शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
‘मायावती मेरी बुआ मां, पार्टी मेरा परिवार’, BSP से निकाले जाने के 22 दिन बाद आकाश आनंद की पहली प्रतिक्रिया​ | काम के लिए बाली गई थीं Nushrratt Bharuccha, हादसे ने बदला पूरा शेड्यूल; अब मुंबई में होगी सर्जरी​ | राज्यसभा चुनाव के लिए अखिलेश का ‘मिशन मिलन’, बागियों को वापस आने का न्योता!​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

सिर्फ 14% लोग ही UPI पर चार्ज देने को तैयार… सर्वे में खुलासा- पेमेंट का तरीका बदलेंगे उपभोक्ता​

UPI Payment Rules: डिजिटल इंडिया के इस दौर में हम सब्जी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक हर जगह मोबाइल निकालकर यूपीआई पेमेंट करते हैं. हमारी आदत ऐसी हो गई है कि पर्स में कैश रखना हम लगभग भूल ही गए हैं. लेकिन अब बड़े पेमेंट्स को लेकर बदलाव होने वाला है. 15 अक्टूबर 2026 […]

UPI Payment Rules: डिजिटल इंडिया के इस दौर में हम सब्जी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक हर जगह मोबाइल निकालकर यूपीआई पेमेंट करते हैं. हमारी आदत ऐसी हो गई है कि पर्स में कैश रखना हम लगभग भूल ही गए हैं. लेकिन अब बड़े पेमेंट्स को लेकर बदलाव होने वाला है. 15 अक्टूबर 2026 से 2000 रुपये से ज्यादा के P2M यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होने जा रहा है. इसे लेकर लोगों के बीच काफी उलझन है. हाल ही में हुए एक बड़े देशव्यापी सर्वे में सामने आया है कि अगर लोगों की जेब से एक्स्ट्रा पैसे कटे, तो वो यूपीआई से किनारा कर लेंगे.

नो एक्स्ट्रा चार्ज चाहते हैं ग्राहक

लोकलसर्किल्स ने देशभर के 291 जिलों में एक बड़ा सर्वे किया है. इसमें 67 हजार से ज्यादा यूपीआई यूजर्स ने अपनी राय दी है. आंकड़े बताते हैं कि 76 प्रतिशत ग्राहक 2000 रुपये से ऊपर के पेमेंट पर कोई भी एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना चाहते हैं. उनका साफ कहना है कि अगर चार्ज लगा तो वो पेमेंट का तरीका ही बदल देंगे. पूरे सर्वे में सिर्फ 14 प्रतिशत लोग ही ऐसे मिले जो चार्ज देकर भी यूपीआई इस्तेमाल करने को राजी हैं. बाकी लोग 2000 से बड़े पेमेंट के लिए दूसरे रास्ते तलाशने का मन बना चुके हैं.

वापस नकदी का रुख करेंगे लोग

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि लोगों ने अपने बैकअप प्लान तैयार कर लिए हैं. अगर यूपीआई महंगा पड़ता है, तो 27 प्रतिशत लोग वापस कैश यानी नकद में लेनदेन शुरू कर देंगे. वहीं 26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करेंगे. इसके अलावा 14 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड का विकल्प चुनेंगे. 4 प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं जो एनईएफटी या आईएमपीएस के जरिए पैसे ट्रांसफर करेंगे. करीब 9 प्रतिशत लोग बिना चार्ज वाले किसी अन्य विकल्प की मांग कर रहे हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि 2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर चार्ज लगा तो वो अपनी खरीदारी ही टाल देंगे.

व्यापारियों की भी अपनी टेंशन

ये पूरी टेंशन सिर्फ ग्राहकों की नहीं है. दुकानदारों के बीच भी एक अलग तरह की घबराहट बनी हुई है. 0.4 प्रतिशत एमडीआर के हिसाब से देखें तो 5,000 रुपये के पेमेंट पर दुकानदार को 20 रुपये देने होंगे. वहीं अगर पेमेंट 50,000 रुपये का है, तो ये चार्ज 200 रुपये हो जाएगा. लोकलसर्किल्स ने 32 हजार से ज्यादा कारोबारियों से भी बात की. इनमें से 41 प्रतिशत व्यापारियों ने साफ कह दिया कि वो अपनी जेब से कोई एमडीआर नहीं भरेंगे. सिर्फ 17 प्रतिशत दुकानदार ही ऐसे हैं जो इस खर्चे को उठाने के लिए तैयार दिखे. वहीं 9 प्रतिशत कारोबारियों ने बताया कि वो यूपीआई लेते ही नहीं हैं.

सरकार का सख्त निर्देश

अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि ये पैसा देगा कौन. वित्त मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है. सरकार का कहना है कि एमडीआर न तो सरकार का टैक्स है, न ही एनपीसीआई इसे वसूल रहा है. व्यापारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वो किसी भी हाल में ये पैसा ग्राहकों से न वसूलें. बैंकों को भी ये तय करने को कहा गया है कि ग्राहकों पर बोझ न पड़े. 15 अक्टूबर से इस पूरे सिस्टम पर कड़ी नजर रखी जाएगी.

हालांकि रिपोर्ट में एक बात सामने आई है कि अगर किसी दुकानदार ने गलत तरीके से ग्राहक से पैसे वसूल लिए, तो उस पर क्या एक्शन होगा, ये अभी तक साफ नहीं है. ग्राहक को उसका रिफंड कैसे मिलेगा, इसकी प्रक्रिया भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं की गई है. सर्वे का मतलब यही है कि अगर बाजार में ये चार्ज छिपकर ग्राहकों से वसूला गया, तो बड़े मूल्य के यूपीआई भुगतानों का एक बड़ा हिस्सा वापस कैश या कार्ड की तरफ शिफ्ट हो जाएगा.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY