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1977 का इतिहास दोहराएंगे आकाश अंबानी! Jio IPO के जरिए दादा धीरूभाई का ‘इक्विटी मैजिक’ रीक्रिएट करने की तैयारी​

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के खुलने से पहले आकाश अंबानी ने शनिवार को गुजरात और पश्चिमी भारत के अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से विशेष रूप से बुलाए गए ब्रोकरों के एक चुनिंदा समूह को संबोधित किया. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि उनका यह प्रयास लगभग 50 साल पहले धीरूभाई अंबानी द्वारा […]

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के खुलने से पहले आकाश अंबानी ने शनिवार को गुजरात और पश्चिमी भारत के अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से विशेष रूप से बुलाए गए ब्रोकरों के एक चुनिंदा समूह को संबोधित किया. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि उनका यह प्रयास लगभग 50 साल पहले धीरूभाई अंबानी द्वारा रचे गए उस इतिहास को दोहराने जैसा था, जब उन्होंने मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का आईपीओ लाकर लाखों आम भारतीयों को शेयरधारक बना दिया था. यह संवाद भारत के अब तक के सबसे बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम को सफल बनाने के लिए आकाश के नेतृत्व में चलाए जा रहे एक वैश्विक अभियान का हिस्सा था. इसके तहत हांगकांग, सिंगापुर, अबू धाबी, लंदन और न्यूयॉर्क सहित वैश्विक वित्तीय केंद्रों में 60 से अधिक निवेशक बैठकें आयोजित की जा रही हैं.

इश्यू को सफल बनाने की चुनौती

कंपनी के सामने शेयर बाजार की मौजूदा सुस्ती, परिवार की कथित महत्वाकांक्षाओं से कम मूल्यांकन और उपग्रह संचार को लेकर एलन मस्क के साथ चल रहे सार्वजनिक विवाद के बीच देश के सबसे बड़े इश्यू को सफल बनाने की चुनौती है. उस बैठक में जियो प्लेटफॉर्म्स के एमडी आकाश के साथ उनकी जुड़वां बहन ईशा अंबानी और बैंकिंग दिग्गज उदय कोटक भी शामिल थे. कोटक एक वरिष्ठ वित्तीय सलाहकार के रूप में आईपीओ प्रचारप्रसार और संवाददाता सम्मेलनों का नेतृत्व कर रहे हैं. वह बुकरनिंग लीड मैनेजरों का प्रतिनिधित्व करने के साथसाथ रिलायंस ग्रुप की बाजार विरासत की एक ऐतिहासिक कड़ी के तौर पर भी जुड़े हैं.

गुजराती भाषा में बैठक

बैठक में मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि कोटक ने गुजराती भाषा में बैठक की शुरुआत की और प्रतिभागियों को ”मेरे साथी ब्रोकर” कहकर संबोधित किया. सूत्र ने कहा कि अगले 45 मिनट तक उन्होंने शुद्ध गुजराती में बात की और केवल ठोस वित्तीय आंकड़े पेश करने के लिए ही अंग्रेजी का सहारा लिया. हाल के वर्षों में अपने नेतृत्व वाले खुदरा कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर रहीं ईशा ने जियो के मंच पर एक दुर्लभ उपस्थिति दर्ज कराई.

मुंबई की इस बैठक में उन्होंने भी गुजराती में बात की और जियो की सफलता का श्रेय आकाश को दिया. एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि सबसे छोटे भाई अनंत, जो पिछले सप्ताह संवाददाता सम्मेलन और एक अलग निवेशक बैठक में मौजूद थे, शनिवार के इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. उन्होंने कहा कि इस प्रेजेंटेशन में रिलायंस को एक गुजराती कंपनी और ऐसे पारिवारिक व्यवसाय के रूप में पेश किया गया, जिसकी राज्य में मौजूद जड़ें उसकी पहचान का हिस्सा हैं. इसके बाद जियो आईपीओ के पक्ष में तर्क रखे गए.

रिलायंस का था 1970 और 1980 का दशक

धीरूभाई अंबानी का जन्म गुजरात में हुआ था और जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी विवरण पुस्तिका भी गुजरात के अहमदाबाद में कंपनी रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया है. यह संदेश विशेष रूप से क्षेत्रीय ब्रोकिंग समुदाय को ध्यान में रखकर दिया गया था, जिनके खुदरा ग्राहक 1970 और 1980 के दशक में रिलायंस के साथ मजबूती से खड़े रहे थे. प्रेजेंटेशन के अंत में ब्रोकरों ने सेल्फी लेने के लिए आकाश को घेर लिया और समय की उपलब्धता के अनुसार उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अधिक से अधिक लोगों से मिलने का प्रयास किया.

सूत्रों ने कहा कि इसका उद्देश्य गुजरात की गहरी कारोबारी संस्कृति और शेयरों में निवेश की लंबी परंपरा का लाभ उठाना था. यह रणनीति धीरूभाई अंबानी की उस सफलता की याद दिलाती है, जब 1977 में रिलायंस के सार्वजनिक होने पर उन्होंने आम भारतीय परिवारों को शेयरधारक बनाया था और शेयरों की बिक्री को निवेशकों के साथ एक स्थायी रिश्ते में बदल दिया था.

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संपादकीय टीम

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