BusinessViral

रुपया हुआ बहुत कमजोर, पेट्रोल-डीजल से लेकर मोबाइल तक… क्या-क्या हो सकता है महंगा!

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया दबाव झेलते हुए अपने सबसे निचले स्तर के करीब लुढ़क चुका है. अगर रुपये की यह कमजोरी कुछ दिन और जारी रही, तो आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन से लेकर गाड़ी में डलने वाले पेट्रोल तक, सब कुछ महंगा हो सकता है. आइए समझते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट का यह भूचाल आम आदमी की जिंदगी में कितनी बड़ी सेंध लगा सकता है.

रुपया हुआ बहुत कमजोर, पेट्रोल-डीजल से लेकर मोबाइल तक… क्या-क्या हो सकता है महंगा!
रुपया हुआ बहुत कमजोर, पेट्रोल-डीजल से लेकर मोबाइल तक… क्या-क्या हो सकता है महंगा!

रुपया आखिर क्यों टूट रहा है?

रुपये की सेहत बिगड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण है कच्चा तेल. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी तेल विदेशों से खरीदता है. तेल महंगा होने का मतलब है कि हमें इसके लिए ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे. जब बाजार में डॉलर की मांग अचानक बढ़ती है, तो रुपया स्वाभाविक रूप से कमजोर पड़ने लगता है. इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी दुनिया भर की करेंसी को हिलाकर रख दिया है.

आपकी जेब पर सीधा अटैक

रुपये में आई इस गिरावट का सबसे पहला असर उन सामानों पर दिखेगा जो हम बाहर से मंगाते हैं. अगर आप नया लैपटॉप, गेमिंग कंसोल या कैमरा खरीदने का मन बना रहे हैं, तो अब आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है. कंपनियों को विदेशी सप्लायर्स को पेमेंट करने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे. यह बढ़ा हुआ खर्च आखिरकार आम ग्राहक से ही वसूला जाएगा. सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स ही नहीं, बल्कि एविएशन, केमिकल ऑटोमोबाइल जैसे कई प्रमुख सेक्टर अपने कच्चे माल के लिए आयात पर भारी निर्भरता रखते हैं. जब माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ती है, तो इसका सीधा असर किराना, फूड डिलीवरी रोजमर्रा के जरूरी सामानों की महंगाई के रूप में सामने आता है.

विदेश जाना अब सस्ता नहीं

क्या आप छुट्टियों में विदेश घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं या आपके बच्चे विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं? अगर हां, तो रुपये की यह गिरावट आपकी चिंता बढ़ा सकती है. अब एक डॉलर खरीदने के लिए आपको पहले से ज्यादा रुपये देने होंगे. इसका सीधा मतलब है कि विदेश में होटल की बुकिंग, खाना-पीना, शॉपिंग का बिल काफी बढ़ जाएगा. वहीं, विदेशी यूनिवर्सिटी में फीस भरने वाले छात्रों के परिवारों पर भी आर्थिक बोझ सीधा-सीधा बढ़ जाएगा क्योंकि वहां रहने का खर्च रुपये के गणित में काफी ऊपर चला जाएगा.

Khabar Monkey

इस गिरावट के कुछ फायदे भी हैं

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं. रुपये की इस रिकॉर्ड गिरावट से हर किसी को नुकसान नहीं हो रहा है. जो कंपनियां अपना सामान विदेशों में बेचती हैं, उनके लिए यह खबर फायदेमंद साबित हो सकती है. विशेषकर आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के साथ-साथ फार्मा कंपनियों की कमाई डॉलर में होती है. जब वे इस डॉलर को भारतीय रुपये में बदलवाएंगे, तो उन्हें पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा रकम मिलेगी. इसके अलावा, जो भारतीय विदेश में रहकर नौकरी कर रहे हैं, उनके द्वारा घर भेजे गए पैसों (रेमिटेंस) की वैल्यू भी अब बढ़ जाएगी.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply