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भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए ‘गेमचेंजर’ बन सकता है वेनेजुएला! ऐसे खत्म होगा तेल का संकट

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर मंडराते खतरे के बीच, दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला भारत के लिए एक बड़ा मददगार बनकर सामने आया है. भारत को कच्चा तेल (crude oil) सप्लाई करने के मामले में वेनेजुएला अब तीसरे नंबर पर पहुंच गया है. इस रेस में उसने सऊदी अरब और अमेरिका जैसे बड़े देशों को भी पीछे छोड़ दिया है.

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए ‘गेमचेंजर’ बन सकता है वेनेजुएला! ऐसे खत्म होगा तेल का संकट
भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए ‘गेमचेंजर’ बन सकता है वेनेजुएला! ऐसे खत्म होगा तेल का संकट

यह वही वेनेजुएला है, जो पिछले कई सालों से बदहाल आर्थिक स्थिति, खराब मैनेजमेंट और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों (sanctions) की मार झेल रहा था. लेकिन अब अचानक यह देश भारत सहित पूरी दुनिया की एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) के लिए सबसे जरूरी सेंटर बन गया है. कच्चे तेल के इस खेल में वेनेजुएला की वापसी से अब यह उम्मीद जगी है कि दुनिया भर में महंगाई कम हो सकती है.

Khabar Monkey

303 अरब बैरल का खजाना बना ग्लोबल इकॉनमी की चाबी

कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के बिना दुनिया का पहिया घूम नहीं सकता. जब बात सबसे बड़े तेल भंडार की आती है, तो जेहन में अमूमन सऊदी अरब या अमेरिका का नाम आता है. लेकिन असल सरताज वेनेजुएला है. इस देश की धरती के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का विशाल भंडार छिपा है. यह पूरी दुनिया के कुल रिज़र्व का लगभग 20 फीसदी हिस्सा है. अमेरिका के पास जितना तेल है, उससे पांच गुना ज्यादा अकेला वेनेजुएला समेटे बैठा है. सऊदी अरब (267 अरब बैरल) से लेकर कनाडा (171 अरब बैरल) तक इस मामले में काफी पीछे छूट जाते हैं.

सालों तक खराब मैनेजमेंट, विदेशी पाबंदियों के कारण यह खजाना जमीन के नीचे ही दबा रहा. साल 2020 में इसका उत्पादन गिरकर 4 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे आ गया था. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. ओपेक (OPEC) की मई 2026 की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिकी पाबंदियों में मिली चुनिंदा छूट, शेवरॉन (Chevron) जैसी ग्लोबल कंपनियों के निवेश के दम पर इसका उत्पादन 11.36 लाख बैरल प्रतिदिन के पार पहुंच गया है. अगर यह देश अपनी पूरी क्षमता का दोहन कर ले, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से स्थिर हो सकती हैं.

मिडिल ईस्ट का तनाव लाया भारत के लिए बड़ा मौका

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. हाल के दिनों में ईरान विवाद, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण मिडिल ईस्ट से आने वाली सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. इसके चलते सऊदी अरब से होने वाली सप्लाई घटकर 3.40 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई है. इस मुश्किल वक्त में भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी से अपना रुख वेनेजुएला की तरफ किया है.

आंकड़े पूरी कहानी बयां कर रहे

वेनेजुएला अपने 11.36 लाख बैरल के उत्पादन में से करीब 4 लाख बैरल खुद इस्तेमाल करता है. बाकी बचे 7.3 लाख बैरल के एक्सपोर्ट में से भारत अकेला 4.17 लाख बैरल (मई महीने का डेटा) खरीद रहा है. इसका सीधा मतलब है कि वेनेजुएला के कुल निर्यात का 55 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सीधे भारतीय बंदरगाहों पर उतर रहा है. कभी चीन इसका सबसे बड़ा खरीदार हुआ करता था, लेकिन चीन की सुस्ती का फायदा रिलायंस (Reliance), नयारा (Nayara) जैसी भारतीय कंपनियों ने उठाया है. ये रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी ‘मेइरी क्रूड’ (Merey Crude) को प्रोसेस करने में दुनिया में सबसे माहिर मानी जाती हैं.

