मुंबई एयरपोर्ट पर आने वाले दिनों में बड़ा फेरबदल देखने को मिलने वाला है. शहर के सबसे पुराने टर्मिनल 1 को नए सिरे से तैयार करने की योजना बन चुकी है. इस बड़े काम को पूरा करने के लिए एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी ने एक नया प्लान बनाया है. इसके तहत मुंबई के टर्मिनल 2 से उड़ने वाली 265 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को 25 अक्टूबर से नए नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भेजने की तैयारी है. दरअसल T1 के बंद होने पर वहां की घरेलू उड़ानों को T2 में लाना है, जिसके लिए वहां जगह खाली करना बहुत जरूरी हो गया है. मुंबई और नवी मुंबई, दोनों ही एयरपोर्ट की कमान अडानी एयरपोर्ट्स के हाथों में है.

पुरानी बिल्डिंग को बदलना क्यों जरूरी?
मुंबई एयरपोर्ट का टर्मिनल 1 करीब 60 साल पुराना हो चुका है. यहां से देश के अंदर आनेजाने वाली फ्लाइट्स चलती हैं. पुरानी इमारत होने की वजह से सुरक्षा और आज के दौर की जरूरतों को देखते हुए इसे बदलना जरूरी हो गया है. जनवरी 2027 से इस टर्मिनल को कई चरणों में बंद करके बिल्कुल नया बनाया जाएगा.
जब T1 का काम शुरू होगा, तो हर साल सफर करने वाले करीब 50 लाख घरेलू मुसाफिरों को दूसरी जगह संभालना पड़ेगा. इसलिए मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने तय किया कि इन घरेलू उड़ानों को T2 में लाया जाए. अब T2 में पहले से ही काफी भीड़ रहती है. इसी दबाव को कम करने के लिए वहां से करीब एकतिहाई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को नवी मुंबई भेजने की बात कही गई है. एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि ये बदलाव सिर्फ कुछ समय के लिए है. इससे कुल उड़ानों पर महज 9 फीसदी का ही असर पड़ेगा. जब T1 का काम पूरा हो जाएगा, तो यहां पहले से 33 फीसदी ज्यादा यात्री आसानी से सफर कर सकेंगे.
नवी मुंबई जाने में एयरलाइंस की असली दिक्कत
एयरलाइंस T1 के नए बनने के खिलाफ नहीं हैं. उनका कहना है कि काम जरूर हो, लेकिन उड़ानों को अचानक शिफ्ट करना इतना आसान नहीं होता. किसी भी अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का मतलब सिर्फ टिकट बेचना नहीं है. इसके लिए पायलट, क्रू, खाना पहुंचाने वाली टीम, सामान की देखरेख और तकनीकी जांच जैसी दर्जनों चीजों का नया इंतजाम करना पड़ता है.
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि एयरलाइंस से ठीक से तालमेल बनाए बिना ये फैसला लिया जा रहा है. एयरलाइंस का तर्क है कि उनके सर्दियों के टिकट पहले ही बिक चुके हैं. ऐसे में अक्टूबर से सब कुछ बदलना बहुत मुश्किल होगा. इसके अलावा एक ही शहर में दो अलगअलग एयरपोर्ट से काम चलाने में कंपनियों का खर्च भी बढ़ जाएगा. एयर फ्रांसकेएलएम के स्टीफन गुमुसेली का कहना है कि दोनों जगह अलगअलग टीम रखने से काम संभालना पेचीदा हो जाएगा. साथ ही नवी मुंबई तक यात्रियों के पहुंचने के साधनों को लेकर भी एयरलाइंस के मन में सवाल हैं.
किन कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
इस फैसले से देशविदेश की करीब 46 एयरलाइंस प्रभावित हो रही हैं. इनमें सबसे बड़ा असर इंडिगो पर दिख रहा है. इंडिगो की 224 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में से 74 उड़ानें नवी मुंबई जा सकती हैं. इसके बाद एअर इंडिया की 100 में से 33 फ्लाइट्स पर असर पड़ेगा. आकासा एयर की 11 और एअर इंडिया एक्सप्रेस की 7 उड़ानों पर भी इसका असर होगा.
विदेशी कंपनियों की बात करें तो एमिरेट्स और एतिहाद जैसी बड़ी एयरलाइंस की 1010 उड़ानें इस दायरे में आ रही हैं. एयरलाइंस ने एयरपोर्ट से पूछा है कि उड़ानों में एकतिहाई कटौती का ये फैसला किस आधार पर लिया गया. दूसरी तरफ MIAL का कहना है कि वे इस पर साल 2020 से ही एयरलाइंस से बातचीत कर रहे हैं. कई कंपनियों ने समय पर अपनी योजना नहीं दी और बैठकों में भी हिस्सा नहीं लिया.
यात्रियों की जेब बचाने का क्या प्लान?
एक चिंता यात्रियों के टिकट को लेकर भी है. नवी मुंबई एयरपोर्ट पर यूजर फीस मुंबई एयरपोर्ट से ज्यादा है, यानी वहां से उड़ान भरना थोड़ा महंगा हो सकता है. इस फर्क की भरपाई के लिए अडानी एयरपोर्ट्स ने यात्रियों को कैश वाउचर देने की बात कही है, ताकि लोगों की जेब पर कोई अतिरिक्त भार न पड़े.
MIAL ने सभी एयरलाइंस को 6 अक्टूबर की शाम 4 बजे तक अपनी पसंद के स्लॉट चुनने का समय दिया था. कंपनी ने साफ किया था कि अगर एयरलाइंस खुद स्लॉट नहीं चुनती हैं, तो एयरपोर्ट अपनी क्षमता के हिसाब से तय करेगा. फिलहाल दोनों पक्ष मिलकर रास्ता निकालने में लगे हैं, ताकि मुसाफिरों को परेशानी भी न हो और मुंबई को जल्द एक बेहतर और आधुनिक एयरपोर्ट मिल सके.