान बनाने, रिफंड प्रक्रिया तेज करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था को सरल बनाने पर है।

बैठक में कारोबारियों और करदाताओं के लिए कई अहम प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। इनमें इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा बढ़ाना, आपूर्तिकर्ता की गलती का खामियाजा ईमानदार खरीदार को न भुगतना पड़े, जीएसटी पंजीकरण और रिटर्न प्रक्रिया को सरल बनाना तथा रिफंड जल्द जारी करना प्रमुख मुद्दे हैं।
इनपुट टैक्स क्रेडिट में मिल सकती है राहत
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा इनपुट टैक्स क्रेडिट बताया जा रहा है। कारोबारियों को कई तरह के खर्चों पर मिलने वाले कर क्रेडिट की पात्रता बढ़ाने पर विचार हो सकता है। कर्मचारी समूह स्वास्थ्य बीमा सहित कुछ व्यावसायिक खर्चों पर भी कर क्रेडिट देने के प्रस्ताव चर्चा में हैं। इससे कंपनियों की लागत और कार्यशील पूंजी पर दबाव कम हो सकता है।
रिफंड और पंजीकरण प्रक्रिया होगी आसान
जीएसटी रिफंड में होने वाली देरी को कम करने तथा पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने पर भी परिषद विचार कर रही है। छोटे कारोबारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए अनुपालन का बोझ घटाने के उपाय भी प्रस्तावित हैं।
जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति पर भी चर्चा
बैठक में जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों और अभियोजन की सीमा में बदलाव का प्रस्ताव भी अहम है। हालांकि इस मुद्दे पर राज्यों के बीच मतभेद सामने आए हैं। कुछ राज्यों ने कर चोरी रोकने के लिए मौजूदा प्रवर्तन शक्तियों को बनाए रखने की जरूरत बताई है। इसलिए इस प्रस्ताव पर सहमति बनना महत्वपूर्ण होगा।
दर में बड़े बदलाव की संभावना कम
इस बैठक में व्यापक स्तर पर जीएसटी दरों में बदलाव की संभावना फिलहाल कम बताई जा रही है। परिषद का फोकस मुख्य रूप से ‘जीएसटी 2.0’ के तहत प्रक्रिया और अनुपालन सुधारों पर है। हालांकि अंतिम निर्णय परिषद की चर्चा और सहमति के बाद ही स्पष्ट होंगे।
कुल मिलाकर 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक से कारोबारियों, छोटे उद्यमों और आम करदाताओं को प्रक्रिया सरल होने, रिफंड तेजी से मिलने और कर क्रेडिट के दायरे में विस्तार की उम्मीद है। फिलहाल चर्चा में शामिल प्रस्तावों को अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता; बदलाव लागू होने के लिए परिषद की मंजूरी के बाद जरूरी नियम, अधिसूचनाएं या कानूनी संशोधन भी आवश्यक होंगे।