शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
120 की स्पीड पर भी नहीं कटेगा ट्रैफिक चालान? हाईवे पर ड्राइविंग को लेकर नितिन गडकरी का बयान​ | Mirzapur The Movie Extended Cut | मिर्जापुर की दुनिया वापस आ गई है! OTT पर ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का ‘एक्सटेंडेड कट’ हुआ रिलीज​ | November 2026 Festival Calendar: धनतेरस, Diwali और छठ पर्व समेत प्रमुख त्योहारों की सूची​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

10 साल से था माइग्रेन…गंगाराम अस्पताल में हुई एंडोस्कोपिक सर्जरी, दर्द से मिली राहत​

सर गंगाराम अस्पताल में करीब 10 साल से माइग्रेन के तेज और बारबार होने वाले दर्द से परेशान एक मरीज की आधुनिक एंडोस्कोपिक सर्जरी की गई. अस्पताल के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर ने यह सर्जरी की. मरीज को दवाओं और दूसरे सामान्य इलाज से लंबे समय तक राहत नहीं मिल रही थी. […]

सर गंगाराम अस्पताल में करीब 10 साल से माइग्रेन के तेज और बारबार होने वाले दर्द से परेशान एक मरीज की आधुनिक एंडोस्कोपिक सर्जरी की गई. अस्पताल के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर ने यह सर्जरी की. मरीज को दवाओं और दूसरे सामान्य इलाज से लंबे समय तक राहत नहीं मिल रही थी. सर्जरी से पहले मरीज को हर महीने 20 से 25 बार माइग्रेन का दौरा पड़ता था. इसके कारण उसकी रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज पर काफी असर पड़ रहा था. कई साल तक अलगअलग डॉक्टरों से इलाज कराने और कई दवाएं लेने के बावजूद उसे पर्याप्त राहत नहीं मिली.

मरीज की जांच करने के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी का फैसला लिया. जांच में सिर में कान के पास और पीछे के हिस्से में कुछ ऐसे बिंदुओं की पहचान हुई, जहां नसों पर दबाव पड़ने से दर्द की समस्या बढ़ सकती थी. इसके बाद इन जगहों पर नसों को दबाव से मुक्त करने के लिए एंडोस्कोपिक सर्जरी की गई.

कितनी मिलीं मरीज को राहत

सर्जरी के बाद मरीज ने बताया कि सिरदर्द की तीव्रता और अवधि में करीब 50 फीसदी कमी आई है. सिर के पिछले हिस्से में लगातार रहने वाला दर्द भी अब नहीं है. हालांकि, उस हिस्से में अभी भारीपन महसूस होता है. शुरुआती नतीजों में मरीज को राहत मिलने के साथ दवाओं की जरूरत में भी कमी आने की बात कही गई है.

किसको होती है सर्जरी की जरूरत

सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर ने कहा, माइग्रेन की सर्जरी एक विशेष प्रक्रिया है. यह उन मरीजों के लिए की जा सकती है, जिन्हें माइग्रेन के गंभीर दौरों से परेशानी होती है, दवाओं से राहत नहीं मिलती और दर्द के खास बिंदुओं की पहचान हो जाती है। इसका उद्देश्य मरीज के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है.

यह मामला दिखाता है कि लंबे समय से माइग्रेन से परेशान कुछ चुनिंदा मरीजों में सर्जरी के विकल्प पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, इसका असर हर मरीज में अलगअलग हो सकता है और इसे माइग्रेन का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए.

क्या होता है माइग्रेन?

माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल सिचुएशन है, जिसमें बारबार सिर के एक साइड या दोनों तरफ तेज दर्द होता है जो कई बार बहुत चुभन जैसा लगता है. इसके साथ मतली, उल्टी और रोशनी या तेज आवाज से परेशानी भी हो सकती है. जिन लोगों को बारबार माइग्रेन होता है, उनके कामकाज, सामाजिक जीवन और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है.

इस मरीज को करीब 10 साल से माइग्रेन की समस्या थी. कई तरह के इलाज के बावजूद जब उसे लंबे समय तक राहत नहीं मिली, तो डॉक्टरों ने दूसरे विकल्पों पर विचार किया.

क्या है एंडोस्कोपिक माइग्रेन सर्जरी?

यह एक विशेष तरह की सर्जरी है, जो माइग्रेन के कुछ चुनिंदा मरीजों में की जा सकती है. कुछ मामलों में मांसपेशियों या आसपास के ऊतकों के कारण नसों पर दबाव पड़ता है या उनमें जलन होती है. इससे माथे, कनपटी या सिर के पिछले हिस्से में दर्द की समस्या हो सकती है.

इस सर्जरी में एंडोस्कोप नाम के एक पतले उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें कैमरा लगा होता है, जिससे डॉक्टर शरीर के अंदर की संरचनाओं को देख सकते हैं. छोटे चीरे लगाकर विशेष उपकरणों की मदद से नसों पर दबाव डालने वाले ऊतकों को हटाया या अलग किया जाता है, ताकि नसों पर दबाव कम हो सके.

खुली सर्जरी की तुलना में इस तकनीक में छोटे चीरे लगाए जा सकते हैं. हालांकि, यह इलाज हर माइग्रेन मरीज के लिए नहीं है. सर्जरी का फैसला मरीज की स्थिति और जांच के नतीजों के आधार पर ही लिया जाता है.

चुनिंदा मरीजों में की जाती है यह सर्जरी

माइग्रेन की सर्जरी पहला इलाज नहीं है. इसे केवल उन चुनिंदा मरीजों में विकल्प के तौर पर देखा जाता है, जिन्हें दूसरे इलाज से पर्याप्त राहत नहीं मिली हो और जिनमें नसों पर दबाव पड़ने वाली खास जगहों की पहचान हो सके.

इसके लिए डॉक्टर मरीज के सिरदर्द का इतिहास, पहले लिए गए इलाज, शारीरिक जांच और दर्द होने की जगहों का आकलन करते हैं. कुछ मामलों में नस के पास दवा देकर यह भी जांचा जा सकता है कि उस नस का दर्द से संबंध है या नहीं. सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि दर्द में मिली राहत कितने समय तक बनी रहती है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY