फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने सोमवार को एक्टर रणवीर सिंह के खिलाफ ‘डॉन 3’ से अचानक बाहर निकलने के मामले में डिसिप्लिनरी एक्शन लेते हुए नॉन-कोऑपरेशन निर्देश जारी किया था। इस फैसले को कई मीडिया रिपोर्ट्स ने बैन बताया, लेकिन अब FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने साफ किया है कि यह कोई बैन नहीं है।

ई-टाइम्स से बातचीत में अशोक पंडित ने कहा कि FWICE कोई अदालत नहीं है, इसलिए वह किसी को बैन नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि संगठन ने सिर्फ नॉन-कोऑपरेशन का फैसला लिया है, यानी FWICE से जुड़े करीब 30 क्राफ्ट्स के लोग रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करेंगे।
उन्होंने आगे समझाया कि यह पूरी तरह इंडस्ट्री के सदस्यों की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वे रणवीर के साथ काम करना चाहते हैं या नहीं। फिलहाल फेडरेशन ने सिर्फ यह निर्देश दिया है कि जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक सहयोग न किया जाए।
Khabar Monkey
अशोक पंडित ने यह भी कहा कि यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर कलाकार इस तरह प्रोजेक्ट छोड़ते रहेंगे तो इसका असर पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ेगा। उन्होंने प्रोड्यूसर्स के नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि हर प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट जितना मजबूत नहीं होता कि करोड़ों का नुकसान झेल सके।
FWICE के अनुसार, ने तीन बार बुलाने के बावजूद फेडरेशन की मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया। बाद में जब प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी मिली, तब उन्होंने ईमेल भेजकर कहा कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
फेडरेशन ने यह भी कहा कि अभी तक इस पूरे विवाद का कोई समाधान नहीं निकला है और रणवीर को प्रोड्यूसर्स और FWICE के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए। साथ ही, लगभग 45 करोड़ रुपये के नुकसान के मुआवजे को लेकर भी बातचीत की गुंजाइश बताई गई है।
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने “डॉन 3” को अचानक छोड़ दिया, जबकि फिल्म की प्री-प्रोडक्शन काफी आगे बढ़ चुकी थी और उनके साथ एक प्रोमो भी शूट हो चुका था। प्रोड्यूसर्स का कहना है कि इससे उन्हें बड़ा नुकसान हुआ है और सभी खर्च रिकॉर्ड में मौजूद हैं।




