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महिला ने गोद लिए 50 कुत्ते, सड़कों पर आवारा थे घूमते, अब मांगी पालने के लिए लोगों से मदद!

महिला ने गोद लिए 50 कुत्ते, सड़कों पर आवारा थे घूमते, अब मांगी पालने के लिए लोगों से मदद!

इंसानियत और जानवरों के प्रति प्रेम की मिसाल कायम करने वाली मलेशिया की एक बुजुर्ग महिला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. महिला का नाम है जनकी. उन्होंने सड़कों पर आवारा घूम रहे 50 कुत्तों को अपना परिवार बना लिया है. पति की मौत के बाद अकेली रह गई इस महिला ने इन कुत्तों को मां का प्यार दिया. लेकिन अब उनकी जिंदगी संकट में फंस गई है.

कुआलालंपुर के जिनजांग इलाके में एक खाली प्लॉट पर जनकी पिछले कई सालों से इन 50 कुत्तों की देखभाल कर रही हैं. वो रोज अपनी मेहनत से या पति की मौत के बाद मिलने वाले 500 रिंगिट (लगभग 9,500 रुपये) की SOCSO पेंशन से इन कुत्तों को खाना खिलाती हैं. उन्होंने खुद अपने पैसे से इनके लिए छोटा सा शेल्टर भी बनाया है. सुबह-शाम पानी पिलाना, खाना देना और बीमार होने पर दवा देना उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या बन गई है. लेकिन अब पैसों की किल्लत इसमें बाधा बन रही है.

मुश्किल में पड़ी महिला
स्थानीय इंफ्लुएंसर सिडनी (@hiraethrm.jpg) ने इंस्टाग्राम पर जनकी की कहानी शेयर की है. उन्होंने बताया कि हाल ही में जमीन के मालिक ने उन्हें नोटिस दे दिया है. इस जमीन पर अब कोंडोमिनियम बनाया जाएगा. जनकी को खाली करने के लिए कहा गया है. महिला बेहद परेशान हैं. वे कहती हैं, “मैं इन बच्चों को कहां ले जाऊंगी? अगर सड़क पर छोड़ दिया तो कुआलालंपुर सिटी हॉल (DBKL) के लोग उन्हें पकड़कर ले जाएंगे. कई कुत्ते बीमार हैं, कुछ बूढ़े हैं. मैं इन्हें कैसे अकेला छोड़ दूं?” जनकी की यह कहानी देखकर हजारों लोग भावुक हो रहे हैं. कई डॉग लवर्स और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट उनकी मदद के लिए आगे आए हैं. कुछ लोग खाना, दवा और पैसे की मदद भेज रहे हैं जबकि कुछ लोग नई जगह ढूंढने में सहयोग कर रहे हैं.

जनकी का संघर्ष
जनकी एक साधारण महिला हैं. पति के गुजर जाने के बाद उनका आर्थिक संकट गहरा गया. फिर भी उन्होंने इन आवारा कुत्तों को सहारा दिया. वे कहती हैं, “ये मेरे बच्चे हैं. ये मेरा परिवार हैं. मैं इन्हें कभी नहीं छोडूंगी.” उनकी इस निस्वार्थ सेवा ने उन्हें लोकल डॉग लवर्स की मिसाल बना दिया है. लेकिन अब जमीन मालिक ने eviction notice दे दिया है. नई जगह ढूंढना मुश्किल क्योंकि 50 कुत्तों के लिए बड़ा क्षेत्र चाहिए. जनकी आर्थिक तंगी से गुजर रही है. सिर्फ पेंशन पर निर्भर है. वहीं कुत्तों का स्वास्थ्य और भोजन का खर्च लगातार बढ़ रहा है.

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