मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
IND vs NZ: न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 टी20 के लिए टीम इंडिया का हुआ ऐलान, भुवनेश्वर कुमार की 4 साल बाद वापसी, बाहर हुए ये खिलाड़ी​ | चीन से भारत आ रहे फार्मा ऑर्डर! छोटी दवा कंपनियों की खुली किस्मत, पर क्या रोड़ा बनेगी लागत?​ | ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ से ‘सिंधु गंगेश्वर’ तक… काशी के शिव मंदिर के नाम पर क्यों मचा बवाल?​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

National Housing Bank: हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए फंड दोगुना करने की तैयारी, जानें किसे होगा फायदा​

National Housing Bank: नेशनल हाउसिंग बैंक यानी एनएचबी इस चालू वित्त वर्ष में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग फंड और रीफाइनेंस की कुल रकम को दोगुना करने की तैयारी कर रहा है. सस्ते और लंबी अवधि के कर्ज की बढ़ती मांग को देखते हुए कई बड़ी वित्तीय कंपनियों ने सरकार और एनएचबी से […]

National Housing Bank: नेशनल हाउसिंग बैंक यानी एनएचबी इस चालू वित्त वर्ष में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग फंड और रीफाइनेंस की कुल रकम को दोगुना करने की तैयारी कर रहा है. सस्ते और लंबी अवधि के कर्ज की बढ़ती मांग को देखते हुए कई बड़ी वित्तीय कंपनियों ने सरकार और एनएचबी से अतिरिक्त फंड की गुहार लगाई थी. अधिकारियों के अनुसार, इस मांग पर चर्चा चल रही है और जल्द ही इस फैसले पर मुहर लग सकती है. ये कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब बाजार में होम लोन की मांग काफी मजबूत बनी हुई है, लेकिन कंपनियों के सामने फंड जुटाने की सीमाएं आड़े आ रही हैं.

अगर एनएचबी फंड का दायरा बढ़ाता है, तो इससे हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को अपनी उधारी के स्रोतों में विविधता लाने का सीधा मौका मिलेगा. अब तक ये कंपनियां अपनी पूंजी की जरूरतों के लिए ज्यादातर कमर्शियल बैंकों पर निर्भर रहती आई हैं. एनएचबी की इस पहल से न सिर्फ उनकी बैंकों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि उन्हें काफी कम लागत पर लंबी अवधि का कर्ज भी हासिल हो सकेगा.

बैंकों की उधारी सीमा बनी बड़ी रुकावट

हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंकों की आंतरिक लेंडिंग सीमा को लेकर खड़ी हो रही है. दरअसल, कमर्शियल बैंकों के पास एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को कर्ज देने की एक तय आंतरिक सीमा होती है जिसे वे पार नहीं कर सकते. जब कोई बैंक इस एक्सपोजर लिमिट तक पहुंच जाता है, तो होम लोन की जबर्दस्त मांग होने के बावजूद कंपनियों के लिए बैंकों से नया कर्ज उठाना बेहद मुश्किल हो जाता है.

इस समस्या को लेकर एक दिग्गज मॉर्टगेज लेंडर के वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि बैंकों के पास एचएफसी को कर्ज देने की तय सीमाएं हैं. इसी वजह से होम लोन की मजबूत मांग के बीच भी नया फंड जुटाना एक कठिन काम बन जाता है. कंपनियों ने इसी वजह से एनएचबी और वित्त मंत्रालय से संपर्क साधा था. कंपनियों का कहना है कि एनएचबी से मिलने वाला रीफाइनेंस न सिर्फ सस्ता होता है, बल्कि ये उन्हें बैंकों पर ज्यादा निर्भर हुए बिना अपने कारोबार को आगे बढ़ाने की खुली जगह भी देता है.

