Wednesday, April 22, 2026
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बंगाल चुनाव प्रचार में कंगना ने पहनी जामदानी साड़ी, जान लें इसका वहां से कनेक्शन और खासियत

कंगना रनौत को को न सिर्फ कमाल की एक्टिंग बल्कि उनके ग्रेसफुल स्टाइल के लिए भी जाना जाता है. बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना बीजेपी से हिमाचल के मंडी की सांसद भी हैं. वह भी बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए पहुंचीं और इस दौरान वह जामदानी साड़ी में दिखाई दीं. उन्होंने सफेद कलर की साड़ी वियर की थी, जिसमें उनका लुक एलिगेंट और क्लासी रहा जो ऑफिशियल इवेंट के हिसाब से बिल्कुल परफेक्ट था. दरअसल जामदानी साड़ी का बंगाल से कनेक्शन है और ये हाथ से तैयार की जाती है. इसमें काफी डिटेलिंग होती है. तो चलिए जान लेते हैं इसके बारे में.

बंगाल चुनाव प्रचार में कंगना ने पहनी जामदानी साड़ी, जान लें इसका वहां से कनेक्शन और खासियत
बंगाल चुनाव प्रचार में कंगना ने पहनी जामदानी साड़ी, जान लें इसका वहां से कनेक्शन और खासियत

कंगना रनौत का बेबाक अंदाज और हर स्टाइल खूब सुर्खियों में रहता है. वेस्टर्न के अलावा पारंपरिक फैशन में भी उनका जवाब नहीं है. हाल ही में कंगना संसद के बाहर 800 साल पुरानी विरासत वाली साड़ी में नजर आई थीं. उन्होंने कोडाली करुप्पुर साड़ी वियर की थी, जिसने सबका ध्यान खींच लिया था तो वहीं अब वह जामदानी साड़ी में नजर आई हैं.

बंगाल से साड़ी का कनेक्शन

दरअसल जामदानी साड़ी पश्चिम बंगाल में बनने वाली पारंपरिक साड़ी है. ये खासतौर पर यहां के शांतिपुर, मुर्शिदाबाद और नदिया में बनाई जाती है. हाथों से बनी इस साड़ी में सदियों पुरानी कला को कुशल कारीगरों द्वारा उकेरा जाता है. तो चलिए जान लेते हैं इस साड़ी की खासियत.

गर्मी के लिए है बेहतरीन

पारंपरिक जामदानी साड़ी के लिए मलमल का कपड़ा यूज किया जाता है और इसलिए ये गर्मी के हिसाब से काफी आरामदायक रहती है. देखने में ये शीर टच वाली यानी महीन होती हैं और सादगी भरा सिंपल-सोबर लुक देती हैं. ये पहनने में भी बहुत हल्की होती है. कंगना रनौत ने वाइट कलर की साड़ी वियर की है, जिस पर मैचिंग धागों से खूबसूरत फ्लोइंग वाइन पैटर्न, लीफ मोटिफ, जियोमेट्रिक पैटर्न बने हैं.

Image: kanganaranaut

क्यों खास है जामदानी साड़ी?

जामदानी साड़ी को हथकरघे पर बुना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है इस पर बनाए गए जटिल रूपांकन (Motifs). ये बुनाई के दौरान ही धागों से बनाए जाते हैं. साड़ी के डिजाइन के ऊपर निर्भर करता है कि ये कितने दिनों में बनेगी. एक हाथ से बुनी जाने वाली मलमल की जामदानी साड़ी को बनाने में तकरीबन 1 महीने का वक्त लग सकता है. इन साड़ियों की सुंदरता है एक बैलेंस कलर कॉम्बिनेशन, हल्का ट्रांसपेरेंट कपड़ा और इसपर बने एलिगेंट नेचर इंस्पायर पैटर्न्स.

पुराना है इतिहास

जामदानी साड़ियों की हिस्ट्री भी रिच है. इसका इतिहास 2 हजार साल पुराना माना जाता है. एक टाइम पर इसे “ढकाई मलमल” के नाम से भी जानते थे. ये एक ऐसा कपड़ा होता था, जो राजपरिवारों के बीच बहुत पॉपुलर था और इसे लग्जरी सिंबल मानते थे. इन साड़ियों का व्यापार भी किया जाता था. जामदानी साड़ियां विश्व स्तर पर भी पसंद की जाती हैं और भारत के हथकरघा विरासत में बेहद खास जगह रखती हैं. मुगल काल के दौरान जामदानी साड़ी अपने पीक पर थीं. इस दौरान शाही फैमिली में जटिल रूपांकनों के कपड़े खूब बनवाए जाते थे. ये पीढ़ियों से चली आ रही कला है, जिसमें न सिर्फ कारीगरी होती है, बल्कि एक खूबसूरत साड़ी के पीछे बहुत ज्यादा मेहनत लगी होती है.

कैसे बनती हैं ये साड़ी?

जामदानी साड़ी को इसकी सॉफ्टनेस के लिए जाना जाता है. इस मुलायम टेक्स्चर के लिए सबसे पहले सूती धागों को चुना जाता है और बहुत सावधानी के साथ इसे प्रोसेस करते हैं. इसके बाद पैटर्न ग्राफ पेपर बनता हैं. इसे भी कारीगर हाथों से ही तैयार करते हैं.करघे में ताने के धागों को कसा जाता है. इसमें भी काफी ज्यादा समय जाता है. इसके बाद बांस की छड़ियों का यूज करके ताने में धागे डालकर आकृतियों को बुना जाता है. यही वजह है कि सेम डिजाइन बनाने पर भी दो जामदानी साड़ियां बिल्कुल एक जैसी नहीं हो सकती हैं.

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