जब किसी व्यक्ति को जीवन में एक बार भी दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ता है, तो उसका पूरा लाइफस्टाइल बदल जाता है। लेकिन कल्पना कीजिए उस जीवंतता की, जिसने पिछले 5 वर्षों में 4 बार हार्ट अटैक का सामना किया और शरीर में 8 स्टेंट होने के बावजूद हार नहीं मानी। यह कहानी केवल एक व्यक्ति के कड़े संघर्ष की नहीं है, बल्कि Medical Science और सही अनुशासन की जीत है। अक्सर लोग स्टेंट डलने के बाद कसरत या शारीरिक गतिविधि करने से डरते हैं, लेकिन सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, सही मेडिकल गाइडेंस में की गई कसरत दिल को दोबारा मजबूत बना सकती है। आइए डॉक्टरों और कार्डियक एक्सपर्ट्स से सीधे जानते हैं कि एकाधिक हार्ट अटैक के बाद ‘कार्डियक रिहैबिलिटेशन’ (Cardiac Rehabilitation) कैसे काम करता है और ऐसे मामलों में सुरक्षित फिटनेस रूटीन क्या होना चाहिए।

केस स्टडी: 5 साल में लगे 8 स्टेंट
स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरु में लीड कार्डियोलॉजिस्ट और मेडिकल डायरेक्टर, डॉ. शेट्टी ने बताया कि जब एक कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव को 50 साल की उम्र में पहला हार्ट अटैक आया, तो उन्हें लगा कि उनका सबसे बुरा दौर अब पीछे छूट गया है। हार्ट अटैक अपेक्षाकृत हल्का था और इसकी वजह एक कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज थी। डॉक्टरों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संकरी हो चुकी धमनी को खोल दिया और रक्त प्रवाह बहाल करने के लिए उसमें स्टेंट लगा दिया।
कई मरीजों की तरह उन्होंने भी यह मान लिया कि एक बार ब्लॉकेज ठीक हो गया तो जीवन फिर सामान्य हो जाएगा। लेकिन मरीज को अगले 5 सालों में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान उनकी अन्य धमनियों में तीन नए ब्लॉकेज हो गए और उनके शरीर में कुल 8 स्टेंट लगाने पड़े। डॉ. शेट्टी ने बताया कि उनके दिल की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए मरीज को ‘कार्डियक रिहैबिलिटेशन’ (चिकित्सकीय देखरेख में कसरत) और सख्त लाइफस्टाइल गाइडेंस पर रखा गया, जिसके कारण वह आज 4 हार्ट अटैक के बाद भी पूरी तरह तंदरुस्त हैं।
मरीज के लाइफस्टाइल और मेडिकल ट्रीटमेंट में बदलाव
डॉक्टर ने बताया कि बार-बार आते हार्ट अटैक को रोकने के लिए मरीज के रूटीन में बेहद कड़े बदलाव किए गए
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- धूम्रपान और डाइट में बदलाव: धूम्रपान को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर कार्डिएक डाइट शुरू की गई।
- कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल: दवाओं और आधुनिक ‘इंजेक्शन थेरेपी’ की मदद से मरीज के LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) को 40 mg/dL से भी नीचे लाया गया।
- दवाओं का कड़ाई से पालन: मरीज को लगातार एंटी-इन्फ्लेमेटरी और दोहरी एंटी-प्लेटलेट (ब्लड थिनर) दवाओं पर रखा गया, जिसे मरीज ने बिना चूके समय पर लिया।
क्या स्टेंट फेल होना या नए ब्लॉकेज हैं बार-बार हार्ट अटैक का कारण?
बार-बार हार्ट अटैक आने को लेकर एक आम गलतफहमी यह है कि इसका कारण हमेशा पुराने स्टेंट का फेल होना होता है। डॉ. शेट्टी ने स्पष्ट किया कि वास्तव में अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता।
स्टेंट थ्रोम्बोसिस (Stent Thrombosis):
दुर्लभ मामलों में स्टेंट के अंदर रक्त का थक्का बन सकता है, जिसका खतरा एंजियोप्लास्टी के बाद पहले महीने में केवल 1 प्रतिशत होता है। यदि मरीज ब्लड थिनर दवाएं बीच में रोक दे, तभी यह खतरा बढ़ता है।
नए ब्लॉकेज जिम्मेदार:
हार्ट अटैक दोबारा आने के अधिकांश मामलों का संबंध दिल की दूसरी धमनियों में विकसित होने वाले नए ब्लॉकेजेस से होता है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज किसी एक जगह तक सीमित नहीं रहती। धमनियों में छोटे-छोटे प्लाक समय के साथ अस्थिर होकर फट सकते हैं, जिससे नया अटैक आता है। यह स्टेंट का फेल होना नहीं बल्कि बीमारी का शरीर में सक्रिय बने रहना है।
किन लोगों को रहता है बार-बार हार्ट अटैक आने का जोखिम?
डॉक्टर के अनुसार, निम्नलिखित श्रेणियों में दोबारा अटैक का जोखिम बहुत अधिक होता है:
- जिनका खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और हाई ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता है।
- डायबिटीज, मोटापे से ग्रसित लोग और धूम्रपान करने वाले।
- जेनेटिक कारण, कई बार सभी दवाओं और लाइफस्टाइल का पालन करने के बाद भी पारिवारिक इतिहास (Genetics) के कारण जोखिम बना रहता है।
हार्ट अटैक के जोखिम से कैसे बचाव करें?
एक्सपर्ट के मुताबिक, कोलेस्ट्रॉल को सख्त नियंत्रण में रखकर, डॉक्टर द्वारा दी गई ब्लड थिनर दवाओं का नियमित सेवन करके और लाइफस्टाइल में बदलाव करके हार्ट अटैक के जोखिम को 90 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। बाकी 10 प्रतिशत जोखिम ऐसे कारकों (जैसे जेनेटिक म्यूटेशन, धमनियों की पुरानी सूजन, या किडनी रोग) से जुड़ा होता है, जिन्हें मेडिकल साइंस पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकता। ऐसे गंभीर मरीजों के लिए इलाज का उद्देश्य बीमारी को जड़ से खत्म करना नहीं, बल्कि लगातार रिस्क को कम करना होता है।
डिस्क्लेमर : यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और पाठक की प्रेरणा के लिए है। हार्ट अटैक या स्टेंटिंग के बाद किसी भी प्रकार का फिटनेस रूटीन या एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने कार्डियोलॉजिस्ट से अनुमति अवश्य लें। खुद से दवाओं में बदलाव करना जानलेवा हो सकता है।












