लिस्टिंग के दिन थोड़ी बढ़त के बाद, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों ने अपनी सारी बढ़त गंवा दी है और वे IPO प्राइस से भी नीचे आ गए हैं, हालांकि एनालिस्ट अभी भी इस स्टॉक को लेकर पॉजिटिव हैं. NSE के शेयर 24 सितंबर को BSE पर 1,800 रुपए प्रति शेयर के भाव पर लिस्ट हुए, जो 1,785 रुपए के IPO प्राइस से 1 फीसदी से भी कम प्रीमियम था. सुस्त शुरुआत के एक घंटे के भीतर ही, शेयर IPO प्राइस से 5 फीसदी से ज्यादा उछलकर 1,878 रुपए के हाई लेवल पर पहुंच गए, जिससे मार्केट कैपिटलाइजेशन 4.64 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, लेकिन इसके बाद स्टॉक में गिरावट शुरू हो गई. खास बात तो ये है कि इस गिरावट के बाद एनएसई देश की टॉप 10 वैल्यूड कंपनियों की लिस्ट से भी बाहर हो गई है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर एनएसई के शेयरों को लेकर किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.

शेयरों में आई बड़ी गिरावट?
करीब दो हफ्ते पहले एनएसई के शेयर बाजार में लिस्ट हुए थे. उसके बाद से इसके शेयरों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. आंकड़ों को देखें तो सोमवार को NSE के शेयर गिरकर 1,712 रुपए प्रति शेयर पर आ गए, जो लिस्टिंग के बाद से उनका सबसे निचला स्तर है. यह स्टॉक अब लिस्टिंग के दिन के सबसे ऊंचे स्तर 1,878 रुपए से लगभग 9% और अपने IPO प्राइस 1,785 रुपए से 4 फीसदी नीचे है. वैसे बात मंगलवार की करें तो बीएसई पर एनएसई के शेयरों में 1.53 फीसदी की तेजी देखने को मिली है और 1749.85 रुपए पर बंद हुए हैं. वैसे सुबह एनएसई का शेयर 1,728 रुपए के साथ ओपन हुआ था, जोकि 1,760 रुपए के साथ दिन के हाई पर भी पहुंच गया था.
कितनी कम हुई वैल्यूएशन
अगर बात वैल्यूएशन की करें तो अपने पीक से एनएसई की वैल्यूएशन सोमवार को 41 हजार करोड़ रुपए कम हो चुकी है. आंकड़ों को देखें तो लिस्टिंग के दिन एनएसई की वैल्यूएशन 4.64 लाख करोड़ रुपए रुपए पर पहुंच गई थी. वहीं सोमवार को कंपनी का शेयर 1712 रुपए के साथ 52 हफ्तों के लोअर लेवल पर आ गया था. तब एनएसई की वैल्यूएशन 4.23 लाख करोड़ रुपए थी. इसका मतलब है कि तब से अब तक एनएसई की वैल्यूएशन में 41 हजार करोड़ रुपए की गिरावट देखने को मिल चुकी है. वैसे मंगलवार से मुकाबले करें तो तब भी एनएसई 31 हजार करोड़ रुपए के नुकसान में दिखाई दे रही है.
टॉप 10 से बाहर हुई एनएसई
इस गिरावट से NSE की सबसे ज्यादा मार्केट वैल्यू में से लगभग 41,000 करोड़ रुपए कम हो गए हैं, जिससे यह एक्सचेंज भारत की टॉप 10 सबसे ज्यादा वैल्यू वाली कंपनियों की लिस्ट से बाहर हो गया है. BSE के डेटा के अनुसार, लगभग 4.33 लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ, NSE अब रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, HDFC बैंक, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, L&T, LIC, HUL के बाद 11वें स्थान पर है.
एनालिस्ट NSE के शेयरों को लेकर क्यों पॉजिटिव हैं?
SBI सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के हेड सनी अग्रवाल ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि कैपिटल मार्केट में ग्रोथ और मार्केट का ओवरऑल सेंटीमेंट शॉर्ट से मीडियम टर्म में NSE के शेयरों के लिए तेजी लाने वाले फैक्टर हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि Cboe, Nasdaq, ICE और Euronext जैसी ग्लोबल कंपनियों की तुलना में NSE का वैल्यूएशन महंगा है, फिर भी भारतीय एक्सचेंज प्रीमियम बनाए रख सकते हैं क्योंकि घरेलू कैपिटलमार्केट वॉल्यूम में तेजी से ग्रोथ हो रही है.
एनालिस्ट ने कहा कि रेगुलेटरी दखल एक अहम बात है, खासकर इसलिए क्योंकि ज्यादा सट्टेबाज़ी और ओवरट्रेडिंग को रोकने पर जोर दिया जा रहा है. यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि NSE का लगभग 60 फीसदी रेवेन्यू अभी ऑप्शन ट्रेडिंग से आता है, जिससे डेरिवेटिव्स में रेगुलेटरी बदलाव एक संभावित बड़ी चुनौती बन सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि रेवेन्यू का मिक्स धीरेधीरे बदल रहा है और ट्रांजैक्शनबेस्ड बिजनेस का योगदान कम हो रहा है.