सस्ता फंड, ब्याज दरों का पूरा गणित

एनएचबी से मिलने वाले फंड की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद किफायती ब्याज दरें हैं. अधिकारियों के मुताबिक, एनएचबी के सामान्य रीफाइनेंस की ब्याज दर करीब 7.65 फीसदी के आसपास बैठती है. वहीं अफोर्डेबल हाउसिंग फंड के तहत मिलने वाले कर्ज की दर तो महज 4.25 फीसदी के करीब है. अगर इन दोनों दरों की तुलना कमर्शियल बैंकों से मिलने वाले कर्ज से की जाए, तो एनएचबी का फंड कंपनियों के लिए काफी सस्ता साबित होता है.

लागत में इस बड़े अंतर के चलते अनुमान है कि एनएचबी इस साल कुछ प्रमुख हाउसिंग कंपनियों की कुल उधारी का 30 से 35 फीसदी तक हिस्सा पूरा कर सकता है. बीते साल ये आंकड़ा करीब 20 से 25 फीसदी के दायरे में था. आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी स्वामित्व वाले इस डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन ने जून 2025 को समाप्त हुए एक साल के दौरान 32,308 करोड़ रुपये का रीफाइनेंस बांटा था. इससे पिछले साल ये वितरण 32,085 करोड़ रुपये रहा था. इस कुल आंकड़े में अफोर्डेबल हाउसिंग फंड का वितरण 5,791 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था.

किन कंपनियों को मिलेगा फायदा

एनएचबी के इस प्रस्तावित फैसले से देश की कई नामी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचने वाला है. अधिकारियों के अनुसार, इस सूची में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस, आधार हाउसिंग फाइनेंस और ट्रूहॉम फाइनेंस जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं. ये कंपनियां अपने लोन पोर्टफोलियो को बढ़ाने के लिए लगातार सस्ते फंड की तलाश में रहती हैं.

एनएचबी की वित्तीय साख बहुत मजबूत है और इसे ‘ट्रिपल ए’ क्रेडिट रेटिंग हासिल है. ये संस्था लेंडर्स द्वारा दिए गए योग्य हाउसिंग लोन के बदले रीफाइनेंस मुहैया कराती है, जिससे कंपनियों को लंबी अवधि के लिए सुरक्षित फंड मिल जाता है. इसके अलावा, एनएचबी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसियों के साथ मिलकर किफायती और ग्रीन हाउसिंग कार्यक्रमों पर भी काम कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि ग्रीन हाउसिंग और पिछड़े इलाकों में बनने वाले घरों के लिए मिलने वाला खास फंड तो सामान्य एनएचबी रीफाइनेंस से भी करीब 30 बेसिस पॉइंट्स सस्ता बैठता है. ये रियायत कंपनियों को दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करती है.

हाउसिंग कंपनियों के लिए बैंक ही फंड का सबसे बड़ा जरिया

भले ही कंपनियां विकल्प तलाश रही हों, लेकिन मौजूदा समय में बैंक ही हाउसिंग कंपनियों के लिए फंड का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं. हाल के समय में जहां म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी घटी है, वहीं बैंकों का हिस्सा लगातार बढ़ा है. भारतीय रिजर्व बैंक की जून 2026 की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक वित्तीय प्रणाली के प्रति हाउसिंग कंपनियों की कुल देनदारी 7.35 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि उनकी प्राप्तियां महज 0.19 लाख करोड़ रुपये थीं.

दूसरी तरफ, एनएचबी के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2026 के अंत तक हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के पास 7.44 लाख करोड़ रुपये के व्यक्तिगत होम लोन बकाया थे. ये आंकड़ा देश के कुल 40.07 लाख करोड़ रुपये के होम लोन बाजार का 18.6 फीसदी बैठता है. इस पूरे बाजार में एचएफसी के अलावा सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी शामिल हैं. एक साल पहले तक इस बाजार में हाउसिंग कंपनियों की हिस्सेदारी 18.3 फीसदी थी. ऐसे में एनएचबी की तरफ से मिलने वाला बड़ा फंड इन कंपनियों को बैंकों पर अत्यधिक निर्भर हुए बिना अपने लोन बुक को और तेजी से फैलाने में बड़ी मदद करेगा.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY