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होर्मुज जाने की जरूरत ही नहीं! ईरान से सामान लाने के लिए एशिया में मिला जमीन वाला रास्ता

होर्मुज पर मचे बवाल के बीच पाकिस्तान ने दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को जोड़ने के लिए ईरान के जरिए एक जमीनी रास्ता तैयार किया है. सोमवार (13 अप्रैल) को इस रास्ते से पहली बार माल भी भेजा गया है. यह रूट अगर सफल रहता है तो एशिया में ईरान से सामान भेजने के लिए समुंदर के रास्ते की जरूरत नहीं होगी. माल सप्लाई के लिए जमीन का एक वैकल्पिक रास्ता तैयार हो जाएगा.

होर्मुज जाने की जरूरत ही नहीं! ईरान से सामान लाने के लिए एशिया में मिला जमीन वाला रास्ता
होर्मुज जाने की जरूरत ही नहीं! ईरान से सामान लाने के लिए एशिया में मिला जमीन वाला रास्ता

मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक इस गलियारे का इस्तेमाल पाकिस्तान ने उज्बेकिस्तान में माल भेजने के लिए किया है. पाकिस्तान ने सोमवार को कुछ सीलबंद ट्रक के जरिए इस रास्ते से उज्बेकिस्तान को जरूरी सामान भेजा. इस रूट का नाम ईरान ट्रांजिस्ट कॉरिडोर (Iran transit corridor) है.

इसका रूट मैप समझिए

पाकिस्तान के कराची से इस रूट की शुरुआत हुई है. इसके बाद यह पाकिस्तान के ताफ्तान-मिर्जावेह के रास्ते गबद-रिमदान चौकियों के जरिए ईरान में प्रवेश कर जाती है. यहां से ईरान के कुछ हिस्सों से गुजरते हुए रास्ता तुर्केमिनिस्तान होते हुए उज्बेकिस्तान में एंटर कर जाता है.

2021 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल होते हुए ताशकंद को माल भेजा था, लेकिन इस वक्त अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सब कुछ ठीक नहीं है. दोनों के बीच व्यापार पूरी तरह ठप है. यही वजह है कि पाकिस्तान ने मध्य एशिया में सामान भेजने के लिए ईरान का रास्ता अख्तियार किया है.

यह रास्ता अहम क्यों है?

1. ईरान-पाकिस्तान-उज्बेकिस्तान के इस रूट की पहुंच कैस्पियन सागर, फारस की खाड़ी और अरब सागर में है. समुंदर के किसी भी जगह से इस रूट के लिए माल लोड किया जा सकता है.

2. कराची के रास्ते एशिया के छोटे-छोटे देश को आसानी से सामान भेजा जा सकता है. ईरान का तेल आसानी से दक्षिण एशिया में बिक सकता है. ईरान को तेल बेचने के लिए होर्मुज की जरूरत नहीं होगी.

अमेरिका ने होर्मुज की नाकाबंदी की

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज की पूर्ण नाकाबंदी कर दी है. इस नाकाबंदी के कारण होर्मुज में छोटे-छोटे देशों के जहाज फंस गए हैं. अब जब तक दोनों देशों के बीच वार्ता सफल नहीं होती है, तब तक इस रास्ते से जहाजों का निकलना मुश्किल है. ऐसे में इस नए रूट से एशियाई देशों में ऊर्जा संकट को कम किया जा सकता है.

khabarmonkey@gmail.com

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