हर साल 1 से 7 अगस्त तक ब्रेस्टफीडिंग वीक चलता है. बच्चों को दूध पिलाने से जुड़ी जरूरी जानकारियों के प्रति जागरूक करने के लिए ये हफ्ता मनाया जाता है. मां का दूध बच्चे के लिए एक स्ट्रॉन्ग इम्यून सिस्टम की तरह काम करता है. इससे शिशु को कई जरूरी तत्व मिलते हैं. लेकिन कई माएं बच्चे को दूध पिलाने में कई गलतियां करती हैं. इसमें एक फीड कराते वक्त मोबाइल का यूज भी शामिल है.

मोबाइल में रील्स या दूसरे चीजों को इस्तेमाल करने की लत लोगों को इस कदर लग गई है कि इसे चाहकर भी नजरअंदाज करना मुश्किल होता है. रील्स को देखने में लोग घंटों बर्बाद कर देते हैं. इस आदत का मां और बच्चे पर क्या असर पड़ता है चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं…
डॉक्टर डी के गुप्ता का कहना है कि आदत के रूप में मोबाइल चलाते हुए बच्चे को दूध पिलाना सही नहीं माना जाता. कभीकभार जरूरी स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन नियमित रूप से ऐसा करने से मां और शिशु दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
मां पर क्या असर पड़ता है?
आई कॉन्टैक्ट कम हो जाता है दूध पिलाते समय मां का ध्यान स्क्रीन पर होने से बच्चे से भावनात्मक जुड़ाव कम हो सकता है.
बच्चे के संकेत छूट सकते हैं बच्चा कब भूखा है, कब पेट भर गया, या कब उसे डकार दिलानी है, ये संकेत नजरअंदाज हो सकते हैं.
स्तनपान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है सही लैचिंग और पोजीशन पर ध्यान कम होने से निप्पल में दर्द, दूध कम निकलने की समस्या या स्तनपान में कठिनाई हो सकती है.
मानसिक तनाव बढ़ सकता है यदि स्क्रीन पर तनावपूर्ण या उत्तेजक कंटेंट देखा जा रहा हो, तो मां की रिलैक्स अवस्था प्रभावित हो सकती है.
शिशु पर क्या असर पड़ता है?
बॉन्डिंग कम हो सकती है दूध पिलाते समय मां की आवाज, मुस्कान और आंखों का संपर्क शिशु के भावनात्मक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
संकेतों का कम जवाब मिलना अगर बच्चा असहज हो, दूध रोकना चाहे या संपर्क बनाना चाहे, तो उसकी प्रतिक्रिया देर से मिल सकती है.
अधिक या कम दूध पीने का जोखिम ध्यान भटकने से फीडिंग जरूरत के अनुसार न होकर आदत के अनुसार लंबी या छोटी हो सकती है.
भाषा और सामाजिक विकास पर अप्रत्यक्ष प्रभाव शुरुआती महीनों में serve and return मस्तिष्क के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है.
क्या करें?
दूध पिलाने के दौरान मोबाइल को साइलेंट या दूर रखें.
बच्चे से आई कॉन्टैक्ट, मुस्कुराहट और हल्की बातचीत करें.
अगर लंबी फीडिंग के दौरान बहुत जरूरी कॉल हो, तो उसे संक्षिप्त रखें और प्राथमिकता बच्चे पर ही दें.
रात में रोशनी कम रखें और स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें यदि फोन का उपयोग बिल्कुल आवश्यक हो.