भारत अपनी अंडरवॉटर डिफेंस क्षमता बढ़ाने के लिए ₹80,000 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी के करीब ले आया है. इसके तहत जर्मनी की साझेदारी में भारत में 6 एडवांस्ड कन्वेंशनल सबमरीन बनाई जाएंगी. साथ ही 3 अतिरिक्त स्कॉर्पीन सबमरीन बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है.

Project75 को अंतिम मंजूरी का इंतजार
छह नई पनडुब्बियां लंबे समय से लंबित Project75 के तहत बनाई जाएंगी. इसमें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स और जर्मन कंपनी TKMS की साझेदारी प्रस्तावित है. पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों की भी इसमें भागीदारी होगी.
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार Project75 अंतिम चरण में है और सक्षम प्राधिकारी के अंतिम फैसले का इंतजार है. इसके अलावा अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का प्रस्ताव भी विचाराधीन है, हालांकि वह अभी उतने आगे के चरण में नहीं पहुंचा है.
3 और स्कॉर्पीन बनाने पर भी विचार
भारत मौजूदा कलवरी क्लास यानी स्कॉर्पीन लाइन को आगे बढ़ाने के लिए 3 और पनडुब्बियां बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है. इन्हें भी मुंबई स्थित MDL में बनाया जा सकता है. पहले Project75 के तहत 6 कलवरी क्लास पनडुब्बियां भारत में बनाई जा चुकी हैं. आखिरी पनडुब्बी INS वाग्शीर को जनवरी 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था.
मौजूदा सबमरीन में भी लगेगा स्वदेशी AIP
नई पनडुब्बियों के साथ मौजूदा बेड़े को भी अपग्रेड किया जा रहा है. DRDO की ओर से विकसित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम को स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बियों में लगाया जाएगा. AIP तकनीक पारंपरिक डीजलइलेक्ट्रिक सबमरीन को लंबे समय तक पानी के भीतर रहने में मदद करती है. इससे बारबार सतह पर आने की जरूरत कम होती है और अंडरवॉटर एंड्योरेंस बढ़ता है.
स्वदेशी कॉम्बैट सिस्टम भी होगा अपग्रेड
रक्षा सचिव के मुताबिक नौसेना के Naval Physical & Oceanographic Laboratory ने सबमरीन के लिए एक स्वदेशी इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सिस्टम भी विकसित किया है. इसे समय के साथ रिफिट के दौरान मौजूदा पनडुब्बियों में लगाया जाएगा.