
- ममता सहित गैर भाजपाई दलों ने खोला मोर्चा
- टीएमसी प्रत्याशियों को धमकाने का आरोप
नई दिल्ली/लखनऊ! कोलकाता पश्चिमी बंगाल चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले, उत्तर प्रदेश के चर्चित श्एनकाउंटर स्पेशलिस्टश् और वर्तमान में प्रयागराज के डीआईजी, आईपीएस अजय पाल शर्मा की बंगाल में मौजूदगी ने सियासी पारा गरमा दिया है। अपनी दबंग कार्यशैली के लिए मशहूर शर्मा के एक वायरल वीडियो और उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहुंची याचिका ने इस चुनावी लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है। कल के मतदान में उनके खिलाफ ममता बनर्जी सहित पूरे गैर भाजपाई दलों ने खुलकर जहर उगला और चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया।
1. कार्यशैली पर विवाद! बदमाशी की तो खैर नहीं
डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली फालटा विधानसभा में तैनात अजय पाल शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वे टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के समर्थकों और परिजनों को सख्त लहजे में चेतावनी देते दिख रहे हैं। उन्होंने कहाकृ ष्अगर मतदाताओं को डराया या बदमाशी की, तो सख्त कार्रवाई होगी।
जहाँ भाजपा ने इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक ष्साहसी कदमष् बताया है, वहीं टीएमसी ने इसे केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग और मतदाताओं को डराने की कोशिश करार दिया है।
2. पुराने मुकदमों और विजिलेंस जांच का साया
विपक्ष (खासकर टीएमसी और समाजवादी पार्टी) ने अजय पाल शर्मा की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उनके विरोध में तर्क दिया जा रहा है कि जिन अधिकारी पर उत्तर प्रदेश में खुद भ्रष्टाचार के मुकदमे और विजिलेंस जांच चल रही है, उन्हें श्पुलिस ऑब्जर्वरश् जैसा महत्वपूर्ण पद कैसे दिया गया?
मेरठ मामला- उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मेरठ में दर्ज मुकदमों का हवाला दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकारू अजय पाल शर्मा को ऑब्जर्वर पद से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक श्अर्जेन्टश् याचिका भी दाखिल की गई है, जिसमें उन पर श्पक्षपातीश् होने का आरोप लगाया गया है।
3. टीएमसी की चेतावनी और सियासी संग्राम
टीएमसी प्रवक्ताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ष्वे यूपी के अधिकारी हैं, बंगाल की जनता को डराने की कोशिश न करें।ष् दूसरी तरफ, चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि अजय पाल शर्मा को उन क्षेत्रों में भेजा गया है जहाँ से वोटरों को धमकाने और आईडी कार्ड छीनने की शिकायतें मिली थीं।
4. व्यवहार को लेकर दोफाड़ राय
समर्थक- उन्हें एक ऐसा अधिकारी मानते हैं जो कानून-व्यवस्था के लिए किसी भी दबाव में नहीं आता।
टालोचक- उनकी कार्यशैली को ष्च्ंतंससमस डंहपेजतंजमष् (समानांतर मजिस्ट्रेट) जैसा बताते हुए आरोप लगाते हैं कि वे अपनी शक्तियों का अतिक्रमण करते हैं।
निष्कष-
आज यानी 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के दौरान, सबकी निगाहें दक्षिण 24 परगना पर टिकी हैं। अजय पाल शर्मा की मौजूदगी ने चुनाव को सिटिंग सीएम बनाम सिंघम स्टाइल पुलिसिंग की लड़ाई बना दिया है। अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और चुनाव आयोग इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है।





