बीजेपी की मोहनलालगंज से दलित विधायक जय देवी ने मंदिर प्रशासन पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है. इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी का बयान सामने आया है. समाजवादी पार्टी ने जातिगत भेदभाव की कड़ी आलोचना की है. समजावादी पार्टी ने कहा,” इस घटना ने राज्य सरकार के तहत फैली जातिगत भेदभाव की मानसिकता को सबके सामने ला दिया है.”

जय देवी ने मंदिर प्रशासन पर आरोप लगाया है कि मंदिर के जीर्णोद्धार का एक कार्यक्रम था. उसके लिए भूमि पूजन और शिलान्यास समारोह के दौरान उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि बुधवार को वहां हुए अनुष्ठान के दौरान उन्हें न तो ईंट छूने दी गई, न ही अगरबत्ती जलाने दी गई और न ही नारियल फोड़ने दिया गया.
‘बंटेंगे तो कटेंगे कहने वालों की यही एकजुटता है?’
समाजवादी पार्टी की ‘बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी’ के राष्ट्रीय महासचिव रामबाबू सुदर्शन ने इस घटना को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया. रामबाबू ने कहा, “राज्य की राजधानी में और बीजेपी सरकार के 9 साल बाद ऐसी घटना का होना यूपी में जातिगत भेदभाव के हालात को दिखा रहा है. इस घटना ने जातिगत भेदभाव पर बीजेपी के रुख को साबित कर दिया है. ये आरोप बीजेपी की ही मौजूदा दलित विधायक ने लगाए हैं, जो दो बार बीजेपी सांसद रहे और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कौशल किशोर की पत्नी हैं. अगर ये किसी दूसरी पार्टी की विधायक होतीं, तो बीजेपी की ट्रोल आर्मी इस पूरी घटना को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती.”
सुदर्शन ने कहा, ” ये घटना न केवल मौजूदा दलित विधायक की दुर्दशा को जाहिर करती है, बल्कि राज्य और देश के करोड़ों दलितों की भावनाओं और जज्बातों को भी दिखाने के लिए काफी है. बीजेपी और आरएसएस ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ जैसे नारों के साथ हिंदुओं को एकजुट करने की बात करते हैं. क्या बीजेपी इसी तरह हिंदुओं को एकजुट करना चाहती है? ऐसी घटनाएं सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या बीजेपी दलितों को हिंदू मानती भी है या नहीं?”