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8th Pay Commission: सिर्फ सैलरी नहीं, इन 9 बड़ी मांगों पर भी जोर, जानें कर्मचारियों की पूरी डिमांड​

8th Pay Commission Demands: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आयोग के सामने सिर्फ वेतन बढ़ाने की मांग नहीं रखी है, बल्कि पेंशन, मेडिकल सुविधा, बच्चों की पढ़ाई, प्रमोशन और जोखिम भत्ते से जुड़े कई अहम मुद्दे भी उठाए […]

8th Pay Commission Demands: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आयोग के सामने सिर्फ वेतन बढ़ाने की मांग नहीं रखी है, बल्कि पेंशन, मेडिकल सुविधा, बच्चों की पढ़ाई, प्रमोशन और जोखिम भत्ते से जुड़े कई अहम मुद्दे भी उठाए हैं।

इन मांगों का असर करीब 45 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी इनमें से किसी भी मांग पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आयोग विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से सुझाव ले रहा है। कर्मचारियों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने में नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी की भी अहम भूमिका है। यह सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा शर्तों जैसे मुद्दों पर बातचीत का मंच है।

1. पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग

कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की है। खासतौर पर 2004 के बाद  में आए कर्मचारियों के लिए यह मांग उठाई गई है, जो नई पेंशन व्यवस्था के तहत आते हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को एक निश्चित और सुरक्षित पेंशन मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा बनी रहे।

2. कैशलेस मेडिकल सुविधा

कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने कैशलेस इलाज की सुविधा को आसान और व्यापक बनाने की मांग की है। इसका उद्देश्य यह है कि इलाज के समय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी रकम अपनी जेब से खर्च न करनी पड़े। खासकर बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए बेहतर मेडिकल कवरेज की मांग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

3. बच्चों की पढ़ाई के लिए ज्यादा राहत

कर्मचारी संगठनों ने चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस और हॉस्टल सब्सिडी का दायरा बढ़ाने की मांग की है। इसे पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। अगर यह मांग मानी जाती है तो कर्मचारियों को बच्चों की उच्च शिक्षा के बढ़ते खर्च में राहत मिल सकती है।

4. ग्रेच्युटी और फैमिली पेंशन में बदलाव

कर्मचारी संगठनों ने डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी , और  के कम्युटेड हिस्से से जुड़े नियमों में सुधार की मांग की है। का एक हिस्सा कम्यूट कराने वाले पेंशनरों के लिए इस राशि को दोबारा बहाल करने की अवधि को बेहतर बनाने की मांग भी उठाई गई है।

5. न्यूनतम वेतन तय करने का फॉर्मूला बदले

के सामने न्यूनतम वेतन तय करने के मौजूदा तरीके में बदलाव का सुझाव भी रखा गया है। कर्मचारी संगठनों ने परिवार की जरूरतों और खर्च को ध्यान में रखते हुए वेतन तय करने वाले फैमिली कंजम्पशन यूनिट को 3 से बढ़ाकर 3.6 करने का सुझाव दिया है। इससे न्यूनतम शुरुआती वेतन में बदलाव की गुंजाइश बन सकती है।

6. प्रमोशन नहीं मिलने पर MACP में सुधार

लंबे समय तक प्रमोशन नहीं मिलने वाले कर्मचारियों के लिए MACP यानी Modified Assured Career Progression  महत्वपूर्ण है। कर्मचारी संगठनों ने MACP में मौजूद विसंगतियों को दूर करने और समय के साथ वित्तीय लाभ देने की व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की है। साथ ही मौजूदा पे लेवल को काम और जिम्मेदारियों के हिसाब से तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया गया है।

7. रेलवे कर्मचारियों के लिए जोखिम और कठिनाई भत्ता

संगठनों ने अपने काम की परिस्थितियों को देखते हुए रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस की मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि रेलवे में कई ऐसे पद हैं, जहां कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों और जोखिम के बीच काम करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें अलग से जोखिम भत्ता मिलना चाहिए।

8. डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों के लिए विशेष भत्ता

डिफेंस से जुड़े उन सिविलियन कर्मचारियों के लिए भी विशेष मांग की गई है, जो हथियार, गोलाबारूद, केमिकल या विस्फोटक जैसे जोखिम वाले सामान के निर्माण, रखरखाव या स्टोरेज से जुड़े काम करते हैं। इन कर्मचारियों के लिए विशेष जोखिम भत्ते के साथ इंश्योरेंस कवर देने की मांग की गई है।

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9. 8वें वेतन आयोग का दायरा बढ़ाने की मांग

कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के दायरे को बढ़ाने की भी मांग की है। उनका सुझाव है कि ग्रामीण डाक सेवक , अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों को भी इसके दायरे में शामिल किया जाए। संगठनों का तर्क है कि पिछले वेतन आयोग में इन वर्गों को अपेक्षित रूप से शामिल नहीं किया गया था, इसलिए इस बार इसका दायरा बढ़ाया जाना चाहिए।

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अभी मांगें हैं, फैसला नहीं

इन सभी मांगों को फिलहाल कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने रखा है। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार ने इन्हें मंजूर कर लिया है। आयोग अभी अलगअलग कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संगठनों से सुझाव ले रहा है। इसके बाद आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करेगा और अंतिम फैसला सरकार के स्तर पर होगा। अगर पुरानी पेंशन, मेडिकल सुविधा, शिक्षा भत्ता, जोखिम भत्ता और वेतन ढांचे में बदलाव जैसी बड़ी मांगें स्वीकार की जाती हैं, तो इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा फायदा मिल सकता है। हालांकि, दूसरी ओर सरकार पर वित्तीय बोझ भी बढ़ सकता है। 

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संपादकीय टीम

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