ओएनजीसी का फंसा पैसा निकलेगा बाहर

भारत का दांव सिर्फ सस्ते तेल की खरीद तक सीमित नहीं है. यह रणनीतिक सुरक्षा का भी बड़ा मसला है. भारत की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी ओएनजीसी (ONGC Videsh) ने इस देश के ऑयल ब्लॉक्स में करोड़ों डॉलर का भारी-भरकम निवेश किया हुआ है. लंबे समय से अस्थिरता के कारण यह पैसा फंसा हुआ था. अब जैसे-जैसे वहां के हालात सुधर रहे हैं, भारत के इस निवेश की सुरक्षा की गारंटी भी पुख्ता हो रही है.

वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर भी यह देश भारत के लिए बेहद अहम है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का वेनेजुएला हमेशा से पुरजोर समर्थन करता रहा है. ऐसे में दोनों देशों की यह व्यापारिक साझेदारी एक मजबूत भू-राजनीतिक गठजोड़ की नींव रख रही है.

ऐसे सुलझेगा वैश्विक ऊर्जा संकट

दुनिया भर के देश इस वक्त सप्लाई चेन की दिक्कतों से जूझ रहे हैं. भारत ने अपनी नीति साफ कर दी है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहेगा. मई महीने में भारत का कुल तेल आयात 8% बढ़कर 49 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है. भारत ने जहां रूस से सबसे ज्यादा 19.83 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल लिया, वहीं यूएई को दूसरे नंबर पर रखा. अब वेनेजुएला मजबूती से तीसरे पायदान पर खड़ा है.

वेनेजुएला के मौजूदा आर्थिक संकट का समाधान भी उसके तेल उत्पादन की तेज बहाली में ही छिपा है. जैसे-जैसे प्रतिबंधों में ढील मिलेगी, विदेशी निवेश बढ़ेगा, यह देश वापस अपने चरम स्तर (30 लाख बैरल प्रतिदिन) की ओर बढ़ सकेगा. इससे न सिर्फ वेनेजुएला की चरमराई अर्थव्यवस्था दोबारा पटरी पर लौटेगी, बल्कि भारत जैसे विशाल उपभोक्ता देशों को एक सस्ता, भरोसेमंद ऊर्जा का स्रोत मिलता रहेगा.

वेनेजुएला के पास है ‘हैवी क्रूड ऑयल’

आम तौर पर कच्चा तेल पानी जैसा पतला होता है, जिसे पाइपलाइनों के जरिए आसानी से निकाला जा सकता है. इसके उलट, वेनेजुएला का ज्यादातर तेल ‘हैवी’ या ‘एक्स्ट्रा हैवी’ ग्रेड का है. यह तेल गुड़ के शीरे जैसा गाढ़ा, बेहद चिपचिपा होता है. यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के मुताबिक, इसमें सल्फर के साथ-साथ कई धातुओं की मात्रा काफी ज्यादा होती है. जब इस भारी तेल को रिफाइन किया जाता है, तो इसमें से बड़े पैमाने पर डीजल, जेट फ्यूल के साथ डामर (Asphalt) निकलता है. यही वजह है कि दुनियाभर के ट्रकों, समुद्री जहाजों, भारी मशीनरी को रफ्तार देने वाले डीजल के उत्पादन के लिए वेनेजुएला का क्रूड सबसे मुफीद माना जाता है.

एडीआई एनालिटिक्स (ADI Analytics) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी शेल ऑयल (Shale Oil) जैसा ‘हल्का क्रूड’ डीजल बनाने के मामले में इस भारी तेल के सामने कहीं नहीं टिकता. वेनेजुएला से तेल की सप्लाई तेज होने से ग्लोबल मार्केट में डीजल की कीमतें कम हो सकती हैं.

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