कई बार लोग जल्दी फिट होने या फिर मसल्स गेन करने की चाह में भी जरूरत से ज्यादा वर्कआउट कर लेते हैं.ऐसे में आपको फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है. कोई भी एक्सरसाइज अपने शरीर की क्षमता के अनुसार करना ही सही रहता है. खासतौर पर अगर आप वेट ट्रेनिंग कर रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो इंजरी (चोट) होने का डर रहता है. कई बार इस वजह से आपकी पुरानी चोट भी ट्रिंगर हो सकती है और हार्ट की मसल्स पर भी दबाव बढ़ सकता है. इस आर्टिकल में जानेंगे कि आपके शरीर में कौन से संकेत ये बताते हैं कि आप ज्यादा वर्कआउट कर रहे हैं.
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वेट लॉस के लिए नई-नई जिम जॉइन की है और एक्साइटमेंट में खूब वर्कआउट कर रहे हैं तो आपको कुछ चीजें पहले समझने की जरूरत है. जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करने से आपकी सेहत पर बुरा असर होता है, इसलिए जोश में होश खोने से दूर रहें और अपने शरीर की क्षमता के मुताबिक ही जिम में वर्कआउट करें.
लगातार थकान बनी रहना
वर्कआउट करने के बाद हल्की थकान और मसल्स में दर्द होना सामान्य होता है. खासतौर पर शुरुआती दिनों में लोगों को दर्द ज्यादा होता है, लेकिन अगर आराम करने के बावजूद ये थकावट-दर्द लगातार बना रहे या फिर मसल्स को छूने पर भी दर्द महसूस हो रहा हो तो आपको इसपर ध्यान देने की जरूरत है.
नींद का पैटर्न बिगड़ना
वर्कआउट करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है, लेकिन अगर आपकी नींद अगर खराब हो रही है जैसे थकावट के बाद भी नींद न आना, रात में बार-बार नींद खुलना या नींद लेने के बावजूद सुस्ती आना, गहरी अच्छी नींद न महसूस होना…खासकर तब जब आप वर्कआउट डेज में हैं तो हो सकता है कि आप जरूरत से ज्यादा वर्कआउट कर रहे हो.
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ज्यादा चोटें और धीमी रिकवरी
वर्कआउट करने के दौरान मसल्स पर खिंचाव आता है और इसी वजह से दर्द होता है. हल्की-फुल्की चोट भी भी हो सकती हैं, लेकिन मसल्स खुद को रिपेयर कर लेती हैं. अगर आपके शरीर में गंभीर चोटें न होने के बावजूद भी दर्द और सूजन बने हुए हैं यानी चोटों की रिकवरी नहीं हो रही है तो आपको थोड़े आराम की जरूरत है. हो सकता है कि आप जरूरत से ज्यादा वर्कआउट कर रहे हो.
परफॉर्मेंस में कमी आना
ओवर वर्कआउट का आपके शरीर में सबसे पहला संकेत दिखता है परफॉर्मेंस में गिरावट आना. जैसे मान लीजिए कि आपने अपना वर्कआउट बढ़ा दिया है, लेकिन आपका शरीर उतना मजबूत नहीं है, भले ही ये बाहरी रूप से दिखाई देने लगे तो वर्कआउट करने के दौरान आपको परेशानी आती है, जिससे परफॉर्मेंस घटती है. जैसे जल्दी ही स्टैमिना कम हो जाना, आप जैसे डेली वर्कआउट एवरेज परफॉर्म कर रहे थे उसमें गिरावट आना, जो वजन आप आसानी से उठा लेते थे वो अब भारी महसूस हो रहा है तो इन संकेतों पर ध्यान दें.
मूड में चेंज और मोटिवेशन में कमी
अगर इन सारे लक्षणों के साथ ही आपको अपने मूड में भी चेंज देखने को मिल रहे हैं जैसे चिड़चिड़ापन रहना, उदासी, डेली रूटीन के काम या फिर ट्रेनिंग में मोटिवेशन की कमी, रोजमर्रा के कामों में बहुत ज्यादा मेहनत महसूस होने लगना जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो आपका ब्रेन ये बता रहा है कि दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में आपको वर्कआउट को बैलेंस करने की जरूरत है.





