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वाह रे पाकिस्तान! खुद की स्कूल-यूनिवर्सिटी का भविष्य नहीं, जामिया पर परोस रहे हो ज्ञान

जामिया मिलिया इस्लामिया में एक कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पाकिस्तान ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और भारत को नसीहत देने लगा, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, मामला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के युवा कुंभ कार्यक्रम से जुड़ा है. मगंलवार 28 अप्रैल को यह कार्यक्रम जामिया मिल्लिया इस्लामिया के FET ऑडिटोरियम में होने वाला था. यह RSS के शताब्दी वर्ष का कार्यक्रम था. लेकिन शुरू होने से पहले ही छात्रों ने इसका विरोध शुरू कर दिया.

वाह रे पाकिस्तान! खुद की स्कूल-यूनिवर्सिटी का भविष्य नहीं, जामिया पर परोस रहे हो ज्ञान
वाह रे पाकिस्तान! खुद की स्कूल-यूनिवर्सिटी का भविष्य नहीं, जामिया पर परोस रहे हो ज्ञान

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (AISA) और अन्य छात्र संगठनों ने इस दिन खिलाफ में प्रदर्शन किया था. उन्होंने नारेबाजी की और जामिया प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए. छात्रों का कहना है कि RSS जैसे संगठन को कैंपस में कार्यक्रम की अनुमति देना गलत है. इस मामले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने बयान दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के जरिए मिली है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में कट्टरपंथी हिंदू विचारधारा अब शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच रही है.

ऐसी घटनाएं चिंता की बात: पाकिस्तान

अंद्राबी ने कहा कि जामिया जैसे संस्थान की एक अच्छी परंपरा और पहचान रही है, इसलिए वहां इस तरह की घटनाएं चिंता की बात हैं. उन्होंने यह भी कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को प्रचार और नफरत फैलाने के मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले पर ध्यान देने की अपील की है. साथ ही भारत से कहा है कि वह नफरत फैलाने वाले बयानों को रोके और खासकर मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की रक्षा करे. यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमले रूकने का नाम नहीं ले रहे.

AISA का आरोप: RSS की विचारधारा फैलाई जा रही

AISA का आरोप है कि इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए RSS विश्वविद्यालयों में अपनी विचारधारा फैलाने की कोशिश कर रहा है. उनका कहना है कि जामिया प्रशासन आम छात्र संगठनों को ऐसे कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं देता, लेकिन RSS को अनुमति देना दोहरा रवैया दिखाता है.

छात्र संगठनों ने यह भी कहा कि इससे देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को नुकसान पहुंचता है. उन्होंने साफ कहा कि जामिया या किसी भी विश्वविद्यालय में सांप्रदायिक राजनीति और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए.

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