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राज्यसभा टिकट के बाद BJP में घमासान? कौशल किशोर के बाद धर्मेंद्र कश्यप का ‘टाटा-बाय-बाय’​

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट सामने आते ही पार्टी के अंदर नाराजगी के सुर सुनाई देने लगे हैं. पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और मोहनलालगंज के पूर्व सांसद कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी सामने आई और अब आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने टाटाबायबाय […]

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट सामने आते ही पार्टी के अंदर नाराजगी के सुर सुनाई देने लगे हैं. पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और मोहनलालगंज के पूर्व सांसद कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी सामने आई और अब आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने टाटाबायबाय पोस्ट कर सियासी हलचल बढ़ा दी है.

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं. इनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं. इस लिस्ट में मौजूदा सदस्यों हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा समेत कई पुराने चेहरों को जगह नहीं मिली.

कौशल किशोर परिवार का दर्द

राज्यसभा की लिस्ट आने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और मोहनलालगंज के पूर्व सांसद कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘जिस परिवार में मांबाप का मान और सम्मान न हो, उस परिवार में नहीं रहना चाहिए.’विकास किशोर बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं. उनके इस पोस्ट के बाद कौशल किशोर परिवार के बीजेपी से दूरी बनाने की अटकलें शुरू हुईं. कौशल किशोर 2024 का लोकसभा चुनाव हार गए थे और राज्यसभा के लिए उनका नाम भी चर्चा में था, लेकिन बीजेपी ने अवध क्षेत्र से पासी समाज की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया.

इससे पहले कौशल किशोर पार्टी के अंदर अपनी अनदेखी को लेकर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जता चुके थे. दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही बीजेपी ने उनके बेटे विकास किशोर को SC मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया था. उस समय कौशल किशोर ने पार्टी नेतृत्व का आभार भी जताया था, लेकिन राज्यसभा की लिस्ट आने के बाद एक बार फिर परिवार की नाराजगी सामने आ गई.

धर्मेंद्र कश्यप का टाटाबायबाय

आंवला से दो बार बीजेपी सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची आने के बाद फेसबुक पर सिर्फ दो शब्द लिखे टाटा बायबाय. पोस्ट में उन्होंने न बीजेपी का नाम लिया और न ही पार्टी छोड़ने का ऐलान किया, लेकिन पोस्ट का समय और राज्यसभा टिकट की चर्चा ने इसके राजनीतिक मायने बढ़ा दिए. धर्मेंद्र कश्यप 2014 और 2019 में आंवला से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे. 2024 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

राज्यसभा की इस बार की लिस्ट में उनका नाम नहीं आया और सबसे अहम बात कि जिस बरेली क्षेत्र से धर्मेंद्र कश्यप आते हैं, उसी क्षेत्र से बीजेपी ने दो चेहरे राज्यसभा के लिए चुने हैं धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार. धर्मपाल सिंह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि श्रुति गंगवार पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं.

‘मील का पत्थर बदलने जा रहा है?’

धर्मेंद्र कश्यप की पोस्ट के बाद जब उनसे उनके अगले कदम को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी छोड़ने का ऐलान नहीं किया, लेकिन उनके जवाब ने सस्पेंस जरूर बढ़ा दिया. टाटाबायबाय किस चीज से है, पूछे जाने पर उन्होंने शायराना अंदाज में जवाब दिया— आंखों में रहा, दिल में उतरकर नहीं देखा… कश्ती के मुसाफिर ने कभी समंदर नहीं देखा. जब उनसे पूछा गया कि क्या अब मील का पत्थर बदलने जा रहा है, क्योंकि उनके क्षेत्र में बीजेपी का कोई पोस्टर दिखाई नहीं दे रहा, तो धर्मेंद्र कश्यप ने कहा निश्चित ही मानिए… निश्चित ही मानिए.

चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने फैसला समर्थकों पर छोड़ दिया. उन्होंने कहा कि समर्थकों की बैठक बुलाई जाएगी और उसके बाद आगे का फैसला होगा. धर्मेंद्र कश्यप से जब पूछा गया कि क्या वह समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव के साथ जा सकते हैं, तो उन्होंने किसी पार्टी का नाम नहीं लिया. उनका कहना था कि समर्थक जो फैसला करेंगे, उसी के मुताबिक आगे की रणनीति तय होगी. हालांकि, उनकी अखिलेश यादव से मुलाकातों की चर्चा पहले से रही है.

नाराजगी की सबसे बड़ी वजह 2024 की खिलाफत

धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी नाराजगी की वजह को राज्यसभा टिकट से आगे ले जाकर 2024 के लोकसभा चुनाव से जोड़ दिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने 2024 का चुनाव लड़ा था और जिन लोगों ने उस समय खुलकर उनकी खिलाफत की, अगर वही लोग आज पार्टी की अग्रिम पंक्ति में बैठेंगे तो उन्हें स्वाभाविक तौर पर कष्ट होगा. उन्होंने संकेत दिया कि अगर पार्टी ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती और उनकी चिंता पर ध्यान नहीं देती, तो हम जैसे व्यक्ति का स्वाभाविक टाटाबायबाय कहना बन जाता है.

एक तरफ नए चेहरे, दूसरी तरफ पुराने दावेदारों की नाराजगी

बीजेपी ने इस बार राज्यसभा के लिए लगभग पूरी तरह नए चेहरों पर दांव लगाया है. पार्टी के आठों उम्मीदवार नए हैं. मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में से किसी को दोबारा मौका नहीं मिला. नई लिस्ट में सामाजिक समीकरण का भी ध्यान रखा गया है. तीन OBC, दो दलित, दो ब्राह्मण और एक राजपूत चेहरा लिस्ट में है. हालांकि, इस लिस्ट के आने के बाद बीजेपी के कई नेता नाराज बताए जा रहे हैं. कुछ ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया तो कुछ पर्दे के पीछे रहकर विरोध कर रहे हैं.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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