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बैंकिंग सेक्टर में ‘भारत’ का बोलबाला! सरकारी बैंकों ने FY26 में फिर गाड़े झंडे, मुनाफे की रफ्तार देख दुनिया हैरान

सरकारी बैंकों (पीएसबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.98 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है. वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि यह लगातार चौथा वर्ष है जब सरकारी बैंक मुनाफे में रहे हैं. आंकड़ों को देखें तो ​बीते वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों में हर एक सेकंड में 62 हजार रुपए से ज्यादा का प्रॉफिट कमाया है. जोकि एक रिकॉर्ड है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकारी बैंकों के प्रॉफिट को लेकर किस तरह की रिपोर्ट सामने आई है.

Khabar Monkey

बैंकिंग सेक्टर में ‘भारत’ का बोलबाला! सरकारी बैंकों ने FY26 में फिर गाड़े झंडे, मुनाफे की रफ्तार देख दुनिया हैरान
बैंकिंग सेक्टर में ‘भारत’ का बोलबाला! सरकारी बैंकों ने FY26 में फिर गाड़े झंडे, मुनाफे की रफ्तार देख दुनिया हैरान

सरकारी बैंकों को हुआ रिकॉर्ड प्रॉफिट

मंत्रालय के अनुसार, असेट्स की क्वालिटी में सुधार, ऋण के स्वस्थ विस्तार और आय में वृद्धि ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरकारी बैंकों की प्रॉफिटीबिलिटी में योगदान दिया. इस दौरान कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जबकि कुल शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 11.1 प्रतिशत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर रहा. सरकारी बैंकों का कुल कारोबार 31 मार्च, 2026 तक 283.3 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. कुल जमा राशि सालाना आधार पर 10.6 प्रतिशत बढ़कर 156.3 लाख करोड़ रुपये रही, जो जमाकर्ताओं के निरंतर भरोसे और बैंकों द्वारा मजबूत संसाधन जुटाने का परिणाम है.

इस वजह से हुआ प्रॉफिट

कुल ऋण में सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 127 लाख करोड़ रुपये रहा. यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ऋण की निरंतर मांग का संकेत है. मंत्रालय ने बयान में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मजबूत वित्तीय प्रदर्शन जारी रखा, जो निरंतर व्यापार वृद्धि, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, रिकॉर्ड लाभप्रदता और मजबूत पूंजी की स्थिति को दर्शाता है. मंत्रालय ने आगे कहा कि यह बेहतर प्रदर्शन तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में इन बैंकों की स्थिरता और बढ़ी हुई संस्थागत क्षमता को सिद्ध करता है.

एनपीए में भी ​बड़ी गिरावट

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरकारी बैंको की एसेट क्वालिटी में काफी सुधार हुआ. 31 मार्च, 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स रेश्यो घटकर 1.93 प्रतिशत और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स रेश्यो 0.39 फीसदी रह गया, जो स्ट्रेस्ड एसेट्स के ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर को दर्शाता है. इसके अलावा, मंत्रालय ने बताया कि हर सरकारी बैंक ने 90 फीसदी से ज्यादा का प्रोविजनिंग कवरेज रेश्यो बनाए रखा, जो समझदारी भरी प्रोविजनिंग प्रथाओं, बेहतर अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड, प्रभावी रिस्क मैनेज्मेंट मैकेनिज्म और मजबूत बैलेंस शीट लचीलेपन का संकेत है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान नए स्लिपेज में गिरावट जारी रही, और स्लिपेज रेश्यो घटकर 0.7 प्रतिशत रह गया. कुल रिकवरी, जिसमें राइट-ऑफ किए गए खातों से हुई रिकवरी भी शामिल है, 86,971 करोड़ रुपए रही, जो सरकारी बैंकों में बेहतर रिकवरी तंत्र और बेहतर क्रेडिट अनुशासन को दर्शाती है.

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