Greater Noida: उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अरिहंत आर्डेन सोसायटी में साइबर उत्पीड़न का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां रहने वाली पूजा सिन्हा का आरोप है कि उनका परिवार पिछले ढाई महीने से फर्जी ऑनलाइन ऑर्डर, अनचाहे फोन कॉल और वित्तीय धोखाधड़ी से परेशान है. स्थिति ऐसी हो गई है कि परिवार को अपने ही घर में कैद जैसी जिंदगी जीने को मजबूर होना पड़ रहा है.

पूजा सिन्हा के मुताबिक, उनके फ्लैट पर रोजाना करीब 20 डिलीवरी एजेंट ऐसे सामान और खाने के ऑर्डर लेकर पहुंचते हैं, जिन्हें परिवार ने बुक नहीं किया होता. ऑर्डर लेने से इनकार करने पर कई बार डिलीवरी एजेंटों के साथ बहस और हंगामे की स्थिति बन जाती है. परिवार का कहना है कि यह सिलसिला पिछले ढाई महीने से जारी है और इससे उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है.
पीड़ित परिवार के अनुसार, उन्होंने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए अपना मोबाइल फोन और सिम कार्ड तक बदल दिया, लेकिन इसके बावजूद फर्जी ऑर्डर और संदिग्ध कॉल आने बंद नहीं हुए. परिवार ने अमेजन पे से बिना अनुमति पैसे कटने और संदिग्ध बुकिंग होने का आरोप भी लगाया है.
नोएडा से बाहर जाने पर भी नहीं मिली राहत
पूजा का कहना है कि परिवार जब नोएडा से बाहर गया, तब भी उनके नाम से फर्जी ऑर्डर पहुंचने लगे. इससे उन्हें आशंका है कि कोई उनकी निजी जानकारी का दुरुपयोग कर रहा है. सोसाइटी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. परिवार जानना चाहता है कि आखिर फर्जी ऑर्डर के जरिए डिलीवरी एजेंटों का उनके फ्लैट तक पहुंचना कैसे जारी है.
घर में छोटे बच्चे और बुजुर्ग
पूजा के परिवार में पांच और 13 साल के दो बच्चे हैं. उनके बुजुर्ग ससुर डायलिसिस पर हैं. परिवार का आरोप है कि लगातार होने वाली इस परेशानी, अनचाहे कॉल और धमकियों के कारण घर में डर का माहौल बना हुआ है. परिवार को संदेह है कि उनकी निजी जानकारियों का इस्तेमाल कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि, इसके पीछे कौन है, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
पुलिस और साइबर सेल से कार्रवाई की मांग
परिवार ने सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस, नोएडा पुलिस और साइबर दोस्त से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. स्थानीय पुलिस और साइबर सेल मामले की तकनीकी जांच कर रहे हैं. संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से भी जानकारी जुटाने के लिए ईमेल भेजे जाने की बात कही गई है. फिलहाल, परिवार को जांच पूरी होने और आरोपों की पुष्टि होने का इंतजार है. पीड़ित परिवार ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर इस डिजिटल उत्पीड़न से राहत दिलाने की मांग की है.