
सोशल मीडिया पर एक बेहद प्रेरणादायक और भावुक करने वाली कहानी वायरल हो रही है. अमेरिका के टेक्सास के रहने वाले पॉल अलेक्जेंडर नाम के शख्स ने अपनी जिंदगी के 72 साल लोहे के एक डिब्बे (आयरन लंग) में बिताए. 6 साल की उम्र में पोलियो की चपेट में आने के बाद से लेकर अपनी मौत तक वह ज्यादातर इसी मशीन के अंदर रहे.
मौत के बाद ही उन्हें इस डिब्बे से बाहर निकाला गया. उनकी कहानी हौसले और जज्बे का अनुपम उदाहरण है. पॉल अलेक्जेंडर का जन्म 30 जनवरी 1946 को हुआ था. साल 1952 में जब वे मात्र 6 साल के थे, तब पोलियो महामारी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. बीमारी ने उनके गले से नीचे पूरे शरीर को लकवा मार दिया. सांस लेना भी मुश्किल हो गया. तब डॉक्टरों ने उन्हें आयरन लंग नाम की मशीन में डाल दिया था.
बिता दी मशीन में जिंदगी
यह मशीन उनके पूरे शरीर को ढक लेती थी, सिर्फ सिर बाहर रहता था. मशीन हवा का दबाव बदलकर उनके फेफड़ों को सांस लेने में मदद करती थी. पॉल 10 साल तक इस मशीन से बाहर नहीं निकले. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने ‘फ्रॉग ब्रिदिंग’ नाम की तकनीक सीखी, जिसमें वे गले की मदद से हवा को फेफड़ों में भरते थे. इससे वे थोड़े समय के लिए मशीन से बाहर रह पाते थे. इस हिम्मत के साथ उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने साउदर्न मेथोडिस्ट यूनिवर्सिटी से शिक्षा ली और बाद में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से बैचलर डिग्री और लॉ की डिग्री हासिल की. 1986 में उन्हें वकील के रूप में बार काउंसिल में शामिल किया गया. पॉल ने वकालत भी की और कई मुकदमों में लोगों की मदद की. उन्होंने एक किताब भी लिखी – “Three Minutes for a Dog”. किताब लिखने के लिए उन्होंने मुंह में ब्रश दबाकर पेंटिंग भी की.
बने प्रेरणा
सोशल मीडिया पर वे ‘पोलियो पॉल’ और ‘मैन इन द आयरन लंग’ के नाम से मशहूर हुए. उनकी स्टोरी सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंची. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें सबसे लंबे समय तक आयरन लंग में रहने वाले व्यक्ति के रूप में मान्यता दी, 11 मार्च 2024 को 78 साल की उम्र में पॉल का निधन हो गया. इससे पहले वे कोविड-19 से संक्रमित हुए थे. मौत के बाद ही उनके शरीर को आयरन लंग से बाहर निकाला गया. उनके भाई फिलिप ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी शेयर की. पॉल की मौत पर पूरी दुनिया ने शोक व्यक्त किया था. लोग उन्हें सलाम कर रहे हैं और उनकी जिंदगी को मिसाल बता रहे हैं. पॉल की कहानी बताती है कि शारीरिक विकलांगता कभी भी इंसान की स्पिरिट को नहीं रोक सकती. वे घर से बाहर निकलकर घूमते थे, दोस्त बनाते थे और पूरी जिंदगी सक्रिय रहे. उनके पास एक खास व्हीलचेयर भी थी जिसमें आयरन लंग के साथ वे बाहर जा सकते थे. आज के समय में पोलियो वैक्सीन की वजह से आयरन लंग की जरूरत लगभग खत्म हो चुकी है. पॉल उन कुछ आखिरी लोगों में से एक थे जो इस मशीन पर निर्भर थे.About the Author





