जब किसी अपने से बेहद प्यार होता है, तो उसे खोने का डर भी सबसे बड़ा होता है। एक्टर सयाजी शिंदे ने इसी भावना को एक ऐसे अभियान में बदल दिया, जिसने महाराष्ट्र के कई गांवों में हरियाली और नई उम्मीद पैदा कर दी। मां के प्रति उनका प्रेम आज एक प्रेरणादायक पर्यावरण मिशन बन चुका है, जिसके तहत अब तक 6.5 लाख से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं।

‘शूल’, ‘सरकार राज’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाने वाले सयाजी अब प्रकृति बचाने के इस अनोखे प्रयास के लिए भी खूब सराहे जा रहे हैं।
महाराष्ट्र के सतारा जिले में किसान परिवार में जन्मे सयाजी ने बचपन से संघर्ष देखा। साल 1978 में सरकार ने डैम प्रोजेक्ट के लिए उनके परिवार की जमीन ले ली। बदले में उन्हें सिंचाई विभाग में चौकीदार की नौकरी दी गई। लेकिन जो नई जमीन देने का वादा किया गया था, वह 35 साल बाद जाकर मिली।
अनकट के साथ खास बातचीत में सयाजी ने बताया, “सरकार ने लोगों के साथ अन्याय किया। हमारी जमीन 1978 में ली गई और बदले में जमीन 2022 में मिली।”
करीब चार दशक लंबे अभिनय करियर और सफलता के बावजूद सयाजी को सिर्फ नाम और शोहरत से संतोष नहीं मिला। उन्होंने कहा, “हर कोई नाम और पैसा कमाना चाहता है, लेकिन मैं उससे आगे कुछ करना चाहता था।”
साल 2016 में महाराष्ट्र में पड़े भीषण सूखे ने उनकी सोच बदल दी। गांवों की मदद के दौरान उन्होंने देखा कि लोग तेज धूप में बिना किसी पेड़ की छांव के बैठक कर रहे हैं। तभी उन्हें एहसास हुआ कि गांवों की मदद का पहला कदम पेड़ लगाना होना चाहिए।
इसके बाद सयाजी ने हैदराबाद से दो ट्रक पौधे मंगवाए, जिन पर करीब 1 लाख रुपये खर्च हुए। इसी दौरान उन्हें भारत की पुरानी परंपरा देवराई के बारे में पता चला, जिसमें जंगलों को पवित्र मानकर उनकी रक्षा की जाती थी। इससे प्रेरित होकर उन्होंने “सह्याद्री देवराई” नाम से जंगल उगाने की शुरुआत की।
मां के प्यार से शुरू हुआ यह मिशन
इस अभियान के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी मां के लिए प्यार था। साल 2016 में उनकी मां 92 साल की थीं। सयाजी को हमेशा यह डर सताता था कि एक दिन वह उन्हें खो देंगे।
उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं अपनी मां को हमेशा अपने साथ नहीं रख सकता था। मैं मौत को रोक नहीं सकता था, लेकिन मैंने सोचा कि उनकी याद को हमेशा जिंदा रखा जा सकता है।”
सयाजी ने अपनी मां से कहा, “मैं इतना शक्तिशाली नहीं हूं कि आपको हमेशा जिंदा रख सकूं। इसलिए मैंने तय किया कि आपके वजन के बराबर बीज तौलकर पूरे महाराष्ट्र में बोऊंगा। जब ये बीज पेड़ बनेंगे, फूल देंगे, फल देंगे और लोगों को छांव देंगे, तब उनकी खुशबू में मुझे आपकी मौजूदगी महसूस होगी। इस तरह आप हमेशा मेरे साथ रहेंगी।”
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यही सोच आज उनका जीवन मिशन बन चुकी है। सयाजी आज महाराष्ट्र के 48 इलाकों में पेड़ लगाने का काम कर रहे हैं, जहां हजारों से लेकर लाखों पेड़ लगाए जा चुके हैं। इनमें से कई पौधे अब बड़े जंगल बन चुके हैं, जो पर्यावरण को नई जिंदगी दे रहे हैं। उनका कहना है कि इसी तरह मेरी मां आज भी जिंदा हैं।





