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फिल्मों में देवता, राजनीति में जननायक… NTR की लोकप्रियता के आगे फीके पड़े दिग्गज

दक्षिण भारतीय सिनेमा के इतिहास में अगर किसी अभिनेता को सच मायनों में देवता का दर्जा मिला, तो वो थे नंदामुरी तारका राम राव यानी एनटीआर। पर्दे पर उन्होंने भगवान राम, कृष्ण और कर्ण जैसे किरदार निभाए, तो जनता ने उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं बल्कि आस्था का प्रतीक मान लिया।

फिल्मों में देवता, राजनीति में जननायक… NTR की लोकप्रियता के आगे फीके पड़े दिग्गज
फिल्मों में देवता, राजनीति में जननायक… NTR की लोकप्रियता के आगे फीके पड़े दिग्गज

यही वजह रही कि फिल्मों में मिली अपार लोकप्रियता ने उन्हें राजनीति में भी ऐसा जननायक बना दिया, जिसके सामने बड़े-बड़े दिग्गज फीके पड़ गए। आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी है और इस मौके पर हम उनकी कामयाबी से लेकर उनकी लोकप्रियता के किस्से जानेंगे।

फिल्मों को त्योहार की तरह मानते थे दर्शक

1950 से 1980 के दशक तक तेलुगु सिनेमा में एनटीआर का दबदबा ऐसा था कि उनकी फिल्म रिलीज होना किसी त्योहार से कम नहीं माना जाता था। खासतौर पर पौराणिक फिल्मों में निभाए गए उनके किरदारों ने लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी।

स्क्रीन की पूजा करते थे दर्शक

फिल्म ‘मायाबाजार’, ‘श्री कृष्णार्जुन युद्धम’ और ‘दाना वीरा सूरा कर्णा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने भगवान कृष्ण और महाभारत के पात्रों को जिस अंदाज में निभाया, उसे देखकर दर्शक सिनेमाघरों में उनकी आरती तक उतारते थे। गांवों में उनकी तस्वीरों को मंदिरों में लगाया जाता था और कई लोग उन्हें सचमुच भगवान का रूप मानने लगे थे।

उनका डायलॉग बोलने का अंदाज, दमदार आवाज और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी प्रभावशाली थी कि तेलुगु सिनेमा में उनका मुकाबला करना लगभग नामुमकिन माना जाता था। उस दौर में जब हिंदी सिनेमा में राज कपूर, र और अमिताभ बच्चन जैसे सितारों का दबदबा था, दक्षिण भारत में एनटीआर की लोकप्रियता किसी सुपरस्टार से कहीं आगे निकल चुकी थी।

राजनीति में एंट्री और इतिहास रच दिया

1982 में एनटीआर ने राजनीति में कदम रखा और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना की। उनका मकसद था तेलुगु अस्मिता और आंध्र प्रदेश की पहचान को नई ताकत देना।

सिर्फ नौ महीने के भीतर उन्होंने ऐसा राजनीतिक चमत्कार कर दिखाया, जो भारतीय राजनीति के इतिहास में मिसाल बन गया। 1983 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने कांग्रेस जैसी मजबूत पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया और एनटीआर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए।

उस दौर में कांग्रेस का पूरे देश में दबदबा था, लेकिन एनटीआर की लोकप्रियता ने सारी राजनीतिक गणनाएं बदल दीं। लोग उन्हें देखने के लिए किलोमीटरों पैदल चलते थे। उनका चैतन्य रथ अभियान भारतीय राजनीति के सबसे सफल जनसंपर्क अभियानों में गिना जाता है।

एनटीआर ने 1982 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना की, तो जनता से सीधा संपर्क करने के लिए उन्होंने चैतन्य रथ अभियान चलाया। उन्होंने एक पुराने शेवरले ट्रक को रथ में बदलकर, पूरे राज्य में करीब 40,000 किलोमीटर की ऐतिहासिक रथ यात्रा की और ऐसे ही वो जनता के दिलों में बस गए।

जनता को एनटीआर से था अलग लगाव

एनटीआर की सबसे बड़ी ताकत थी उनका आम लोगों से सीधा जुड़ाव। फिल्मों में उन्होंने हमेशा धर्म, न्याय और गरीबों के हित की बात करने वाले किरदार निभाए, और राजनीति में भी वही छवि उनके काम आई।

उन्होंने गरीबों के लिए दो रुपये किलो चावल जैसी योजनाएं शुरू कीं, महिलाओं और ग्रामीण जनता के लिए कई फैसले लिए। जनता को लगता था कि पर्दे पर न्याय करने वाला उनका नायक अब असल जिंदगी में भी उनके लिए लड़ रहा है।

आज भी कायम है NTR का जादू

एनटीआर सिर्फ एक अभिनेता या नेता नहीं थे, बल्कि वो एक भावना बन चुके थे। आज भी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उनकी लोकप्रियता वैसी ही दिखाई देती है। उनकी विरासत को उनके परिवार के सदस्य और तेलुगु सिनेमा के कई बड़े सितारे आगे बढ़ा रहे हैं।

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नंदामुरी तारक रामा राव के परिवार के कई सदस्य फिल्मों से जुड़े हुए हैं और उनकी विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके बेटे नंदमुरी बालकृष्ण पौराणिक सिनेमा के बड़े सितारे हैं, एक्शन और पौराणिक दोनों तरह की फिल्मों में काम कर चुके हैं और राजनीति में भी सक्रिय हैं। उनके एक और बेटे नंदमुरी हरिकृष्ण भी अभिनेता रहे और बाद में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।

वहीं उनके पोते एन. टी. रामा राव जूनियर (जूनियर एन ट्रेवलर) आज के समय के सबसे लोकप्रिय लोकप्रिय सुपरस्टार्स में से एक हैं और पैन-इंडिया स्टार के रूप में पहचान बना चुके हैं, वहीं दूसरे स्थान पर नंदमुरी कल्याण राम अभिनेता और फिल्म निर्माता दोनों हैं, जो कई फिल्मों में मुख्य भूमिका के साथ-साथ काम भी करते हैं।

एनटीआर के नाम पर बने पुरस्कार और कई स्थान

एनटीआर के योगदान को सम्मान देने के लिए उनके नाम पर कई जगह, संस्थान और पुरस्कार दिए गए हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में आज भी उन्हें बहुत सम्मान से याद किया जाता है।

उनके नाम पर हैदराबाद का मशहूर NTR गार्डन्स, हुसैन सागर झील के पास स्थित NTR मेमोरियल, आंध्र प्रदेश की प्रमुख मेडिकल यूनिवर्सिटी एनटीआर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, हैदराबाद का एनटीआर स्टेडियम, आंध्र प्रदेश का एनटीआर डिस्ट्रिक्ट और तेलुगु सिनेमा में दिए जाने वाला एनटीआर नेशनल अवॉर्ड शामिल हैं।

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