दुनिया के कई देशों के नाम किसी न किसी खासियत के नाम पर रखे गए हैं. किसी देश के नाम ऐतिहासिक शख्सियत के नाम पर है तो किसी का प्राचीन सभ्यता या भौगोलिक विशेषता के आधार पर है. एक देश ऐसा भी है जिसका नाम वहां के एक पेड़ के नाम पर है. उस देश का नाम है ब्राजील. दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े देश ब्राजील के नाम की कहानी और वो पेड़ भी दिलचस्प है. जानिए, इसकी पूरी कहानी.

15वीं सदी के अंत और 16वीं सदी की शुरुआत यूरोपीय खोजी अभियानों का दौर था. साल 1500 में पुर्तगाली नाविक पेड्रो अल्वारेस काब्राल के नेतृत्व में एक बेड़ा भारत जाते समय रास्ता भटककर दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट पर जा पहुंचा. यह वही जगह थी, जो आगे चलकर ब्राजील कहलाई. पुर्तगालियों ने इस भूभाग पर कदम रखते ही इसे अपने राज्य के अधीन घोषित कर दिया और शुरुआत में इसका आधिकारिक नाम रखा “टेरा दे सांता क्रुज़” यानी “पवित्र क्रॉस की भूमि”.
ब्राजीलवुड पेड़ ने बदली कहानी
जो नाम आधिकारिक तौर पर तय किया गया था, वह ज्यादा दिन नहीं टिका. इसकी वजह बना एक खास पेड़, ब्राजीलवुड. यह पेड़ इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पाया जाता था और यूरोप में इसकी भारी मांग थी, क्योंकि इसकी लकड़ी से एक गहरा, चमकदार लाल रंग निकाला जा सकता था. उस दौर में यूरोपीय कपड़ा उद्योग में इस रंग का इस्तेमाल कपड़ों को रंगने के लिए बड़े पैमाने पर होता था.
ब्राजीलवुड पेड़ से लाल रंग निकाला जाता था.
इस पेड़ की लकड़ी से निकलने वाला रंग जलते हुए अंगारे जैसा दिखता था. पुर्तगाली भाषा में अंगारे को “Brasa” कहा जाता है. इसी शब्द से पेड़ का नाम पड़ा “PauBrasil”, जिसका मतलब होता है ‘ब्राजील की लकड़ी’ या ‘अंगारे जैसी लकड़ी’. जैसेजैसे यूरोपीय व्यापारी इस लकड़ी के व्यापार के लिए बड़ी संख्या में इस तट पर आने लगे, वे इस पूरे इलाके को ही ‘Terra do Brasil’ यानी “ब्राजील की भूमि” कहने लगे.
ब्राजीलवुड पेड़.
प्रचलित हुआ ब्राजील नाम
दिलचस्प बात यह है कि पुर्तगाली सरकार ने इस भूभाग को धार्मिक आधार पर ‘पवित्र क्रॉस की भूमि’ नाम दिया था, लेकिन आम व्यापारियों और नाविकों के बीच यह नाम कभी लोकप्रिय नहीं हुआ. इसके उलट, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा ‘ब्राजील’ नाम आम बोलचाल में तेजी से फैलने लगा. समय के साथ यही नाम इतना प्रचलित हो गया कि आधिकारिक नाम पूरी तरह पीछे छूट गया. यही वजह है कि यह पूरा क्षेत्र स्थायी रूप से ‘ब्राजील’ के नाम से जाना जाने लगा.
इस देश को पहले ‘Terra do Brasil’ यानी “ब्राजील की भूमि” कहा जाता था. फोटो: Pexels
ब्राजीलवुड की स्थिति
यह वही पेड़ है जिसने एक पूरे देश को अपना नाम दिया, लेकिन विडंबना यह है कि सदियों तक बेतहाशा कटाई की वजह से आज ब्राजीलवुड एक लुप्तप्राय प्रजाति बन चुका है. यह ब्राजील का राष्ट्रीय वृक्ष भी घोषित किया जा चुका है, और इसके संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. खास बात यह भी है कि इसी पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल आज भी वायलिन जैसे वाद्ययंत्रों के बो बनाने में किया जाता है, क्योंकि इसकी लकड़ी में खास लचीलापन और मजबूती पाई जाती है. लेकिन इस पेड़ ने इतिहास में अपना नाम गहरे अक्षरों में दर्ज करा दिया.