क्या आप अक्सर चाबियां रखकर भूल जाते हैं या काम के बीच में एकाग्रता कम हो जाती हैं? न्यूरोसाइंटिस्ट, यूसीएलए के प्रोफेसर और माइंडसेट कोच, “द अपवर्ड स्पाइरल” पुस्तक के लेखक Alex Korb ने बताया लोग दिमाग को बुढ़ापा तक तेज और सक्रिय रखने के लिए सुबह 5 बजे उठते हैं, एक्सरसाइज, मेडिटेशन और जर्नलिंग करते हैं। कुछ लोग अपने दिन को सबसे ज्यादा प्रोडक्टिव बनाने के लिए हर पल को ऑप्टिमाइज़ करने की कोशिश करते हैं। लोगों पर ये सब तरीके शायद काम भी आते हैं लेकिन मैं एक न्यूरोसाइंटिस्ट के रूप में कोई सख्त डेली रूटीन फॉलो नहीं करता।

एक्सपर्ट ने बताया अपनी डेली रूटीन को मुश्किल ढ़ांचे में फ्रेम करने से बेवजह का तनाव बढ़ता है जो आपको अपना गोल हासिल करने में कमजोर करता है। पिछले 20 सालों से न्यूरोसाइंटिस्ट के रूप में काम करने वाले Alex Korb अपने दिमाग को तेज करने के लिए और याददाश्त को मजबूत बनाने के लिए कुछ आसान रूटीन को अपनाते हैं, जिन्हें आप भी फॉलो करके अपने दिमाग को तेज कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि न्यूरोसाइंटिस्ट के कौन से छह टिप्स है जो ब्रेन बूस्टिंग साबित हो सकते हैं।
भारी वर्कआउट की बजाय नियमित मूवमेंट पर ध्यान देते हैं न्यूरोसाइंटिस्ट
शारीरिक गतिविधि का असर आपके दिमाग पर सकारात्मक पड़ता है, और इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत वाली एक्सरसाइज करना जरूरी नहीं है। एक्सपर्ट ने बताया वो सुबह नाश्ते से पहले करीब डेढ़ मिनट योग करते हैं और 20 पुश-अप्स करते हैं। एक्सपर्ट ने बताया जब उन्हें काम से ब्रेक चाहिए होता है तो वो 10 मिनट की वॉक पर चले जाते हैं। एक्सपर्ट ने अपनी रूटीन में जिन जरूरी कामों को गिनाया है उसमें किचन साफ करना, किराने का सामान उठाना या सीढ़ियां चढ़ना शामिल है। एक्सपर्ट ने बताया यह छोटी चीज़ें लग सकती हैं, लेकिन रिसर्च बताती है कि अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को भी महत्व देना आपकी सेहत और खुशी को बढ़ा सकता है।
मजेदार एक्टिविटी करती है ईंधन का काम
एक्सपर्ट ने बताया वो हर दिन कुछ ना कुछ ऐसा करते हैं जिससे उन्हें खुशी हासिल हो। उनकी मजेदार एक्टिविटी में गिटार बजाना, पढ़ना,पसंदीदा टीवी शो या फिल्म देखना शामिल है। एक्सपर्ट ऐसी एक्टिविटी चुनते हैं जो मजेदार हों और फिजिकल भी। एक्सपर्ट ने बताया मैं अपने कामों को अपना खेल बना लेता हूं जैसे पिकलबॉल खेलना, या फिर मैं 5 मिनट में कितना किचन साफ कर सकता हूं ऐसे मजेदार टास्क चुन लेता है। मजेदार गतिविधियां दिमाग के मोटिवेशन और रिवार्ड सिस्टम को सक्रिय करती हैं और स्ट्रेस हार्मोन को कम करती हैं, जिससे आपको बड़े लक्ष्यों के लिए ज्यादा एनर्जी मिलती है।
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मीनिंगफुल कामों को दें प्राथमिकता, चाहे मजेदार न हों
मीनिंगफुल काम वो होते हैं जो आपको किसी बड़े मकसद, आपके मूल्यों या रिश्तों से जोड़ते हैं। हर जरूरी काम मजेदार नहीं होता जैसे कंपनी बनाना, किताब लिखना या किसी की मदद करना, ये कभी-कभी मुश्किल और समय लेने वाला हो सकता हैं। लेकिन ऐसे काम आपको अंदर से संतुष्टि देते हैं और जिंदगी में उद्देश्य का एहसास कराते हैं। अगर जीवन में यह एहसास न हो, तो बाहर से सब ठीक होने के बावजूद आपका मन नहीं लगता और मोटिवेशन कम हो सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि कोशिश करें हर मुश्किल काम को किसी बड़े कारण से जोड़ें जैसे डेंटिस्ट के पास जाना ताकि आप स्वस्थ रह सकें और अपने परिवार के साथ समय बिता सकें, या ईमेल का जवाब देना ताकि आपके काम और क्लाइंट्स बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकें।
छोटी छोटी उपलब्धियों से लेता हूं मजा
अगर आप अपने जीवन में ज्यादा संतुष्टि चाहते हैं, तो छोटी जीतों को नजरअंदाज न करें। अगर आप सिर्फ अंतिम परिणाम पर ध्यान देंगे, तो दिमाग को जरूरी प्रेरणा नहीं मिल पाएगी। एक्सपर्ट ने बताया कि वो बड़े लक्ष्यों को छोटे हिस्सों में बांटते हैं, ताकि तरक्की का एहसास बना रहे। इसके लिए वो अक्सर पोमोडोरो तकनीक का इस्तेमाल करता हूं। न्यूरोसाइंटिस्ट ने कहा कि वो 25 मिनट काम करते हैं और फिर उस समय को पूरा करने पर खुद को एक चेकमार्क देते हैं चाहे काम पूरा हुआ हो या नहीं। एक्सपर्ट ने कहा कि दिन के अंत में, भले ही काम पूरा न हो, लेकिन मेरे पास कई पूरे किए गए छोटे लक्ष्य होते हैं, जो मुझे संतुष्टि देते हैं।
प्रोडक्टिव रहने के लिए लोगों से मिलना भी जरूरी
जब जिंदगी बहुत व्यस्त हो जाती है, तो हम सबसे पहले दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना कम कर देते हैं। लेकिन इंसान का लोगों के साथ जुड़ाव की जरूरत होता है। अपने करीबियों के साथ समय बिताने से मन खुश रहता है और तनाव भी कम होता है। इसलिए इस जरूरत को नजरअंदाज न करें। एक्सपर्ट कहते हैं कि जिन लोगों को आप पसंद करते हैं, उनसे मिलते-जुलते रहें और उनके साथ समय जरूर बिताएं।
खुद को आराम और रीसेट करने के लिए समय दें
कभी-कभी हमारे दिमाग को बस थोड़ा आराम चाहिए होता है। आजकल लोग लगातार काम करते रहने को ही सही मानते हैं और आराम को कमजोरी समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। जैसे खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आराम और नींद लेते हैं, वैसे ही हम सभी को भी ब्रेक की जरूरत होती है। यह समय बर्बाद करना नहीं, बल्कि खुद को फिर से ऊर्जा देने का जरूरी तरीका है।
डिस्क्लेमर :यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें दी गई सलाह जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य गाइडलाइन है, जिसे हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता। यह किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक या थेरेपी संबंधी सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आप तनाव, चिंता, डिप्रेशन या अन्य मानसिक/शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो योग्य डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।





