मिडिल ईस्ट की जंग के बीच एक दिलचस्प खेल चल रहा है. सऊदी अरब और कतर ने पाकिस्तान को लगभग 5 अरब डॉलर (करीब 46,500 करोड़ रुपये) की आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया है. लेकिन सवाल यह है कि यह पैसा दिया क्यों जा रहा है. खासकर तब, जब यूएई ने पाकिस्तान से अपना कर्ज वापस मांग लिया है? इसे समझने के लिए चार बड़े पहलुओं को जानना जरूरी है.

1. UAE और सऊदी के बीच असली दुश्मनी
खाड़ी में बहुत पहले से सऊदी अरब और यूएई के बीच कॉम्पिटिशन चल रहा है. इधर, पाकिस्तान यूएई के प्रतिद्वंद्वी सऊदी अरब के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, जो यूएई को रास नहीं आ रहा. यूएई और सऊदी अरब यमन और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में अपनी पकड़ मजबूत करने की होड़ में हैं. सऊदी अरब ने यमन में यूएई समर्थित समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) पर हमले कर चुका है, जिससे UAE को सोमालिया के अपने बेस से पीछे हटना पड़ा. पाकिस्तान ने यूएई के बजाय सऊदी से डिफेंस समझौता किया, जो उसे रास नहीं आया.
2. पाकिस्तान ने सऊदी में भेजे 13,000 सैनिक
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल हुए रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने करीब 13,000 सैनिकों और 10 से 18 लड़ाकू विमान सऊदी अरब भेजा है. यह तैनाती किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर की गई है. एक अधिकारी के मुताबिक, ईरान के हमलों के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब को मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी दिया है. इसके बदले में सऊदी अरब ने 2018 में दिया गया 6 अरब डॉलर का पुराना कर्ज अभी वापस न मांगने का फैसला लिया है.
3. इस्लामाबाद में शांति वार्ता
ईरान-अमेरिका सीजफायर के लिए जो इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई. उसमें पाकिस्तान एकमात्र कम्युनिकेशन चैनल था. सऊदी और कतर चाहते हैं कि यह जंग जल्द खत्म हो. होर्मुज खुले, ऊर्जा सप्लाई बहाल हो और क्षेत्र में इजराइल के साथ संबंध सामान्य हों. ट्रंप पहले ही इशारा कर चुके हैं कि जंग खत्म होने के बाद सऊदी-इजराइल संबंध सामान्य करने का वक्त आ गया है. इस पूरे कूटनीतिक खेल में पाकिस्तान की भूमिका बिचौलिए की है. इसी भूमिका की कीमत इस्लामाबाद वसूल रहा है.
4. यमन और सूडान में प्रॉक्सी वॉर
यमन और सूडान में चल रहे प्रॉक्सी वॉर का असर अब पाकिस्तान पर भी साफ दिखाई दे रहा है. साल 2015 के बाद से पाकिस्तान की सेना यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले अभियानों में किसी न किसी रूप में जुड़ी रही है, लेकिन हाल ही में सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते के बाद सैनिकों की यह तैनाती पहले से कहीं ज्यादा बड़ी और अहम मानी जा रही है. इससे संकेत मिलता है कि पाकिस्तान अब खुलकर सऊदी अरब के साथ खड़ा हो रहा है.
दूसरी तरफ सूडान में अप्रैल 2023 से जारी गृहयुद्ध ने हालात और जटिल बना दिए हैं. इस संघर्ष में अब तक करीब 1.5 लाख लोगों की मौत हो चुकी है. यूएई पर आरोप हैं कि वह सूडान के रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) को हथियार दे रहा है. ऐसे में पाकिस्तान का सऊदी की तरफ झुकाव UAE को ठीक नहीं लग रहा.
यूएई ने पाकिस्तान को 3.5 अरब डॉलर (लगभग 29,000 करोड़ रुपये) का कर्ज 17 अप्रैल तक वापस लौटाने का अल्टीमेटम दिया है. पाकिस्तान के पास पैसा नहीं था, इसलिए सऊदी और कतर ने आगे बढ़कर मदद की. पाकिस्तान UAE का कर्ज, सऊदी-कतर के पैसे से चुकाएगा.





