Delhi Yamuna River: दिल्ली से हलक सुखाने वाली खबर आ गई है. राजधानी में यमुना का पानी सूख चुका है. पूरी नदी में रेत के टीले दिखाई दे रहे हैं. यमुना में जलस्तर करीब 5 फुट नीचे चल रहा है. लिहाजा कभी उफान में बहने वाली नदी को अब लोग पैदल चलकर ही पार कर रहे हैं. यमुना नदी का ये बिहंगम नजारा न्यूज18 इंडिया की टीम ने वजीराबाद पहुंचकर अपने कैमरों में कैद किया है.

यमुना नदी की ये हालत दिल्ली में घोर संकट के संकेतों की ओर इशारा कर रही है. आने वाले दिनों में राजधानी में पानी की जबर्दस्त कमी हो सकती है और दिल्लीवासियों के सामने प्यास बुझाने का संकट पैदा हो सकता है. इस बार अल-नीनो की वजह से मॉनसून कम रहने की भी आशंका जताई गई है, ऐसे में यमुना के पानी का सूखना दोहरी और गहरी मार की तरह है.
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यमुना में पानी लगभग सूख चुका है. यमुना का जल स्तर तकरीबन पांच मीटर नीचे चल रहा है. वजीराबाद के बांध के नीचे पानी ही नहीं है सिर्फ मिट्टी और रेत है. टीम ने देखा कि यमुना का पानी इसके नीचे पहुंच ही नहीं पा रहा है. यह हाल हरियाणा से दिल्ली की तरफ आने वाली यमुना का है.जिस तरफ से यमुना में आता है.
वजीराबाद में यमुना में पानी इतना कम है कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुचने के लिए नहर बनानी पड़ रही है. वजीराबाद प्लांट में पानी पहुंचाने के लिए यमुना से ही काटकर एक नहर बनायी गई है जो पानी सीधे वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में भेज रही है. फिलहाल यहां जेसीबी से गाद हटाने का काम चल रहा है.
यमुना में पानी नहीं रेत के टीले
बांध के दूसरी तरफ का हाल और भी खराब है. जहां पानी की जगह रेत ही रेत है. पानी इतना कम है कि कोई पैदल चलकर ही कोई यमुना पार कर लें. आसपास के लोगों ने बताया कि यहां लगातार जलस्तर में गिरावट देखने को मिल रही है. अब तो हालात और भी खराब हो चुके हैं.
जलस्तर में लगातार गिरावट
स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले 7-10 दिनों से यमुना का जलस्तर लगातार घट रहा है. नदी के बीच तक पैदल जाया जा सकता है. वजीराबाद बैराज के पास अब दो खुदाई मशीनें (एक्सकेवेटर) लगाई गई हैं ताकि पानी को नदी की धारा से मोड़कर जल शोधन संयंत्रों (WTP) तक पहुंचाया जा सके. वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्र दिल्ली के दो सबसे बड़े प्लांट हैं, जहां से राजधानी के बड़े हिस्से को पानी सप्लाई होता है. वजीराबाद बैराज वह मुख्य स्थान है जहां से इन संयंत्रों के लिए कच्चा पानी लिया जाता है.
सामान्य स्तर से काफी नीचे पहुंचा पानी
डीजेबी अधिकारियों के मुताबिक, बैराज पर पानी का स्तर सामान्य 674.5 फीट के मुकाबले घटकर 669.5 फीट से भी नीचे पहुंच गया है. यानी पानी लगभग पांच फीट कम हो चुका है. अगर जल स्तर और गिरा, तो पानी को प्लांट तक पहुंचाने के लिए नावों पर पंप लगाने पड़ सकते हैं. अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल पानी को मुंडका और हैदरपुर नहर से मोड़कर प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अगर जलस्तर और घटा तो वजीराबाद प्लांट बंद भी करना पड़ सकता है.
दिल्ली की बढ़ती मांग और घटती आपूर्ति
यमुना के इस हाल से दिल्ली में पानी की सप्लाई ठप पड़ सकती है और पानी के लिए हाहाकार मच सकता है. दिल्ली जल बोर्ड रोजाना लगभग 1000 मिलियन गैलन पानी सप्लाई करता है, जबकि शहर की जरूरत लगभग 1250 मिलियन गैलन प्रतिदिन की है. यानी पहले से ही लगभग 250 मिलियन गैलन की कमी बनी हुई है. गर्मियों में पानी की मांग और बढ़ जाती है, जिससे संकट गंभीर हो गया है.
वजीराबाद जल शोधन संयंत्र की क्षमता 110 MGD (मिलियन गैलन प्रतिदिन) है और यह उत्तरी तथा मध्य दिल्ली के हिस्सों को पानी देता है. वहीं चंद्रावल संयंत्र की क्षमता 90 MGD है, जो उत्तर, पश्चिम, मध्य और उत्तर दिल्ली के इलाकों में पानी पहुंचाता है. अभी दोनों संयंत्र अपनी क्षमता से 15-40 प्रतिशत कम पर काम कर रहे हैं.
किन इलाकों में असर
डीजेबी की कुल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इन दो प्रभावित संयंत्रों से आता है. इसलिए उत्तर, मध्य और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कई इलाकों में पानी का दबाव कम हो गया है. कई कॉलोनियों में लोगों को पानी नहीं मिल रहा और टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. कई इलाकों में पानी की किल्लत से लोगों का गर्मी के मौसम में जीना मुहाल हो गया है. हालांकि आगे इस संकट के और गहराने की आशंका है.





