भारत में पेट्रोल की जगह एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक अहम सवाल पूछा है. कोर्ट ने कहा कि अगर 100% एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को मंजूरी दी जा रही है, तो उनके लिए इतना ईंधन कहां से आएगा और इसकी सप्लाई कैसे होगी? सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि इसके लिए बड़े स्तर पर प्रोडक्शन की व्यवस्था में बदलाव करने होंगे.

गुरुवार, 29 अक्टूबर को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच एथेनॉल के बंटवारे से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी. इसी दौरान कोर्ट ने हाल में आई खबरों का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाया.
100% एथेनॉल वाली गाड़ियों को मिली है मंजूरी
दरअसल, ने 26 अक्टूबर को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में बदलाव की जानकारी दी थी. इसके तहत अब ऐसी फ्लेक्सफ्यूल गाड़ियों को मंजूरी दी गई है, जो E100 यानी लगभग पूरी तरह एथेनॉल वाले ईंधन से चल सकती हैं.
फ्लेक्सफ्यूल गाड़ियों को पेट्रोल और एथेनॉल के अलगअलग मिश्रण से चलाने के लिए बनाया जाता है. ये सामान्य पेट्रोल गाड़ियों से अलग होती हैं, क्योंकि इनमें ज्यादा मात्रा में एथेनॉल वाला ईंधन इस्तेमाल किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, E85 में 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है, जबकि E100 में लगभग पूरा ईंधन एथेनॉल होता है.
हालांकि, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की मात्रा को लेकर सरकार ने फिलहाल कोई नया टारगेट नहीं बताया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि केंद्र सरकार की अभी पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट 20% से आगे बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है.
किसानों के फायदे पर भी कोर्ट ने दिया जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले को सिर्फ ईंधन की सप्लाई तक सीमित रखकर नहीं देखना चाहिए. इसमें आम लोगों के फायदे, पर्यावरण और किसानों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है.
जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि किसानों को मजबूत बनाने का पहलू बेहद अहम है, लेकिन इस पर उतनी चर्चा नहीं हो रही है. कोर्ट का कहना था कि देश के गांवों में रहने वाले आम लोगों और किसानों को भी ऐसी नीतियों का फायदा मिलना चाहिए.
अटॉर्नी जनरल ने भरोसा दिया कि वह मामले में अपनी दलील रखते समय किसानों से जुड़े मुद्दे पर भी बात करेंगे. सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि एथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को भी किसी न किसी रूप में फायदा हो सकता है. एक अन्य वकील ने बताया कि केंद्र सरकार की नीति बनाते समय किसानों के हितों का भी ध्यान रखा गया है.
एथेनॉल की सप्लाई को लेकर क्या है विवाद?
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला एथेनॉल सप्लाई वर्ष 202526 के लिए ईंधन के बंटवारे से जुड़ा है. 30 जून को कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगाते हुए पहले जैसी स्थिति बनाए रखने को कहा था, जिसमें एथेनॉल का आवंटन बढ़ाने के मामले पर फैसला लेने का निर्देश दिया गया था.
यह मामला एक तेल कंपनी की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कंपनी का कहना था कि हाई कोर्ट के आदेश से पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने की राष्ट्रीय नीति पर असर पड़ सकता है. कर्नाटक हाई कोर्ट ने भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल को एक एथेनॉल निर्माता की मांग पर विचार करने को कहा था. इस निर्माता ने वित्त वर्ष 202526 के लिए एथेनॉल का ज्यादा आवंटन मांगा था.
हाई कोर्ट के मुताबिक, सरकार की नीति के तहत बने वे एथेनॉल प्लांट, जो समझौते के अनुसार सिर्फ तेल कंपनियों को एथेनॉल सप्लाई करते हैं, लंबे समय के खरीद समझौतों में तय प्राथमिकता के फायदे से वंचित नहीं किए जाने चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर में तय की है. अब देखना होगा कि एथेनॉल की सप्लाई, किसानों के हित और पेट्रोल में इसकी मिलावट से जुड़े सवालों पर आगे क्या फैसला होता है.