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डॉक्टर ने बताया इन 10 गलतियों की वजह से घुटनों में बढ़ रहा है गैप और दर्द, तुरंत करें सुधार तो बच सकते हैं घुटने

उम्र बढ़ने के साथ घुटनों में दर्द होना आम बात मानी जाती थी, लेकिन आजकल कम उम्र में ही लोग ‘नी-गैप’ (Knee Gap) और जोड़ों के दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं। आजकल 25 से 40 साल की उम्र में ही लोग “नी-गैप” (Knee Gap), जॉइंट पेन और स्टिफनेस जैसी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बदलता लाइफस्टाइल और शरीर की अनदेखी है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, एक्सरसाइज की कमी,पोषक तत्वों की कमी, गलत जूतों का इस्तेमाल, जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज और गलत पोस्टर में बैठना घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे घुटनों के बीच का कार्टिलेज (cartilage) धीरे-धीरे घिसने लगता है, जिसे आम भाषा में नी-गैप कहा जाता है। यह स्थिति आगे चलकर ऑस्टियोआर्थराइटिस का कारण बन सकती है।

डॉक्टर ने बताया इन 10 गलतियों की वजह से घुटनों में बढ़ रहा है गैप और दर्द, तुरंत करें सुधार तो बच सकते हैं घुटने
डॉक्टर ने बताया इन 10 गलतियों की वजह से घुटनों में बढ़ रहा है गैप और दर्द, तुरंत करें सुधार तो बच सकते हैं घुटने

एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झांजेर के मुताबिक आपकी रोजमर्रा की कुछ छोटी गलतियां घुटनों की कार्टिलेज को समय से पहले घिस देती हैं, जिससे नौबत सर्जरी तक आ जाती है। आप इन बड़ी गलतियों को सुधार कर दर्द से राहत पा सकते हैं, बल्कि अपने घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कौन सी गलतियां कार्टिलेज को घिसती है।

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बिना कारण कैल्शियम और विटामिन D लेना

कई लोग जॉइंट पेन होते ही कैल्शियम और विटामिन D लेना शुरू कर देते हैं, जबकि ये सिर्फ हड्डियों की कमजोरी (Bone Density) में ज्यादा काम आते हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस में कार्टिलेज के घिसने की समस्या होती है, जिसे ये सप्लीमेंट ठीक नहीं कर पाते। ये गलती आपकी हड्डियों की परेशानी को बढ़ा सकती है।

बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट शुरू करना

जॉइंट, मसल्स या बोन के लिए कोई भी सप्लीमेंट बिना एक्सपर्ट की सलाह के लेना नुकसानदायक हो सकता है। सही जांच और जरूरत के अनुसार ही सप्लीमेंट लेना चाहिए।

दर्द में तुरंत पेनकिलर लेना

कुछ लोग दर्द होते ही पेन किलर लेने लगते हैं, लेकिन इनका ज्यादा इस्तेमाल पेट, किडनी और दिल पर बुरा असर डाल सकता है। यह लंबे समय में सूजन भी बढ़ा सकते हैं।

फिजियोथेरेपी और सही ट्रीटमेंट को नजरअंदाज करना

जॉइंट पेन में लोग सही इलाज जैसे फिजियोथेरेपी, पोस्चर करेक्शन और रिहैबिलिटेशन को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यही असली समाधान है।

जांच (Diagnosis) में देरी करना

दर्द शुरू होने पर जांच नहीं कराना एक बड़ी गलती है। समय पर एक्स-रे या अन्य जांच से पता चल सकता है कि आर्थराइटिस किस स्टेज में है और इलाज आसान हो सकता है।

ज्यादा वजन को नजरअंदाज करना

वजन बढ़ने से घुटनों और स्पाइन पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे जॉइंट जल्दी खराब होते हैं और दर्द बढ़ता है। इसलिए वजन को कंट्रोल करें। वजन कंट्रोल करने के लिए कैलोरी का सेवन कंट्रोल करें। रात का खाना कम खाएं, खाने में दाल, साबुत अनाज और फलों का सेवन करें। रात में ज्यादा और भारी खाना बंद करें। लेट नाइट और हैवी डिनर से वजन तेजी से बढ़ता है, जो खासकर घुटनों के अर्थराइटिस और कमर दर्द को बढ़ा सकता है।

एक्सरसाइज बिल्कुल न करना या जरूरत से ज्यादा करना

बिल्कुल एक्सरसाइज न करना जॉइंट्स को कमजोर करता है। वहीं जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना जॉइंट्स को नुकसान पहुंचा सकता है,इसलिए बैलेंस बहुत जरूरी है।

एक ही पोश्चर में लंबे समय तक बैठे रहना

लगातार एक ही पोजिशन में बैठने से खासकर बैक पेन और स्पाइन से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। हड्डियों के दर्द से बचाव करने के लिए आप अपने पॉश्चर में सुधार करें।

पानी कम पीना भी है सेहत के लिए खतरा

शरीर में पानी की कमी से जॉइंट्स का कार्टिलेज जल्दी खराब होता है, क्योंकि इसमें मौजूद लिक्विड शॉक एब्जॉर्बर का काम करता है।

फिजिकल एक्टिविटी की कमी

खासतौर पर उम्र बढ़ने के साथ एक्टिव न रहना जॉइंट्स को जाम और कमजोर बना देता है, जिससे दर्द और स्टिफनेस बढ़ती है।

बचाव के लिए क्या करें?

  • शरीर का बढ़ा हुआ वजन खासकर घुटनों और रीढ़ (spine) पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे जॉइंट जल्दी घिसते हैं और दर्द बढ़ता है। इसलिए संतुलित आहार और एक्टिव लाइफस्टाइल के जरिए वजन को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है।
  • बैलेंस्ड डाइट लें। डाइट में सब्जियां, दाल, होल ग्रेन्स शामिल करें। हरी सब्जियां, दालें, फल और साबुत अनाज शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर देते हैं, जो हड्डियों और जॉइंट्स को मजबूत रखने में मदद करते हैं और सूजन को भी कम करते हैं।
  • रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या साइकिलिंग करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जॉइंट्स पर दबाव कम पड़ता है। ध्यान रखें कि एक्सरसाइज न तो बहुत कम हो और न ही जरूरत से ज्यादा। योग और स्ट्रेचिंग करने से जॉइंट्स की लचक (flexibility) बढ़ती है, स्टिफनेस कम होती है और शरीर की मूवमेंट बेहतर होती है, जिससे दर्द में राहत मिलती है।
  • लंबे समय तक गलत तरीके से बैठना या खड़ा रहना रीढ़ और जॉइंट्स पर असर डालता है। सही पोस्चर अपनाने से बैक पेन और स्पाइन से जुड़ी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
  • शरीर में पानी की कमी से जॉइंट्स का कार्टिलेज सूखने लगता है, जिससे घर्षण और दर्द बढ़ सकता है। पर्याप्त पानी पीने से जॉइंट्स लुब्रिकेटेड रहते हैं और उनकी कार्यक्षमता बनी रहती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख चिकित्सा विशेषज्ञों के सुझावों पर आधारित है। घुटनों में गैप या दर्द के लक्षण दिखने पर स्व-उपचार (Self-medication) के बजाय तुरंत किसी अनुभवी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराएं। व्यायाम और आहार में बदलाव डॉक्टर की देखरेख में ही करें। 

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