उत्तर प्रदेश देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने वाले सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल हो गया है. राज्य सरकार के मुताबिक, भारत में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में अब उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है. सरकार का टारगेट है कि अगले दो साल में इसे 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए.

सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2022 लागू होने के बाद राज्य में की मांग लगातार बढ़ रही है. लोगों को मिलने वाली सब्सिडी, चार्जिंग स्टेशनों का तेजी से विस्तार और आसान ऑनलाइन प्रक्रिया ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है.
सब्सिडी लेने वालों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी
में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है. पिछले वित्त वर्ष 202526 में सब्सिडी के लिए मंजूर किए गए आवेदनों की संख्या में बड़ा इजाफा देखने को मिला.जहां वित्त वर्ष 202425 में करीब 13,950 आवेदन मंजूर हुए थे, वहीं 202526 में यह संख्या बढ़कर 47,514 तक पहुंच गई. यानी एक साल में सब्सिडी मंजूरी में करीब 241 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इतना ही नहीं, नए वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद भी EV की मांग कम नहीं हुई है. 1 अप्रैल से 22 जून के बीच ही 9,934 नए आवेदन मंजूर किए जा चुके हैं.
अब तक हजारों लोगों को मिला लाभ
सरकार के अनुसार, अब तक राज्य में 86 हजार से ज्यादा सब्सिडी आवेदन मंजूर किए जा चुके हैं. इनमें से 43 हजार से अधिक लोगों के बैंक खाते में सब्सिडी की राशि भी भेजी जा चुकी है. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते.
सबसे ज्यादा बिक रहे हैं इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन
उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक टूव्हीलर सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं. मंजूर किए गए आवेदनों में 61 हजार से ज्यादा आवेदन इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर के हैं.
इसके अलावा लगभग 25 हजार इलेक्ट्रिक कारों, 100 से अधिक इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों और कुछ इलेक्ट्रिक बसों के लिए भी सब्सिडी मंजूर की गई है. इससे साफ है कि लोग अब धीरेधीरे हर तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहे हैं.
चार्जिंग स्टेशनों का तेजी से हो रहा विस्तार
इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ने के साथ चार्जिंग की सुविधा भी जरूरी होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या तेजी से बढ़ाई गई है.फिलहाल राज्य में 15 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं और 2,300 से अधिक चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं. इनमें फास्ट चार्जर और सामान्य चार्जर दोनों शामिल हैं.
सरकार का अनुमान है कि आने वाले समय में EV की संख्या और बढ़ेगी. इसलिए भविष्य की जरूरत को देखते हुए करीब 38 हजार चार्जिंग स्टेशन तैयार करने की योजना बनाई जा रही है.
एक्सप्रेसवे और शहरों में लगेंगे नए चार्जर
नई चार्जिंग सुविधा विकसित करने के लिए सरकार सार्वजनिक और निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है. एक्सप्रेसवे, बड़े शहरों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और पर्यटन स्थलों पर नए चार्जिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं.यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्लीमेरठ एक्सप्रेसवे और लखनऊआगरा एक्सप्रेसवे पर पहले ही हाईस्पीड चार्जर लगाए जा चुके हैं.
ऑनलाइन आवेदन से हुई प्रोसेस आसान
EV सब्सिडी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है. आवेदन करने से लेकर दस्तावेज जांच और भुगतान तक का काम डिजिटल तरीके से होता है. जांच पूरी होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दी जाती है.