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डैशबोर्ड पर स्क्रीन ही स्क्रीन, फिर भी पैसेंजर डिस्प्ले क्यों नहीं भा रहा? सिर्फ 6% लोग कर रहे इस्तेमाल​

आजकल नई कारों का इंटीरियर पहले से कहीं ज्यादा हाईटेक हो गया है. डैशबोर्ड पर बड़ीबड़ी स्क्रीन, डिजिटल मीटर और अलगअलग डिस्प्ले अब आम होते जा रहे हैं. खासकर प्रीमियम कारों में तो एक ही डैशबोर्ड पर तीन स्क्रीन तक देखने को मिल रही हैं. लेकिन क्या ज्यादा स्क्रीन का मतलब बेहतर कार टेक्नोलॉजी है? […]

आजकल नई कारों का इंटीरियर पहले से कहीं ज्यादा हाईटेक हो गया है. डैशबोर्ड पर बड़ीबड़ी स्क्रीन, डिजिटल मीटर और अलगअलग डिस्प्ले अब आम होते जा रहे हैं. खासकर प्रीमियम कारों में तो एक ही डैशबोर्ड पर तीन स्क्रीन तक देखने को मिल रही हैं. लेकिन क्या ज्यादा स्क्रीन का मतलब बेहतर कार टेक्नोलॉजी है? जरूरी नहीं.

जेडी पावर की 2026 यूएस टेक्नोलॉजी एक्सपीरियंस इंडेक्स स्टडी में सामने आया है कि ऐसी टेक्नोलॉजी जो बिना ज्यादा मेहनत के चुपचाप अपना काम करती रहती है, वह कई बार बड़ी स्क्रीन और ज्यादा फीचर्स वाले सिस्टम से अच्छा काम करती है.

तीन स्क्रीन वाली कारों का चलन बढ़ा

आज की कई नई कारों में दी जा रही हैं. इनमें पहली स्क्रीन ड्राइवर के सामने डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर की होती है. दूसरी बीच में इंफोटेनमेंट सिस्टम के लिए टचस्क्रीन होती है, जबकि तीसरी स्क्रीन सामने बैठे यात्री के लिए दी जाती है. पैसेंजर डिस्प्ले खासकर प्रीमियम कारों में तेजी से लोकप्रिय हुआ है. इस स्क्रीन पर यात्री एंटरटेनमेंट या दूसरी चीजों का इस्तेमाल कर सकता है, जबकि ड्राइवर का ध्यान सड़क पर रहता है.लेकिन यहां एक दिलचस्प बात सामने आई है.

जेडी पावर की स्टडी में पैसेंजर डिस्प्ले को सबसे ज्यादा परेशानी देने वाली कार टेक्नोलॉजी में शामिल किया गया. इस फीचर में हर 100 कारों पर करीब 21.3 समस्याएं दर्ज की गईं.यानी फीचर देखने में भले ही शानदार लगे, लेकिन इस्तेमाल के दौरान यह मालिकों के लिए हमेशा आसान नहीं रहा.

पैसेंजर स्क्रीन वाली कारों में इंफोटेनमेंट की परेशानी भी ज्यादा

स्टडी में यह भी पता चला कि वाली कुछ कारों में इंफोटेनमेंट से जुड़ी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलीं. जेडी पावर की 2026 यूएस इनिशियल क्वालिटी स्टडी में भी ऐसे कुछ वाहनों में इंफोटेनमेंट से जुड़ी समस्याओं की दर ज्यादा दर्ज की गई. इससे एक सवाल जरूर उठता है क्या कार में हर नए फीचर को जोड़ना जरूरी है, या फिर वही टेक्नोलॉजी बेहतर है जो इस्तेमाल में आसान हो?

आसानी से काम करने वाली टेक्नोलॉजी ने मारी बाजी

इस स्टडी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाली कुछ टेक्नोलॉजी ऐसी हैं, जिन पर ड्राइविंग के दौरान शायद ही किसी का ध्यान जाता है. इनमें स्मार्ट इग्निशन सबसे आगे रहा. हर 100 कारों में इसमें सिर्फ 2.4 समस्याएं दर्ज की गईं. इसके अलावा स्मार्ट क्लाइमेट कंट्रोल और ऑटोमैटिक ड्राइवर प्रेफरेंस सिस्टम ने भी अच्छा प्रदर्शन किया.

इन फीचर्स की खासियत यह है कि ये लगातार काम करते रहते हैं, लेकिन ड्राइवर को बारबार स्क्रीन पर जाकर कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती. आपको एक उदाहरण के तौर पर बताए तो, स्मार्ट सिस्टम कार को आपकी पसंद के हिसाब से तैयार करने में मदद करता है. आपको हर बार वही सेटिंग दोबारा करने की जरूरत कम हो जाती है.यही वजह है कि जेडी पावर के नतीजे एक अहम बात की ओर इशारा करते हैं वह टेक्नोलॉजी ज्यादा पसंद आ सकती है जो कार चलाना आसान बनाए, न कि वह जो ड्राइवर को बारबार कुछ करने के लिए मजबूर करे.

ज्यादा एडवांस ADAS भी जरूरी नहीं कि ज्यादा पसंद आए

कारों में अब सिर्फ स्क्रीन ही नहीं बढ़ रही हैं. ड्राइविंग को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए ADAS यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम भी तेजी से इस्तेमाल हो रहा है.स्टडी में लेवल 2 और लेवल 2+ ADAS सिस्टम के बीच भी दिलचस्प अंतर देखने को मिला.लेवल 2+ सिस्टम में ज्यादा एडवांस हैंड्सफ्री फीचर्स मिलते हैं. इसके बावजूद उन्होंने पारंपरिक लेवल 2 सिस्टम की तुलना में मालिकों को बेहतर ओवरऑल एक्सपीरियंस की गारंटी नहीं दी. समस्याओं के आंकड़े देखें तो लेवल 2+ सिस्टम में हर 100 कारों पर 13.8 समस्याएं दर्ज हुईं, जबकि लेवल 2 सिस्टम में यह आंकड़ा 14.3 PP100 था. यानी समस्याओं के मामले में L2+ थोड़ा बेहतर रहा.

फिर भी ओनर्स ने पारंपरिक लेवल 2 टेक्नोलॉजी के ओवरऑल परफॉर्मेंस और एक्सपीरियंस को ज्यादा रेटिंग दी.जेडी पावर के मुताबिक, इसकी एक वजह यह हो सकती है कि ग्राहक फिलहाल ऐसे सिस्टम के साथ ज्यादा सहज महसूस करते हैं जो ड्राइवर की मदद साफ तौर पर करता है, बजाय इसके कि कार खुद बहुत ज्यादा काम करने लगे.

टेक्नोलॉजी के मामले में हुंडई लगातार सातवीं बार नंबर1

अब बात करते हैं उन कार कंपनियों की जिन्हें टेक्नोलॉजी के मामले में सबसे अच्छा परफॉर्मेंस करने के लिए रैंक किया गया. मासमार्केट ब्रांडों में हुंडई लगातार सातवें साल सबसे ऊपर रही. कंपनी ने 524 पॉइंट हासिल किए.GMC और किआ दोनों 470 पॉइंट के साथ दूसरे स्थान पर रहे.

प्रीमियम कार ब्रांडों में कैडिलैक ने 641 पॉइंट के साथ पहला स्थान हासिल किया. इसके बाद जेनेसिस 559 पॉइंट और BMW 524 पॉइंट के साथ लगभग दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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