नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स समिट का आगाज हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हाईप्रोफाइल समिट की मेजबानी कर रह हैं. इस समिट में ब्रिक्स के 11 सदस्य देश और पार्टनर कंट्रीज भी शामिल होंगे. ब्रिक्स अब सिर्फ 5 देशों का समूह नहीं रहा. इसकी शुरुआत ब्राजील रूस, भारत, चीन के साथ हुई थी और बाद में साउथ अफ्रीका जुड़ा. इस तरह का यह ब्रिक से ब्रिक्स हुआ.

पिछले तीन सालों में ब्रिक्स का दायरा तेजी से बढ़ा. अब इसमें 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हो गए हैं. वहीं 10 पार्टनर कंट्रीज हैं. समिट के बीच सवाल है कि क्या होते हैं पार्टनर कंट्रीज, ये ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य देशों से कितने अलग होते हैं और क्या इनके पास अधिकार होते हैं?
क्या हैं सदस्य देश और पार्टनर कंट्रीज?
2024 में जोहानिसबर्ग समिट में BRICS का पहला बड़ा विस्तार हुआ, जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई को शामिल किया गया. इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी औपचारिक रूप से पूर्ण सदस्य बन गया. इस तरह मूल पांच देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका के साथ मिलकर आज BRICS में कुल 11 पूर्ण सदस्य देश गिने जाते हैं.
ब्रिक्स.
क्या है पार्टनर कंट्री?
अब सवाल है कि जब ब्रिक्स में सदस्य देश पहले से जुड़े हैं तो पार्टनर कंट्री की व्यवस्था क्यों बनाई गई. इसका जवाब है 2024 का ब्रिक्स समिट. 2024 में रूस के कजान शहर में हुई BRICS समिट में एक नई व्यवस्था बनाई गई. पार्टनर कंट्री के नाम से नई कैटेगरी बनी.
कजान समिट से पहले दुनिया के 35 देशों ने BRICS से जुड़ने में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन इतने सारे देशों को एक साथ पूर्ण सदस्यता देना संगठन के लिए व्यावहारिक नहीं था. इसलिए एक बीच का रास्ता निकाला गया. ऐसे देशों को “पार्टनर” का दर्जा दिया. ये BRICS की गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे लेकिन पूर्ण सदस्य जितने अधिकार उन्हें नहीं मिलेंगे.
रूस के राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने कहा था कि 13 देशों को न्योता भेजा गया था, जिनमें से 9 देशों ने तुरंत हामी भर दी. 1 जनवरी 2025 से बेलारूस, बोलीविया, कज़ाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज़्बेकिस्तान औपचारिक रूप से पार्टनर कंट्रीज बन गए. कुछ महीनों बाद जून 2025 में वियतनाम भी इस सूची में दसवें पार्टनर देश के रूप में जुड़ गया. पार्टनर देशों मेंबेलारूस, बोलीविया, कज़ाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं.
पूर्ण सदस्य और पार्टनर देश में फर्क क्या है?
ज्यादातर लोग पूर्ण सदस्य और पार्टनर देश में कन्फ्यूज हो जाते हैं. दोनों कैटेगरी में फर्क सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि अधिकारों का है. पूर्ण सदस्य देशों को BRICS के हर मंच, हर बैठक और फैसले लेने की प्रक्रिया में पूरी हिस्सेदारी मिलती है. न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसी BRICS की वित्तीय संस्थाओं में भी इनकी सीधी भागीदारी होती है, और अहम फैसलों पर इनकी सहमति जरूरी मानी जाती है.
वहीं पार्टनर कंट्रीज को सीमित भूमिका दी गई है. ये देश BRICS की कुछ चुनी हुई अहम बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन बाकी सत्रों में उनकी भागीदारी बाकी सदस्य देशों की सहमति यानी “कंसल्टेशन एंड कंसेंसस” पर निर्भर करती है. साफ शब्दों में कहें तो पार्टनर देशों के पास पूर्ण सदस्यों जैसा वीटो या निर्णायक अधिकार नहीं होता.