भारत में जन्मे अरबपति बिजनेसमैन विनोद खोसला और उनकी पत्नी नीरू खोसला एक बार फिर पूरी दुनिया में चर्चा में हैं. टेक इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने के बाद अब इस कपल ने अमेरिकी स्पोर्ट्स की दुनिया में भी बड़ा दांव खेला है. खोसला फैमिली के नेतृत्व वाले इन्वेस्टर ग्रुप ने NFL की सुपर बाउल चैंपियन टीम सिएटल सीहॉक्स को 9.6 अरब डॉलर में खरीदने का समझौता किया है. यह अमेरिकी स्पोर्ट्स हिस्ट्री की सबसे बड़ी डील्स में से एक मानी जा रही है. इस डील की सबसे खास बात यह है कि नीरू खोसला टीम की कंट्रोलिंग ओनर होंगी और NFL के नियमों के मुताबिक टीम से जुड़े बड़े फैसले लेने का अधिकार उनके पास होगा. स्पोर्ट्स में एंट्री उनकी एंट्री इस बात का सबूत है कि भारतीय मूल के कारोबारी दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस और स्पोर्ट्स मार्केट में भी अपनी मजबूत जगह बना रहे हैं.

विनोद और नीरू खोसला सिर्फ अमीर बिजनेसमैन नहीं हैं, बल्कि ऐसे लोग हैं जिन्होंने सही समय पर सही जगह निवेश करके अपनी अलग पहचान बनाई. विनोद खोसला ने Sun Microsystems की शुरुआत करने के बाद Khosla Ventures बनाई, जिसने OpenAI, DoorDash, Square, Affirm, Stripe और Impossible Foods जैसी कई बड़ी कंपनियों में शुरुआती दौर में निवेश किया. इन्हीं स्मार्ट फैसलों ने उन्हें दुनिया के सबसे सफल इन्वेस्टर्स में शामिल कर दिया.
भारत से अमेरिका तक का सफर
विनोद खोसला का जन्म भारत में हुआ था. उन्होंने IIT दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए. वहां उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से MBA किया. साल 1982 में उन्होंने अपने साथियों के साथ Sun Microsystems की शुरुआत की, जिसने टेक इंडस्ट्री में बड़ी पहचान बनाई. इसके बाद उन्होंने Khosla Ventures शुरू की, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी वेंचर कैपिटल फर्मों में गिनी जाती है. फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी कुल नेटवर्थ करीब 13.7 अरब डॉलर यानी लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये है.
नीरू खोसला क्यों हैं खास?
इस डील के बाद विनोद के साथसाथ उनकी पत्नी की भी चर्चा खूब हो रही है. नीरू खोसला सिर्फ विनोद खोसला की पत्नी ही नहीं, बल्कि खुद भी एजुकेशन सेक्टर में बड़ा काम करती हैं. वह CK12 Foundation की कोचेयर हैं, जो बच्चों को बेहतर और फ्री एजुकेशन देने के लिए काम करती है. शादी के बाद उन्होंने अमेरिका की San Jose University से मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में मास्टर्स किया. सिएटल सीहॉक्स की खरीद पूरी होने के बाद वही टीम की कंट्रोलिंग ओनर होंगी. यानी NFL के नियमों के मुताबिक टीम से जुड़े बड़े फैसले लेने की जिम्मेदारी उनके पास होगी.
आखिर क्यों खास है 9.6 अरब डॉलर की डील?
सिएटल सीहॉक्स की 9.6 अरब डॉलर में हुई खरीद अमेरिकी स्पोर्ट्स हिस्ट्री की सबसे बड़ी डील्स में शामिल हो गई है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि साल 1997 में माइक्रोसॉफ्ट के कोफाउंडर पॉल एलन ने इसी टीम को सिर्फ 194 मिलियन डॉलर में खरीदा था. यानी करीब 30 साल में टीम की वैल्यू लगभग 50 गुना बढ़ गई. पॉल एलन के निधन के बाद उनकी प्रॉपर्टी संभाल रहे ट्रस्ट ने यह टीम बेची है. ट्रस्ट की शर्त के मुताबिक इस डील से मिलने वाला पैसा चैरिटी के कामों में इस्तेमाल किया जाएगा.
कैसे खड़ा किया हजारों करोड़ का बिजनेस?
विनोद खोसला ने अपने करियर की शुरुआत एक टेक एंटरप्रेन्योर के तौर पर की थी, लेकिन असली पहचान उन्हें एक सफल इन्वेस्टर के रूप में मिली. उन्होंने OpenAI, DoorDash, Affirm, Stripe, QuantumScape और Opendoor जैसी कंपनियों में शुरुआती दौर में निवेश किया. बाद में यही कंपनियां दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शामिल हो गईं. उनकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी हमेशा AI, बायोटेक, रोबोटिक्स, क्लीन एनर्जी और दूसरी फ्यूचर टेक्नोलॉजी पर फोकस रही. इसी वजह से उनकी दौलत लगातार बढ़ती गई.
पहले भी किया है स्पोर्ट्स में निवेश
सिएटल सीहॉक्स से पहले भी विनोद खोसला स्पोर्ट्स में निवेश कर चुके हैं. उन्होंने 2025 में San Francisco 49ers में छोटी हिस्सेदारी खरीदी थी. लेकिन NFL के नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एक साथ दो टीमों में हिस्सेदारी नहीं रख सकता. इसलिए Seahawks की डील पूरी होने के बाद उन्हें 49ers में अपनी हिस्सेदारी बेचनी होगी. इससे साफ है कि खोसला परिवार अब स्पोर्ट्स बिजनेस में भी लंबी पारी खेलने की तैयारी कर चुका है. विनोद खोसला को दुनिया के सबसे सफल इन्वेस्टर्स में गिना जाता है. Forbes की Midas List 2026 में उन्हें पहला स्थान मिला और लगातार 19वीं बार उनका नाम इस लिस्ट में शामिल हुआ. उन्होंने AI, बायोटेक, क्लीन एनर्जी और रोबोटिक्स जैसे फ्यूचर सेक्टर्स में भी बड़ा दांव लगाया. यही वजह है कि आज सिलिकॉन वैली में उनका नाम सबसे प्रभावशाली वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर्स में लिया जाता है.